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नया हरियाणा

शनिवार, 25 मई 2019

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जुर्माना और मुआवजे में क्यों है आखिर सरकार की दोहरी नीति

सरकार की नीयत साफ है तो सरकार दोनों काम सैटेलाइट के माध्यम से क्यों नहीं करती

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21 अप्रैल 2018



नया हरियाणा

आखिर सरकार दोहरी नीति से काम क्यों करती है? सरकार को जुर्माना लगाना होता है तो सैटेलाइट का सहारा लेती है और जब किसानों को राहत देने की बात आती है तो पटवारियों के भरोसे चलने लगती है. आखिर सरकार की यह दोहरी नीति किस मानसिकता का परिचय देती है.

एक तरफ जलती पराली तो सैटेलाइट से देखती है सरकार. क्योंकि तब सरकार को किसानों पर जुर्माना लगाना होता है.

दूसरी तरफ जब किसानों को उसकी फसल में आग लगने के बाद राहत देनी होती है, तो वह पटवारी के माध्यम से गिरदावरी करवाती है. जबकि सभी जानते हैं पटवारी के स्तर पैसे के लेनदेन से किस तरह फर्जी रिकॉर्ड बनाए या बदलवाए जाते हैं. अगर सरकार की नीयत साफ है तो वह दोनों मामलों में एक ही तरीका क्यों नहीं अपनाती.

सोशल मीडिया पर एक फेसबुक यूजर ने प्रतिक्रिया स्वरूप लिखा है कि-“ जिन किसानो की फसल जल रही वो सेटेलाइट न ना दीखती के, ईंब सेटेलाइट के दीदै फुट गए के। विशेष गिरदावरी में पटवारी बाबू आ के लेंस से देख कर बताएंगे, गवाही तो गांधी जी की ही चलेगी फिर। सेटेलाइट को तुरंत प्रोएक्टिव मोड़ में लगा कर डिटेल जिला प्रशासन के पास भेजनी चाहिए और किसान को तुरंत महसूस करवाया जाना चाहिए के भाई तेरे साथ खड़े हैं । 24 घंटे में पैसे किसान के अककॉउंट में आने चाहिए आखिर पूरे परिवार और कुनबे के मनोबल का सवाल है।”

सरकार को चाहिए कि किसानों को ईमानदारी से सैटेलाइट के माध्यम से आकलन करके उन्हें जल्द से जल्द राहत पहुंचाए. ताकि किसान इस आफत से संभल सकें.


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