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नया हरियाणा

बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

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बीजेपी सेंटीमेंट पर और कांग्रेस कैंडिडेट पर चुनाव लड़ेगी

जनभावनाओं से बीजेपी 75 पार करती हुई दिख रही है.

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11 सितंबर 2019



नया हरियाणा

भारतीय राजनीतिक के इतिहास में लगभग सभी चुनाव सेंटिमेंट पर जीते गए हैं. जिसे राजनीतिक भाषा में लहर कहा जाता है. समाजशास्त्रीय भाषा में जनता की भावनाओं की अभिव्यक्ति कहा जाता है. हालांकि भारतीय लोकमानस के राजनीतिक विवेक को लेकर तथाकथित बुद्धिजीवी सवाल उठाते रहे हैं. दरअसल वो खुद को विशिष्ट बतलाते हुए आमजन को सामान्य बुद्धि के स्तर का व्याख्यायित करते रहे हैं. जबकि जनमानस की ऐसी अवहेलना करने के उदाहरण कम ही देशों में देखने को मिलते हैं. इस माइंड सैट के पीछे कहीं न कहीं पश्चिमी मानसिकता जिम्मेदार रही है, जिसने भारतीय समाज व संस्कृति को हमेशा कमत्तर माना और प्रस्तुतीकरण भी किया है।
इस तरह के प्रायोजित माइंड सैट और मीडिया समूहों की मोनोपोली को सोशल मीडिया ने तोड़ दिया. जिसमें सस्ते फोनों और इंटरनेट ने क्रांति करने का काम किया है. जिसे वामपंथी और कांग्रेसी समझ नहीं पा रहे हैं. वो इसे बीजेपी के द्वारा सोशल मीडिया का बेजा इस्तेमाल करने का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि सच्चाई ये है कि जनभावनाओं को एक ऐसा प्लेटफार्म मिल गया है, जिसका इंतजार भारतीय जनमानस लंबे अर्से से कर रहा था.

सोशल मीडिया के आने के बाद खासकर सस्ती इंटरनेट क्रांति के बाद भारतीय जनमानस को एक प्लेटफार्म मिल गया है. जो संवाद-विवाद और प्रतिवाद का एक ऐसा माध्यम बन गया है, जिसके कारण इलिट मीडिया का वर्चस्व पहले की तुलना में धरातल पर पहुंच गया है. भूमंडलीकरण के दौर में अब न तो किसी आवाज को दबाया जा सकता और न संपादित किया जा सकता, क्योंकि इलिट मीडिया ने जो राजनीतिक प्यूरीफायर लगाए हुए थे, उन्हें सोशल मीडिया ने ध्वस्त कर दिया. अब प्रिंट और इलैक्ट्रानिक मीडिया के संपादक गौण हो गए हैं.

अब सोशल मीडिया राजनीतिक विमर्शों में अहम् भूमिका निभा रहा है. इस पर अभी किसी तरह की पाबंदियां भी नहीं लगाई गई हैं. हालांकि इसके कारण हिंसा भी बढ़ी है. जो समय के साथ कम होने की संभावना है.

2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के चेहरे और सेंटिमेंट पर लड़ा गया है और बड़े मार्जन से बीजेपी ने जीत दर्ज की है. 2019 का लोकसभा चुनाव भी हरियाणा में कांग्रेस के कैंडिडेट बनाम बीजेपी के सेंटिमेंट के बीच लड़ा गया था और परिणाम बीजेपी के पक्ष में जाते हुए 10 की 10 लोकसभा सीटें आई थी. लोकसभा में कांग्रेस के उम्मीदवार निर्दलीय प्रत्याशियों की तरह चुनाव लड़ रहे थे. परिणाम ने सभी को चौका दिया था.
देश की जनता ने जो प्यार और विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर दोबारा जताया, उस विश्वास को मजबूती देने की दिशा में चतुर्मुखी विकास की नई-नई परिकल्पनाओं को साकार करने की दिशा में मोदी सरकार आगे बढ़ रही है और समस्त भारत की एकता एवं अखंडता के लिए जनभावनाओं के अनुरूप 370 और 35a को खत्म करके एक देश, एक विधान के संकल्प को चरितार्थ किया. दूसरी तरफ हरियाण की मनोहर सरकार ने सबका साथ सबका विकास के पथ पर चलते हुए प्रदेश से भाई भतीजावाद, भेदभाव, भ्रष्टाचार व परिवारवाद आदि को दरकिनार करते हुए जन भावनाओं के अनुरूप कार्य करने का दावा किया है. हरियाणा एक हरियाणवी एक के नारे पर पूरी सरकार दृढ संकल्प के साथ एकजुट होकर प्रदेश की जनता की सेवा करने का दावा कर रही है. केंद्र और राज्य दोनों सरकार ने जनभावनाओं के अनुरूप काम किया, जिसके कारण केंद्र में मोदी सरकार की स्वीकार्यता पर जनता ने मोहर लगाई. उसी तरह हरियाणा में मनोहर सरकार ने 5 साल में हुए सभी चुनावों में जीत दर्ज की. जिससे साफ दिखता है कि हरियाणा की जनता मनोहर सरकार की कार्यशैली से खुश है. इसी खुशी में बीजेपी ने 75 पार का नारा दिया है.
बीजेपी ने 5 साल में अपनी कार्यशैली से जनता को प्रभावित किया तो ग्राउंड पर भी पार्टी व संगठन को मजबूती प्रदान की. वहीं कांग्रेस का ग्राउंड वर्क लोकसभा में मिली करारी हार के बाद भी जीरो रहा है. जिसका खामियाजा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है. कांग्रेस कैंडिडेट के भरोसे सट्टा बाजार में भले ही डबल डिजीट में आ गई है परंतु जनभावनाओं के सेंटिमेंट के सामने कैंडिडेट का टिकना बहुत अंसभव काम है.

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