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नया हरियाणा

शनिवार, 17 नवंबर 2018

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कर्नाटक के नतीजे : कांग्रेस-भाजपा की रणनीति और हरियाणा पर नतीजों का असर

इस लेख में बहुत जरूरी सवाल किए गए हैं जिनके जवाब सभी दलों को खोजने की जरूरत है।

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15 मई 2018

दीपक शर्मा

कर्नाटक के नतीजे आ चुके हैं और भाजपा अपनी सरकार बनाने जा रही है। 
दूसरी बात कांग्रेस अपनी प्रसांगिकता खो चुकी है।
अब हम बात करते हैं कर्नाटक में भाजपा की जीत के क्या कारण है?
जहां तक मेरा अनुमान है एक तो भाजपा के पास जमीन पर काम करने नेताओं की कोई कमी नहीं है।
जो लोगों के साथ जुड़ने में,संवाद करने में सबसे आगे रहते हैं।संगठन मजबूत है।दूसरी बात पैसा भी है। और वर्तमान समय में मोदी जी और अमित शाह की जोड़ी का किसी के पास कोई तोड़ नहीं है।
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पास लीडरशिप की बड़ी भारी किल्लत है।आप कह सकते हैं कि सूखा पड़ा है। जमीन पर काम करने वाला कोई बड़ा नेता नहीं है। 
हर किसी को AC में चलना है,ACमें ही रैली करनी है। एक रैली कर दी,दो-तीन ग्रुप मीटिंग कर दी,फोटो Facebook पर डाल दिए।
ऐसे सरकार नहीं बनती ऐसे लोगों से नहीं जुड़ा जाता। यह बात आज कांग्रेस पार्टी को सोचने और समझने की जरुरत है। 
मौजूदा समय कांग्रेस पार्टी को आत्म-मंथन करने का व चाटूकार नेताओं से पीछा छुड़ाने का सुनहरी अवसर है,क्योंकि आप विपक्ष में रहते हुए चाटूकार नेताओं से पीछा छुड़ा सकते हैं।और जमीन पर काम करने वाले नेताओं को सामने ला सकते हैं,जब आप विपक्ष में हो।
अगर आप 1885 की कांग्रेस की बात करो और 2018 कांग्रेस की बात करो तो तब वाली कांग्रेस और अब वाली कांग्रेस में जमीन आसमान का अंतर है।
कांग्रेस के नेता चुनाव में बरसाती मेंढक की तरह अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। 
वरना जनता के जो मुद्दे हैं,जो जमीनी मुद्दे हैं।
उनसे कांग्रेस का कोई सरोकार नहीं है।
आप देख लीजिए पिछले चार सालों के दौरान कांग्रेस पार्टी ने कोई जन-आंदोलन किया।
कर्नाटक के चुनावों में भष्ट्राचार को कितना बड़ा मुद्दा बना सकती थी कांग्रेस।
लेकिन मुद्दा ही नहीं बना पाई।
यदुरप्पा को भाजपा ने काफी पहले ही अपना मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कर दिया। 
यह वही येदियुरप्पा है,जो जेल में रह चुके हैं।चुनाव जीतने के लिए जन समर्थन और जन प्रबंधन दोनों की जरुरत होती है लेकिन दुर्भाग्यवश कांग्रेस पार्टी के पास आज ना तो जन समर्थन हैं और ना ही जन प्रबंधन करना आता है।मौजूदा समय में कांग्रेस दक्ष और सक्षम नहीं है मोदी जी और अमित शाह कि जोडी को  चुनौती देने में,क्योंकि दोनों जमीनी नेता है।दोनों ने खौर तपस्या करके ये स्थान हासिल किया है।
राहुल गांधी लगातार चुनाव हार रहे हैं।उनकी पार्टी ने 4 साल का वक्त गंवा दिया है।पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने का शानदार मौका मिला था 2014 में।
ना तो पार्टी खड़ी हो सकी और ना ही पार्टी जनता के बीच मुद्दे खड़ा कर सकी।
अब बात करते है प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयान की। जिसमें उन्होंने कहा था कि 15 मई को कांग्रेस पार्टी  3P बन जाएगी।पंजाब,पांडुचेरी और पार्टी।
मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं। 
