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नया हरियाणा

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

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चाटुकारिता के नेपथ्य में खड़ी रही पत्रकारिता!

पत्रकारों को पेंशन अच्छी बात है लेकिन इससे भी ज्यादा जरुरी है बेहतर पत्रकार तैयार करना. पत्रकारों को ट्रेनिंग दिलवाना. उनके लिए आसानी से 'वर्जन' उपलब्ध करवाना और सभी शहरों में अच्छे पुस्तकालयों का होना.


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27 अक्टूबर 2017

मनोज ठाकुर

हरियाणा सरकार ने पत्रकारों को ₹10000 मासिक पेंशन देने की अच्छी पहल की है। इससे बुजुर्ग पत्रकारों का भला होगा। कल इसी को लेकर पंचकूला में कार्यक्रम था। सरकार ने खुद अपने मुंह से अपने कामों की तारीफ की। सरकार की सुविधाओं का भोग कर रहे पत्रकार भूल गए कि वह सरकार के लिए काम करते हैं या जनता के लिए। उन्हें अपना दायित्व याद ही नहीं रहा। यहां लगभग हर जनर्लिस्ट में सरकार की चिरौरी करने की होड़ लगी हुई थी। अव्वल दर्जे की चाटुकारिता यहां देखने को मिल रही थी।

क्या पत्रकारिता का उद्देश्य सुविधा भर है
सरकारी सुविधाओं का भोग एक दायरे में रहे तो शायद पत्रकारिता के लिए ठीक माना जा सकता है। लेकिन यहां तो पत्रकारिता कम और सरकारी सुविधाओं का आनंद ज्यादा उठाने की होड़ लगी है। इस सरकार में ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे पत्रकारिता का भला हो। अलबत्ता पत्रकारों का भला करने की है सरकार गाहे-बगाहे कोशिश करती है। यह पेंशन भी इसी कोशिश का एक परिणाम भर है।

पत्रकारिता के सामने अपार चुनौतियां
पत्रकारिता में तेजी से बदल रही है सूचनाओं के नए नए स्त्रोत पैदा हो रहे ह। ऐसे में हर व्यक्ति पत्रकार हैं और लगातार सूचनाएं सोशल मीडिया पर डाल रहा ह। प्रोफेशनल पत्रकार कैसे अपना अस्तित्व बचाए यह उसके सामने बड़ी चुनौती है। इसी के साथ साथ प्रेस पर हमला पत्रकारों को धमकी और सरकार और उसके तंत्र द्वारा सूचनाओं को छुपाना भी पत्रकारिता के लिए एक बड़ी चुनौती है । इन चुनौतियों से कैसे निपटा जाए इस पर कोई चर्चा नहीं हुई । जो रिटायर्ड है उन्हें पेंशन मिल गई ठीक है सामाजिक सुरक्षा के लिए कुछ पैसे जरूरी है लेकिन जो युवा जनर्लिस्ट हैं वह कैसे एक अच्छे पत्रकार बन इस पर यहां कोई विचार ही नहीं हुआ। हद तो यह है कि पूरे हरियाणा या चंडीगढ़ में ऐसी कोई लाइब्रेरी नहीं है जहां पत्रकारों के लिए पढ़ने की सुविधा हो । यह बात भी सही है पत्रकार पढ़ते भी नहीं । लेकिन जो पढ़ना चाहते हैं उन्हें कम से कम यह सुविधा मिल जानी चाहिए। हरियाणा सचिवालय में एक लाइब्रेरी है लेकिन उसकी फीस काफी ज्यादा। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में लाइब्रेरी नहीं है। जिलों में भी लाइब्रेरी का अभाव है। पत्रकारों के लिए प्रशिक्षण न सरकार की ओर से कराए जा रहे हैं न मैनेजमेंट की ओर से कि मैं बेहतर पत्रकार बने रह सके। पत्रकार तभी जिंदा रहेगा जब उसके कंटेंट की सच्चाई के लिए पुख्ता सबूत होंगे क्योंकि सोशल मीडिया के इस दौर में जहां सूचनाओं की भयानक बाढ़ आई हुई है वहां सिर्फ पाठक एक ही बात खोज रहा है कि क्या यह सूचना सही है या गलत और यह हुनर सिर्फ एक पत्रकार के पास है जो कम से कम समय में यह पता कर सकता है जो सूचना चल रही है वह सही है या गलत। अफसोस इस बात का है इस सरकार में सूचना की सच्चाई जानने के स्रोत भी बंद किए जा रहे हैं और हम भी सरकार की जी हुजूरी में लगे हुए हैं। यानी हम उस डाल को काट रहे हैं जिस पर हम बैठे हुए हैं ।

मेरा व्यक्तिगत अनुभव है जब किसी सूचना के लिए एक-दो दिन नहीं महीनों महीना भटकना पड़ता और इस सरकार के अधिकारी अपना कार्य छोड़कर भाग खड़े होते हैं। वन विभाग इसका उदाहरण है । यहां के अधिकारी कम से कम मेरे साथ एक दर्जन भर अपना कार्यालय छोड़ कर बाहर चले गए क्योंकि उनके पास मैं जो वर्जन मांग रहा हूं उसका जवाब नहीं है गड़बड़ी इतनी ज्यादा कर दी कि विभाग के मंत्री भी भले ही अपने ऑफिस में खाली बैठे हो लेकिन वह भी बोल देते हैं कि व्यस्त हैं बाद में बात करेंगे। अफसोस वह बाद कभी आया नहीं। यह खबरों की हत्याओं का ऐसा भयानक दौर है जो सरकार ने किया जा रहा है। दिक्कत यह है कि इस पर कोई चर्चा ही नहीं हुई क्योंकि जनता को सच्चाई मालूम पढ़ना जरूरी है और एक पत्रकार इसीलिए पत्रकारिता में आया है की क्योंकि उसके अंदर आम आदमी की आवाज उठाने का जज्बा है ना कि सरकारी सुविधाएं भोगने की होड़ । यदि आप सुविधा बोलना चाहते हो तो कुछ और काम कर लीजिए नहीं कुछ कर सकते दलाली कर लीजिए बहुत पैसा कमा लेंगे यकीन मानिए यहां से ज्यादा सुविधाएं और इससे ज्यादा सम्मानित तरीके से मिल जाएंग। छोड़ दीजिए या स्पेस उन युवाओं के लिए जो कुछ करना चाहते ह। प्लीज सुविधाएं लीजिए लेकिन खबरों की हत्याओं पर नहीं। इसका विरोध होना चाहिए। क्योंकि इसके सिर्फ और सिर्फ एक ही उद्देश्य खबरों की हत्या खबरों की हत्या जो जनता के लिए हैं उन खबरों की हत्या जो समाज के लिए हैं उन खबरों की हत्या जो सरकार पर सवाल खड़ा करे।

 

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार मनोज ठाकुर की फेसबुक पोस्ट पर आधारित है.)


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