Privacy Policy | About Us | Contact Us

नया हरियाणा

शुक्रवार, 25 मई 2018

पहला पन्‍ना English लोकप्रिय राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात समाज और संस्कृति समीक्षा Faking Views

पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं पेशा भर है

भावुक किस्म के लोग इस पेशे में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं,

, naya haryana, नया हरियाणा

3 मई 2018

डॉ. नवीन रमण

पत्रकारिता दूसरे पेशों की तरह ही एक पेशा भर है. हां, आजादी के दौर में पत्रकारिता ने कुछ हद तक मिशन की तरह अपनी भूमिका जरूर निभाई थी. था तब भी यह प्योर बिजनस और सत्ता व पॉवर में काबिज होने का माध्यम ही. यह बात अलग है कि हम भारतीय गंभीर से गंभीर विषय में भावुकता का लेप लगाकर पेश करने के आदी हो चुके हैं.

जैसे शिक्षक कहेंगे कि वो नौकरी नहीं सेवा कर रहे हैं समाज की. जबकि अर्थशास्त्र में सेवा मूलतः सर्विस कहलाती है, जो कभी मुफ्त नहीं होती.

दूसरी बात हर पेशे की तरह इस पेशे में भी आर्थिक लेनदेन, अपने ऐजेंडे आदि प्रोपगेंडे चलते रहे हैं और चलते रहेंगे. यह बात अलग है कि खुद की एजेंडे सभी को सच लगते हैं और दूसरों के झूठ.

पिछले कुछ साल से मीडिया को लेकर बिकाऊ शब्द इतना आम हो गया है कि अपने प्रतिपक्ष विचार को बिकाऊ कहकर तुरंत खारिज कर देने का रिवाज आम है. दूसरी तरफ खुद को फिट न पाता देखकर निरिह होने का अभिनय और दूसरों पर कीचड़ उछालकर खुद को आत्मसंतुष्टि देने की रिवायत चल पड़ी है. अर्थशास्त्र और राजनीति शास्त्र में भावुकता का लेप सहानुभूति तो दिलवा सकता है, पर पेशे के साथ न्याय कभी नहीं हो सकता.

पत्रकारिता में दो जुमले सबसे आम है. पहला यह कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ(खंबा) है. दूसरा जुमला यह है कि पत्रकार को हमेशा विपक्ष में होना चाहिए. दरअसल ये दोनों जुमले पत्रकारिता के बेसिक नियमों के ही खिलाफ हैं. पत्रकार पार्टी नहीं है जो वह विपक्ष की भूमिका निभाए. दूसरा मीडिया जब अन्य व्यापारों की तरह एक व्यापार है तो वह लोकतंत्र का स्तंभ कैसे हो सकता है.

पत्रकारिता अन्य पेशों की तरह एक पेशा(प्रोफेशनल पेश) है. उसे उस रूप में ग्रहण करना चाहिए. क्रांति करने के लिए या आपका मकसद पूरा करने के लिए दूसरा आप पर पैसे क्यों लगाएगा?

आजकल तीन तरह की पत्रकारिता देखने को मिलती है. पहली सरकार के पक्ष में खड़ी दिखेगी. दूसरी सरकार के विपक्ष में खड़ी दिखेगी. तीसरी दिनभर पोर्न या ग्लैमर बेचती हुई मिलेगी. तीनों की ही तरह की पत्रकारिता थोड़ी बहुत इधर-उधर होने के साथ अपने ऐजेंडे पर काम करती रहती है. भावुक किस्म के लोग इस पेशे में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं, खासकर वामपंथी क्रांति के बाद सबसे ज्यादा ठगे जाने वाला पेशा पत्रकारिता का ही है.

Tags:



बाकी समाचार