कुछ लोग कहते हैं कि पंजाब में भाजपा हार गई है।
मैं इस बात को सिरे से नकारता हूं।
वहां भाजपा ने जानबूझकर आम आदमी पार्टी को हराने के लिए कांग्रेस की सरकार बनवाई।
क्योंकि मौजूदा समय में अरविंद केजरीवाल,कांग्रेस से ज्यादा प्रासंगिक है।ज्यादा जमीनी है,और काम करने वाला जुझारू व जुनूनी आदमी है।
लेकिन उल्टा कांग्रेस में अब देखो बीमार आदमी को मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बना दिया और वह स्वयं भ्रष्टाचार के कई मामलों में लिप्त हैं।
दूसरी तरफ चिदंबरम जी के अक्षर विभिन्न अखबारों में  लेख आते हैं,भ्रष्टाचार को लेकर,महंगाई को लेकर,तमाम जो अन्य तरह के मुद्दे है।लेकिन कभी स्वयं के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की बात नहीं करते।
अपने पुत्र मुंह में अंधे हो चुके है।
वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और कैथल से विधायक श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला जी उन्होंने भी हरियाणा में हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन में नौकरियों को लेकर हो रही धांधली को लेकर काफी हो हल्ला किया। लेकिन अगर उनसे पूछने वाला हो।
जब उनकी सरकार थी तब वो स्वंय 10 साल कैबिनेट मंत्री रहे।
आज हरियाणा में कोई भी मंत्री या विधायक सीधे रुप से किसी भी नौकरी के लिए हां नहीं भरता कि मैं लगवा दूंगा।
उस समय प्रत्येक मंत्री और विधायक बकायदा अपनी  कोठी पर लिस्ट लगाकर बताते थे कि वलाह आदमी मैंने लगवाया है।
मैं बड़ी जिम्मेदारी के साथ उनसे उनकी 10 साल की सरकार में 10 ऐसे नाम बता दे जो बिना सिफारिश से लगे हो।
आज हरियाणा में 90 प्रतिशत बच्चे मेरिट/ बिना सिफारिश से लग रहे हैं।
हरियाणा में लगभग एक लाख से डेढ़ लाख के बीच सरकारी अध्यापक है। 
मनोहर लाल सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला करते हुए ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू कर दी।
अब भ्रष्टाचार है ही नहीं ट्रांसफर को लेकर वरना बेचारे मास्टर मंत्रियों के पीछे धक्के खाते थे और बिचौलियों की चांदी होती थी। 
उसको लेकर कांग्रेस कुछ कहेगी।
लगभग हर विभाग में ऑनलाइन काम होता है। बायोमेट्रिक सिस्टम लागू कर दिया,अब हर कर्मचारी-हर अधिकारी टाइम पर आता है।जो टाइम पर नहीं आता उसका आप पता कर सकते हैं कि वह टाइम पर नहीं आता।
अब लगभग हर विभाग में ऑनलाइन नंबर लगते हैं। अधिकारी अब बैक डेट (Back Date) में नंबर नहीं लगा सकते।जिससे काफी हद तक भ्रष्टाचार के ऊपर रोक लगती है। 
पढ़ी-लिखी पंचायतों को मौका दिया।
हरियाणा के अंदर अब कोई भी अनपढ़ सरपंच नहीं है। क्या यह ऐतिहासिक फैसला नहीं है?
हां हरियाणा में कानून व्यवस्था को लेकर कुछ सवाल किए जा सकते हैं लेकिन वह सवाल भी नकारा विपक्ष नहीं कर पाया। क्योंकि जनता से जुड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।जब चुनाव आएंगे तब बरसाती मेंढक की तरह निकल आएंगे और वोट मांग लेंगे लोग दे देंगे।
कांग्रेस पार्टी जमीनी मुद्दों को उठाने में नाकाम रही मैं उनसे पूछना चाहता हूं।
क्या उन्होंने पनामा लीक को लेकर बात उठाई?
जिस पनामा लीक को लेकर हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में वहां के वजीरे आला हो अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और भ्रष्टाचार का मुकदमा भी चला और भी कई देश है जहां के प्रधानमंत्री को पनामा लीक में नाम आने के कारण अपने पद से हाथ धोना पड़ा। 
क्या कांग्रेस पार्टी ने महंगाई की बात उठाई? 
