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नया हरियाणा

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

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यशपाल मलिक के कहने से कोई जाट समाज से बहिष्कृत हो जायेगा क्या?

जाट आरक्षण की आड़ में यशपाल मलिक अलग राजनीति कर रहे हैं. उन्हें जो काम करना चाहिए उसे छोड़कर दूसरे कामों में व्यस्त हैं. उनसे कुछ गंभीर सवाल हैं जिनके जवाब समाज का हर व्यक्ति जानना चाहता है.


yashpal malik ke kahne se koi jat samaj , naya haryana

26 अक्टूबर 2017

नारायण सिंह तेहलान

समिति 26 को जसिया में करेगी जाट महारैली.. अभिमन्यु और बराला को नहीं भेजेंगे निमंत्रण बाकी सब नेताओं को भेजेंगे... युवाओं को जेल से बाहर लाने के प्रयास नहीं किए तो नवंबर में करेंगे वित्तमंत्री का बहिष्कार: यशपाल मलिक।

मेरे कुछ साधारण से सवाल 1) कौनसी समिति कर रही है महारैली, यशपाल वाली या हरियाणा वालों वाली? अगर यशपाल वाली कर रही है तो उसकी मर्जी किसी को बुलाए किसी को न बुलाए। इसमें बहिष्कार जैसी बात कहाँ से आ गई। अपनी अपनी शादियों में सब तो सबको नहीं बुलाते तो सब बहिष्कृत हो गये क्या? हरियाणा वाले आपको अपनी रैली में नहीं बुलाएंगे तो आपका भी बहिष्कार माना जाएगा।

2) रैली आप वाली समिति के समर्थक जाटों की है या सब जाटों की। आपकी है तो बात खत्म हुई और सबकी है तो आप कौन होते हैं किसी को बुलाने न बुलाने वाले। अपने आप भी कोई जा सकता है।

3) आप कह रहे हैं अभिमन्यु ने जाट युवाओं को बाहर लाने के प्रयास न किये तो.... कमाल है। अब आप यह समझने लगे हैं कि हरियाणा के जाटों में इतनी भी अक्ल नहीं है कि वे इस मामूली सी बात को समझ सकें कि यह जिम्मेदारी किसकी है? समझौता आपके साथ हुआ। राजनाथ जी से आपकी बात हुई शाह जी से हुई मुख्यमंत्री जी से हुई। केंद्रीय मंत्री और प्रमुख बीजेपी नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह से हुई। आपने कभी इनके बहिष्कार की बात नहीं की। जिस जगह से आपने अपने मुकदमे को खत्म कराया इनका भी करा सकते थे। कैप्टन की कोठी से अलग बहुत मामले हैं उनमें क्या प्रयास किये आपने। कई लोगों को सजा हो चुकी है कईयों को होने को है वहां क्या किया आपने।

मुख्यमंत्री से ज्यादा बराला या अभिमन्यु किस प्रकार दोषी हो गए। आप एक शब्द नहीं बोल रहे। कई जाट मंत्री केंद्र में हैं आप एक शब्द नहीं बोल रहे। करोड़ों स्वाहा करके और बीसियों जान गंवा कर आपका रिजल्ट जीरो है। आपने खूब उल्लू बनाया। अब भी बना रहे हैं और हरियाणा के जाटों की उदारता देखिये कि राजी होकर बन रहे हैं। एक कुशल आक्रमणकारी की तरह आपने दुश्मन के संसाधनों पर कब्जा किया। अब आपके कब्जे में रुपया है। रुपये से समर्थक भी मिल जाते हैं। विरोधियों को गालियां देने वाले भी मिल जाते हैं। जाट समुदाय ने आपको अपना नेता बनाया था किसी का दुमछल्ला नहीं लेकिन आप आखिर वही बनकर रहे। आप लाख कोशिश कर लो अपनी खोई हुई साख को लौटा नहीं पाओगे। दलदल में फंसे हो जितने हिलोगे नीचे जाओगे।

न आपसे मुझे कोई विरोध है और न अभिमन्यु व बराला से मेरा कोई मोह। आप कल तक यह कहते रहे थे कि समझौते की शर्तों पर तेजी से काम हो रहा है तो फिर आज एकाएक क्या हो गया जो यह कहना पड रहा है कि गति बहुत धीमी है। इसका अर्थ और कारण समझाने की कृपा करेंगे। आपसे तो व्यक्तिगत परिचय है उनसे तो वह भी नहीं लेकिन बेदम की बात बेदम की ही रहती है। आपका हिसाब न देना, अपनी गलतियों को स्वीकार न करना, जिस मुद्दे को लेकर चल थे उसमें कुछ प्राप्त किये बिना ट्रैक बदल देना न तो आपके हित में रहे और न कौम के हित में। अगर आप सबको साथ लेकर चलने की दानिशमंदी दिखाते तो निश्चित रूप से आप बाबा टिकैत के बराबर की हस्ती होते।

अब आप चाहे कितने ही बड़े संस्थान खोलकर अपने अहंकार की तुष्टि कर लें लेकिन ये रोहतक की जाट संस्थाओं जैसी नहीं हो सकती क्योंकि रोहतक वाली जहां कौम की एकता बुजुर्गों के त्याग बलिदान और स्वाभिमान की शान के प्रतीक रूप में जानी जाती रहेंगी वहीं ये कौम की एकता के कब्रिस्तान के रूप में। काश यह आयोजन यशपाल की समिति का न होकर पूरी कौम की समिति द्वारा आयोजित होता तथा कौम के युवाओं के जेलों से बाहर आने के बाद होता और इसका भूमिपूजन उन युवाओं और मृतकों के परिजनों के हाथों से होता। अगर आप का मकसद कौम के भले और एकता तथा आरक्षण के लिए था तो सॉरी, आप पूरी तरह से नाकाम रहे हैं और अगर जाट कौम को चंदो की तरह बिखेरना था तो सफलता के लिए बधाई। यहाँ मैं कैप्टन अभिमन्यु और सुभाष बराला से भी सख्त लहजे में कहना चाहूंगा कि अगर उनके प्रयासों में कमी है तो पूरी करें। कमी नहीं है तो स्पष्ट करें।

(नारायण सिंह तेहलान वरिष्ठ वकील है और हरियाणा से जुड़े मुद्दों पर लगातार लिखते रहते हैं. यह लेख उनकी फेसबुक पोस्ट पर आधारित है)

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