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नया हरियाणा

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

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भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से श्रुति चौधरी और दिग्विजय चौटाला होंगे आमने-सामने!

2019 के चुनाव में बंसीलाल और देवीलाल के वंसज हो सकते हैं आमने-सामने!

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17 मई 2018



नया हरियाणा

भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से 2014 में धर्मबीर ने भाजपा की सीट पर चुनाव जीता था. धर्मबीर ने 2019 में लोकसभा के बजाय विधानसभा का चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. दूसरी तरफ इनेलो से दिग्विजय चौटाला और कांग्रेस से श्रुति चौधरी होने की संभावना है. भाजपा की तरफ से कौन चुनाव लड़ेगा, यह अभी तय नहीं है. परंतु मुकाबला श्रुति और दिग्विजय के बीच होने की पूरी संभावना है.

किरण चौधरी के तोशाम सीट को छोड़ने की खबरे चल रही हैं और बताया जा रहा है कि किरण चौधरी इस बार भिवानी से विधान सभा का चुनाव लड़ सकती हैं. ऐसे में देखा जाए तो धर्मबीर के लिए तोशाम सीट पर लड़ना आसान हो जाएगा. फिलहाल किरण चौधरी की सारा फोकस भिवानी विधान सभा सीट पर केंद्रित लग रहा है और उनकी सक्रियता भिवानी में लगातार बढ़ती हुई दिख रही है.
भिवानी लोकसभा सीट के अंतर्गत 8 विधान सभा सीटें आती हैं. जिनमें दादरी, बाढडा, तोशाम और लोहारू भिवानी जिले के अंतर्गत आती हैं, जबकि अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल और नांगलचौधरी महेंद्रगढ़ जिले में आती हैं. 1977 में  भिवानी पहली बार लोकसभा में चंद्रावती जनता पार्टी से जीती थी. उसके बाद 1980, 1984 में बंसीलाल कांग्रेस से जीते. 1987 में राम नारायण लोकदल से जीते. 1989 में बंसीलाल कांग्रेस से फिर जीते. 1991 में जंगबीर सिंह हरियाणा विकास पार्टी से जीते. 1996, 1998 में सुरेंद्र सिंह हरियाणा विकास पार्टी से जीते. 1999 में अजय सिंह इनेलो से जीते. 2004 में कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस से जीते. 

2009 में यह भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट हो गई और उस में श्रुति चौधरी(किरण चौधरी की लड़की) कांग्रेस से सांसद बनी. 2014 में धर्मबीर भाजपा की तरफ से सांसद बने. 2014 में यहां धर्मबीर को चुनौती इनेलो के राव बहादुर सिंह की तरफ से मिली, जबकि श्रुति चौधरी तीसरे नंबर पर रही. अब देखना यह होगा कि 2019 के चुनाव में यहां से भाजपा, इनेलो की तरफ से कौन चुनाव लड़ेंगे. धर्मबीर ने तो चुनाव लड़ने से मना कर दिया है और इनेलो की तरफ से दिग्विजय चौटाला के चुनाव लड़ने की उम्मीद जताई जा रही हैं. इस तरह मुकाबला यहां कांटे का होने वाला है.
 भिवानी विधान सभा सीट पर किरण चौधरी के लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं. आइये जानते हैं भिवानी सीट का इतिहास क्या रहा है? 1967 में बी देव भारतीय जनसंघ से बने, 1972 में बनारसीदास गुप्ता कांग्रेस से, 1977 में बीर सिंह जनता पार्टी से, 1982 में सागर राम कांग्रेस से, 1987 में बनारसीदास लोकदल से, 1991, 1996 में राम भजन अग्रवाल हरियाणा विकास पार्टी से, 2000 में बंसीलाल हरियाणा विकास पार्टी से, 2005 में शिव शंकर भारद्वाज कांग्रेस से, 2009 व 2014 में घनश्याम सरार्फ भाजपा से विधायक बने.किरण चौधरी की पारंपरिक सीट तोशाम से ही  मानी जाती रही है. 2005 से लेकर 2014 तक यहां से विधायक हैं. तोशाम सीट का इतिहास. 1962 में जगन नाथ आजाद बने, 1967 व 1972 में बंसीलाल कांग्रेस से, 1977 में आजाद सुंदर सिंह, 1982 में कांग्रेस से सुरेंद्र सिंह, 1987 में धर्मबीर लोकदल से, 1991 व 1996 में बंसीलाल हविपा से, 2000 में धर्मबीर कांग्रेस से, 2005 में सुरेंद्र सिंह कांग्रेस से विधायक रहे. किरण चौधरी के सीट बदलते ही भिवानी जिले के सारे समीकरण बदल जाएंगे और सबसे बड़ा बदलाव लोकसभा सीट को देखने को मिल सकता है.

5 जून 1955 को जन्मी किरण चौधरी वर्तमान में भिवानी जिले की तोशाम सीट से कांग्रेस की विधायक हैं. हरियाणा की राजनीति के तीन लालों में से एक बंसीलाल के लड़के सुरेंद्र सिंह की धर्मपत्नी हैं किरण चौधरी. सुरेंद्र सिंह की एक हैलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी. वर्तमान समय किरण चौधरी कांग्रेस में विधायक दल की नेता हैं. जबकि हरियाणा में भाजपा की सरकार है और विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला हैं.
2014 के चुनाव में भाजपा पहले नंबर की पार्टी बनी, इनेलो दूसरे नंबर पर और कांग्रेस दो बार शासन करने के बाद तीसरे पायदान पर खिसक गई.
 


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