क्या कांग्रेस पार्टी ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर जिस प्रकार भाजपा भारत बंद करती थी किया क्या?
क्या कांग्रेस पार्टी ने 2जी घोटाले में कुछ ना निकलने के बारे में मुद्दे को जमीन पर उठाया? 
क्या कांग्रेस पार्टी ने जनलोकपाल बिल का मुद्दा उठाया? क्या कांग्रेस पार्टी ने अपने किसी भी राज्य के अंदर एक मजबूत जन लोकपाल बनाया?
क्या कांग्रेस पार्टी ने बेरोजगार युवकों से जुड़ने के लिए कुछ किया?
वह तो भला हो प्राइम टाइम में रवीश कुमार का वही आजकल विपक्ष की भूमिका अदा कर रहे हैं,बेरोजगार युवकों को लेकर।
एक रैली करने से एक दो घंटा भाषण देने से Twitter पर  हर रोज ट्वीट करने से कुछ नहीं होता है।
आप जब तक जनता के बीच मैं जाकर उनकी दुख-तकलीफों से दूर रूबरू नहीं होंगे।
तब तक आप को सत्ता की चाबी मिलने वाली नहीं है,यह तो तय है।
दूसरी बात बात करते हैं गठजोड़ की बात करते हैं जो यह चुनावों के समय दो भ्रष्टाचारियों का मिलन होता है। उसके ऊपर भी हम बात करते हैं।
श्रीमती मायावती जी ने उत्तर प्रदेश में अखिलेश जी के साथ समझौता कर लिया और इत्तेफाक से वह जीत भी गई।
लेकिन अब कर्नाटक में क्या हुआ,कारण पता क्या है? मायावती के साथ एक अजीब बात यह है कि वह समझौता तो कर लेती है।लेकिन उसको निभा नहीं पाती है।आपने कर्नाटक के अंदर कितनी रैलियां की? 
कितनी बार आप कर्नाटक के लोगों के बीच आई? 
सिर्फ आप दलितों की बात तब करती हैं जब आपको जरूरी लगता है।वरना दलितों के साथ क्या हो रहा है आपने कभी उनकी खबर ली क्या?
मायावती जी क्या यह कह सकती है कि वह भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं है।कहां से आए उनके पास इतने महंगे-महंगे पर्स,महंगे-महंगे जूते,सीटों को बेचना।
ऐसे आरोप मेरे नहीं है उन्हीं के पार्टी के लोग ऐसे आरोप सार्वजनिक रूप से उनके ऊपर लगा चुके हैं।
सीबीआई भी उनके ऊपर मामला दर्ज कर चुकी है उस मामले की जांच भी चल रही है।वह तो अब तक वोट बैंक का कमाल है कि वो अब तक जेल में नहीं गई।
वरना मैं आज लिखकर दे रहा हूं कि अगर 2019 में जो कि लगभग तय हैं  कि मोदी सरकार आएगी तो उनका जेल जाना तय है।
कुछ लोग बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को उचित ठहराते हैं क्या कोई आदमी यह कह सकता है कि लालू ने और लालू के परिवार ने बिहार के अंदर Gadar नहीं मचाया। 
क्या लालू और लालू के परिवार ने सत्ता में रहते हुए पैसे नहीं बटोरे।आज अगर वह जेल में है तो उसका सौ प्रतिशत श्रेय मोदी जी को जाता है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि 56 इंच की छाती मोदी जी रखते हैं वरना अगर कांग्रेस की सरकार होती तो लालू कभी जेल नहीं जाते।मोदी जी ने ठीक है।
एक बात और रह गई वह यह अब यह सारे विपक्षी कहेंगे ईवीएम के अंदर गड़बड़ है।
भाई ईवीएम के अंदर गड़बड़ है।
आपने क्या किया आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के अंदर विधानसभा के अंदर इस मुद्दे को बहुत अच्छी तरह से उठाया लेकिन वह भी यह साबित नहीं कर पाए कि गड़बड़ है ईवीएम में।
तो क्यों आपने कर्नाटक के अंदर चुनावों का बहिष्कार क्यों नहीं किया।
अब कांग्रेस का एक और जवाब आएगा क्योंकि जो कांग्रेस के चाटुकार नेता है वह क्या कहेंगे अब वह एक रटा-रटाया जवाब लेकर आएंगे कि कर्नाटक के अंदर Anti-Incumbancy थी सरकार के विरुद्ध।तो मैं पूछना चाहता हूं की आपके ही राज्य में Anti-Incumbancy क्यों होती है क्यों गुजरात में नहीं हुई।
