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नया हरियाणा

मंगलवार, 17 जुलाई 2018

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मेवात का कृषि विभाग राम भरोसे, स्टाफ का टोटा!

नूहं जिला कृषि पर आधारित जिला है जिले के 90% लोग कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं फिर भी जिले के लोगों को कृषि संबंधित जानकारी नहीं मिलने के कारण व्यवसाय में निराशा हाथ लग रही है। 

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10 मई 2018

नया हरियाणा

मेवात जिला कृषि पर आधारित जिला है जिले के 90% लोग कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं फिर भी जिले के लोगों को कृषि संबंधित जानकारी नहीं मिलने के कारण व्यवसाय में निराशा हाथ लग रही है।  नूंह जिले का कृषि विभाग स्टाफ व मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। कई बार विभागीय उच्च अधिकारियों को समस्या के निदान के लिए पत्र लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके चलते विभाग के बहुत से कार्य प्रभावित हो रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। लेकिन कृषि विभाग को लेकर सरकार चितित नजर नहीं आ रही। विभाग में नई भर्ती न होने और पुरानों के सेवानिवृत होने से विभाग में अब ऊंट के मुंह में जीरा समान स्टाफ शेष है। ऐसे में किसान विभाग की योजनाओं का लाभ समुचित तरीके से नहीं उठा पा रहे हैं। किसान अपनी शिकायतों के निवारण के लिए उनको इधर-उधर भटकते देखा जा सकता है। किसानों को समय पर उचित सलाह तक नहीं मिल पाती है।

कृषि विभाग के अधिकारी रतन सिंह ने बताया कि जिले में 115647 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है जिस पर 75959 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई से कृषि की जाती है तथा पूरे जिले में 135000 किसान है जिले में प्रति किसान के हिसाब से 2:15 एकड़ भूमि हिस्से में आती है. उन्होंने बताया कि जिले में टोटल 171 विभागीय पद हैं। जिनमें से 22 पद ही भरी हुई है तथा 149 पद अभी भी खाली है। एग्रीकल्चर ऑफिसर की 16 पद हैं जिनमें से दो पद भरी हुई है 14 पद खाली है इसी प्रकार से एक्सटेंशन ऑफिसर 59 पद है जिनमें से 7 पद भरी हुई है 52 पद रिक्त हैं ग्राम सेवक एआई एग्रीकल्चर के 13 पद हैं जिसमें एक पद भरा हुआ है 12 पद रिक्त हैं इसी प्रकार से जूनियर क्लर्क स्टेनो के 16 पद हैं जिनमें से एक पद पर भरा हुआ है 15 पद रिक्त हैं इसी प्रकार से पेओन के 31 पद  हैं 2 पद भरे हुए हैं 29 रिक्त पद हैं नूंह जिले के कृषि उपनिदेशक के पास दो जिलों का चार्ज है। अकाउंटेंट, क्लर्क , तकनीकी सहायक व चतुर्थ श्रेणी के समस्त पद रिक्त हैं। 

प्रभावित काम के बोझ तले दबा स्टाफ फाइलों में ही उलझा रहता है। न तो अधिकारी ठीक ढंग से किसानों के बीच जाकर उनकी फसलों में लगने वाली बीमारियों की रोकथाम के उपाय ही बता पा रहे हैं और न ही उन्हें समय पर सलाह दे पा रहे हैं। स्टाफ की कमी ने सरकारी योजनाओं की चाल बिगाड़ दी है। जिले के किसानों का कहना है कि कृषि विभाग की तरफ से सरकार की किसी भी योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा है विभाग में कर्मचारियों की कमी है।  सरकार द्वारा चलाई जा रही किसी भी स्कीम का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है ना ही कोई अधिकारी लोगों को स्कीमों की जानकारी दे रहे  है। जिले में कृषि विभाग से कोई लाभ नहीं हो पा रहा है ना ही विभाग द्वारा किसी प्रकार की कोई जानकारी दी जा रही है। 

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