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नया हरियाणा

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

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ओमप्रकाश चौटाला के जेल तोड़कर आने वाले बयान के सियासी मायने

सरसरी नज़र से देखने पर इस बयान का सीधा असर इनैलो के आक्रामक कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला नजर आता है, परंतु सामाजिक और कानूनी नजर से  यह बयान खौफ पैदा करता है.


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26 अक्टूबर 2017

नया हरियाणा

इनैलो सुप्रीमो ने पिहोवा में दिए अपने विवादास्पद बयान की वजह से एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. उन्होंने वहां मंच से कहा कि उन्हें जेल तोड़कर भी बाहर आना पड़ा तो वो आ जाएंगे. सरसरी नज़र से देखने पर इस बयान का सीधा असर इनैलो के आक्रामक कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाला नजर आता है, परंतु सामाजिक और कानूनी नजर से  यह बयान खौफ पैदा करता है. खासकर तब जब हरियाणा का बड़ा तबका आक्रामक कार्यकर्ताओं से पहले ही खौफ खाता हो. ऐसे में इनके इस बयान के सियासी मायने बदल जाते हैं और हो सकता है कि यह बयान कार्यकर्ताओं में जोश तो जरूर भर देगा. पर दूसरी तरफ जनता पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला जेल में अपने अच्छे कंडक्ट की वजह से 14 दिन के फरलो पर जेल से बाहर आए हुए हैं. लेकिन इन 14 दिनों को वो जमकर अपने राजनीतिक मंसूबों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. जेल के कानूनों के अनुसार किसी सजायाफ्ता कैदी के कानूनी रूप से कुछ अवधि के लिए जेल से बाहर आने के दो रास्ते हैं- 
एक- पैरोल से
दूसरा- फरलो नियम के तहत।

डच शब्द वरलोफ से पैदा हुआ फरलो (furlough) जेल का एक ऐसा नियम है जिसमें किसी सजायाफ्ता कैदी को एक या दो साल की अवधि में एक बार 14 दिन की छुट्टी दी जाती है। फरलो का उद्देश्य यह होता है कि कैदी कुछ दिन जेल से बाहर जाकर अपने पारिवारिक, सामाजिक संबंधों को बहाल कर सके और लगातार जेल जीवन के दुष्प्रभावों से बच सके।

एक के बाद एक लगातार कार्यकर्ताओं से मुलाकात और जनसभाएं कर रहे ओम प्रकाश चौटाला ने रविवार को एक विवादास्पद बयान दे दिया. ओम प्रकाश चौटाला ने अपने कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए मंच से ऐलान किया कि वो हरियाणा के अगले विधानसभा चुनाव के दौरान किसी भी तरह से कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद रहेंगे और इसके लिए भले ही उन्हें जेल को तोड़कर ही क्यूं ना आना पड़े.

ओमप्रकाश चौटाला के जेल तोड़कर बाहर आने के बयान पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं. हरियाणा बीजेपी के सीनियर विधायक ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि अपने इसी आचरण की वजह से ही ओम प्रकाश चौटाला जेल में बंद हैं और उनका ये बयान उनकी मानसिकता को दिखाता है. वहीं हरियाणा कांग्रेस के सीनियर लीडर करण दलाल ने कहा कि ओम प्रकाश चौटाला अपने इन्हीं कृत्यों की वजह से ही फिलहाल जेल में बंद है और उनका ये बयान ये बताने के लिए काफी है कि वो कानून का कितना सम्मान करते हैं और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी वो किस तरह से कानून को ठेंगा दिखाने की नसीहत दे रहे हैं.

वहीं अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता की तरफ से दिए गए विवादास्पद बयान पर इंडियन नेशनल लोकदल के  नेता सफाई देते नजर आए. इनेलो नेता ने कहा कि ओमप्रकाश चौटाला के बयान को निगेटिव तरीके से देखा जा रहा है वो सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए ये बात कह रहे थे कि वो अगले विधानसभा चुनाव में उनके बीच मौजूद रहेंगे और इसी वजह से उन्होंने सिर्फ सांकेतिक तौर पर जेल तोड़कर बाहर आने की बात कही थी और ओम प्रकाश चौटाला कानून का पूरा सम्मान करते हैं और सजा मिलने के बाद से ही वो जेल में बंद है ऐसे में जेल तोड़कर बाहर आने का कोई सवाल नहीं उठता लेकिन कुछ लोग उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं.
इनैलो पार्टी जिस कठिन दौर से गुजर रही है, ऐसे में इनैलो सुप्रीमो को ऐसे विवादास्पद बयान देने से बचना चाहिए. क्योंकि इससे पार्टी का नुकसान ज्यादा होता हुआ प्रतीत हो रहा है. मजेदार बात यह है की चौटाला बखूबी जानते हैं की उनके ब्यान मुसीबत भी खड़ी कर सकते हैं इसलिए वे जहाँ इस तरह के बयान देते हैं वहां किसी को वीडियो रिकोर्डिंग भी नहीं करने दी जाती. सभी कैमरे और मोबाइल बंद करवा दिए जाते हैं.


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