अभी-अभी एक मित्र ने मुझे WhatsApp किया कि कर्नाटक के अंदर कांग्रेस को वोट शेयर भाजपा से कुछ मामूली सा ज्यादा है।ये बातें अपनी स्कीन सेव (Skin Save)करने के लिए।
राहुल गांधी जी ने जिस दिन बतौर अध्यक्ष कांग्रेस के महाधिवेशन के अंदर अपने भाषण के दौरान कहा था कि यह मंच नए लोगों के लिए खाली है। 
लेकिन कितने नए लोग आज के समय में कांग्रेस में है। जितने भी लोग मौजूदा समय में कांग्रेस के अंदर बड़े-बड़े पदों पर बैठे हैं।उन नेताओं के बाप-दादा कांग्रेस के अंदर बड़े-बड़े पदों पर रिटायर हो चुके हैं।और रिटायर होने के बाद अपने बच्चों को दोबारा फिर सर्विस में लगा दिया देश की सर्विस में नहीं कांग्रेस की सर्विस में क्योंकि देश तो जाए भाड़ में आजकल कांग्रेस भी भाड़ में हीं जा रही है।कांग्रेस के अंदर नए लोगों की कमी है क्योंकि नया आदमी आएगा दो बात नईं लेकर आएगा।संघर्ष वाले नेता है नहीं।
आप लोग एक काम कीजिए कांग्रेस के 10 शीर्ष नेताओं की और भाजपा के 10 शीर्ष नेताओं की एक सूची बनाइए और देखिए उनमें कौन ज्यादा जमीनी नेता है। आप पाएंगे कि कांग्रेस के 10 शीर्ष नेताओं में लगभग सभी नेता किसी ना किसी बड़े वृक्ष की शाखा है वहीं दूसरी तरफ भाजपा के 10 बड़े नेता आपको आम परिवारों के मिलेंगे।
कांग्रेस के नेताओं में Arrogance कूट-कूट कर भरा पड़ा है।वह भी उस समय जब वह विपक्ष में है।
जबकि विपक्ष में रहते हुए आदमी को और ज्यादा विनम्र और लचीला होने की जरूरत होती है। आज कांग्रेस पार्टी ना तो जमीन पर है ना सोशल मीडिया पर आपके साथ आज की कुछ सोशल मीडिया की तस्वीरें भी साझा कर रहा हूं आनंद लीजिएगा।
मेरा मानना है कि कांग्रेस को जेडीएस के साथ मिलकर सरकार नहीं बनानी चाहिए उन्हें विपक्ष में बैठकर आगामी लोकसभा के लिए जमीन पर काम करना चाहिए। अब कुछ कांग्रेसी दुहाई देंगे कि हमारे साथ गोवा में व मणिपुर में यह हुआ।तो मैं उनको बता दूं बोए पेड़ बबूल के तो आम कहां से होय। 
वह शायद भूल रहे हैं कि 2009 में हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जब सरकार बनी थी तब उन्होंने हरियाणा के राजनीति में पीएचडी किए जाने वाले शख्स चौधरी भजन लाल के पुत्र चौधरी कुलदीप बिश्नोई की पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस के 6 MLA में से 5 MLA कैसे तोड़े थे और कैसे पूरा टाइम स्पीकर साहब ने कैसे निकाल दिया।
आज तक किसी को नहीं समझ में आया।
बाद में माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की जजमेंट भी आई की पांचों MLA की सदस्यता रद्द कर दी जाती है। लेकिन तब तक वह MLA सत्ता के समुद्र में गोते लगा चुके थे और हीरे मोती-निकाल चुके थे। 

चलो खैर यह देश का दुर्भाग्य है कि आज हमारे पास विपक्ष नहीं है लेकिन देश के पास एक सशक्त सरकार है और मैं आज Facebook के माध्यम से इस सशक्त सरकार से निवेदन करना चाहूंगा कि आपके पास पूरी मजबूत सरकार हैं।
आप पूरी जिम्मेदारी और ताकत के साथ जो देश के अंदर भ्रष्टाचार,काला धन,बलात्कार,महंगाई,बेरोजगारी किसानों की समस्या,आम आदमी की समस्या को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीतियां बनाइए।
जिनसे इन सभी समस्याओं का काफी हद तक निदान हो सके।
बहुत-बहुत शुक्रिया और कर्नाटक की नई सरकार को ढेर सारी शुभकामनाएं कि जिस उम्मीद और उपेक्षा से वहां के लोगों ने आपको वोट किया है आप उन पर खरा उतरेंगे।


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