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नया हरियाणा

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

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हकीकत में हरि के हरियाणा में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं

एक सप्ताह में तीन रेप पीड़ितों ने की आत्महत्या!

, naya haryana, नया हरियाणा

10 मई 2018

प्रदीप डबास

एक हफ्ते के भीतर रेप पीड़ित दो बच्चियों ने आत्महत्या कर ली। बेहद शर्मनाक, भयावह और चिंताजनक है ये। प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाना अब लाजमी हो गया है। खासकर महिलाओं और छोटी बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधरों ने तो मानो सूबे को शर्मसार ही कर दिया है। लग रहा है कि आबरू के लुटरों को कानून का कोई भय ही नहीं है। ये स्थिति काफी भंयकर है। सरकार दावे तो तमाम करती है लेकिन हकीकत में हरि के हरियाणा में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अत्याचार सवाल खड़े कर रहे हैं। सवाल सरकार की इच्छा शक्ति पर। सवाल पुलिस की कार्य प्रणाली पर। सवाल देरी से मिलने वाले न्याय को लेकर। सवाल ये कि बच्चियों के मन में जो भय समाया हुआ उसे दूर कैसे किया जाये।

नेशनल क्राइम ब्यूरो की साल 2016 की रिपोर्ट में तो गैंगरेप के मामलों में हरियाणा पूरे देश में पहले नंबर पर था। ये बेहद गंभीर और डरा देने वाला था लेकिन करीब दो साल बाद भी स्थिति सुधरी हुई दिख नहीं रही है। पिछली जनगणना के आंकड़े कहते हैं कि हरियाणा में प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 879 थी। वर्तमान सरकार कहती है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का असर हुआ है और प्रदेश में प्रति एक हजार पर बच्चियों की संख्या बढ़ी है ये दावा सही भी हो सकता है लेकिन क्या प्रदेश की सरकार ये दावा भी कर सकती है कि प्रदेश में बच्चियां और महिलाएं सुरक्षित भी हैं। मुझे लगता है बिल्कुल नहीं कर सकती। आंकड़े भी कुछ ऐसा ही बोल रहे हैं। सीएडब्ल्यू सेल की ओर से करीब पांच महीने पहले यानि 2017 के आखिर में जारी किये गये आंकड़ों ने तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट कहती है कि प्रदेश में बीते साल 1,238 महिलाओं के साथ रेप के मामले दर्ज किए। यानि हरियाणा में रोजाना कम से कम चार महिलाएं रेप की शिकार हो रही हैं। कैसे निपटा जायेगा ऐसी स्थिति से? ये शायद सरकार को भी नहीं मालूम।

हरियाणा पुलिस की ओर से ही जारी आंकड़ें कहते हैं कि महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के अपहरण के मामले में भी हरियाणा की स्थिति भयावह है। एक वर्ष के दौरान करीब ढाई हजार मामले महिलाओं और लड़कियों के अपहण के दर्ज किये गये, यानि छह या इससे ज्यादा महिलाओं का रोजाना अपहण यहां हो जाता है। शर्म आनी चाहिए खाकी को। साल 2016 के दौरान के दौरान तो सूबे में गैंग रेप के 191 मामले दर्ज किए गये जो कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों से कहीं ज्यादा थे।

सवाल ये उठ रहा है कि इतनी चिंताजनक स्थिति होने के बावजूद सरकार कड़े कदम क्यों नहीं उठा रही है। क्यों रेप या गैंग रेप की शिकार बच्चियों को शर्म से जीने की बजाए मौत आसान लग रही है। हरियाणा शायद देश का पहला राज्य होगा जहां छेड़छाड़ से परेशान लड़कियां स्कूल जाना बंद कर देती हैं वो भी एक ही स्कूल की सैंकड़ों लड़कियां। यहां बेटियों के साथ हुए रेप के मामले में इंसाफ के लिए पिता को जान देनी पड़ जाती है। जनता जब सरकारें चुनने के लिए जब ईवीएम का बटन दबाती है तो उसके मन में ये विश्वास होता है कि उनकी बहू बेटियां सुरक्षित रहेंगी। ये भरोसा कायम रखना भी सरकारों का काम है ताकि अस्मत लुटने से बचाई जा सके और बेटियां पढ़ें भी आगे बढ़ें।

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