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नया हरियाणा

शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

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बच्चियों के साथ बलात्कार करने की दरिंदगी कहाँ से लाते हो!

संजू सैनी ने बलात्कार की घटनाओं पर आक्रोश व्यक्त करते हुए यह कविता लिखी है।

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20 अप्रैल 2018

संजू सैनी

छीना हमने बचपन उनका 
और हर सपने को मारा है

जंजीरों में जकडा उसको
मानसिकता से हाराया है

एक घर में कैद थी वो 
और दूसरी वो होगा
जिसमें उसको जाना है

खूब खेलती थी बचपन में
बड़े सपनों में रहती थी,
आसमान को छूने की 
उसको ज़िद्द सी रहती थी,
अपने आप से खूब झगड़ती 
एक शब्द ना कहती थी,

भाई से प्यार जताती
मां में था प्यार उसका 
बापू की अजीज थी वो 
परिवार में था संसार उसका 

हिम्मत कहां से लाते हैं
कौन है ये दरिंदें 
और 
ये कौन दुनिया से आते हैं
मरे शरीरों के साथ ये 
आत्मा कहां से पाते हैं।
रोती होगी कोख भी 
जरूर ये जन्म जहां से पाते हैं

रब्ब अल्लाह भगवान मरा है
या इन सब की बारी है,
कानून मरा होगा जरूर
या सब पे पैसा भारी है
करते रहना जुल्म यूं ही
ये सारी कायनात तुम्हारी है

याद रखना बस इतनी बातें 
जब से बनी सृष्टि 
और बिखरेगी 
तब से दुनिया में नारी है।

छिना बचपन तुमने हमारा 
और हर सपने को मारा है
शांत करे आग को और 
जहर हमेशा पीती हूं 
खुद को जान फिर भी मैं 
तुम्हारे लिए जीती हूं
बचपन छीन लिया मेरा 
सपनों को मार गिराया है
जा मरो डूब के 
शर्म रहे तो 
या फिर जानवर बन जाओ
देंगे पिंजरा रहने को ,
या फिर इंसानियत समझ जाओ,

बस करो! अब बस करो! 
ना खुन तुम मेरा खोलाओ
नारी हूं कोई अभिशाप नहीं
पवित्र हूं कोई पाप नहीं
सोच के गन्दे हो चुके 
मैं मां, बेटी ,बहन हूं
ये तुम कहते हो , मैं अपने आप नहीं।।

 

फोटो इंटरनेट से


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