Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

गुरूवार, 19 सितंबर 2019

पहला पन्‍ना सर्वे लोकप्रिय 90 विधान सभा हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप English

'समझौते' की हामी भर हार स्वीकार कर चुके हैं अभय चौटाला!

किसी दो दलों में समझौते करवाने का काम खाप का कभी नहीं हो सकता.

Abhay Chautala, Dushyant Chautala, JJP INLO agreement, Khaps role negative, naya haryana, नया हरियाणा

2 सितंबर 2019



नया हरियाणा

क्या एकजुट होगा चौटाला परिवार! ये कोई सवाल नहीं है बल्कि कुछ संगठनों की तरफ से इस तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। इस संगठनों का प्रयास है कि बीजेपी की एक तरफा लहर को किसी तरह रोका जाए, भले ही इसके लिए उन्हें अभय चौटाला व अजय चौटाला परिवार को मनाने के लिए कुछ भी करना पड़ जाए। वो यहां तक ही नहीं रुक रहे हैं बल्कि उनका प्रयास है कि सभी विपक्षी दलों को एक करके महा गठबंधन बनाया जा सके। ऐसा कोई राजनीतिक नेता सोचता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। परन्तु सामाजिक संगठन इस तरह का प्रयास करते हैं तो ये हजम नहीं होने वाला पहलू है।

इसमें सबसे ज्यादा हैरानी की बात ये है कि इस तरह के प्रयास इनेलो और जेजेपी पार्टी की तरफ से नहीं किये जा रहे हैं। बल्कि अपने आपको सामाजिक संगठन कहने वाली खाप पंचायतें कर रही हैं। 

क्या किन्हीं दो दलों को एक करने या महा गठबंधन के लिए किसी सामाजिक संगठन का यह प्रयास गले उतर सकता है। बिल्कुल नहीं उतर सकता। सामाजिक संगठन एक तरह की सिविल सोसायटी होती है जिसकी जिम्मेदारी राजनीतिक दलों के बीच खिचड़ी पकाने की नहीं बल्कि राजनीतिक दलों द्वारा खोद दिए गड्ढों को भरने का ज्यादा होती है। इनकी मुख्य भूमिका ये होती है कि समाज को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ समाज में भाईचारे की मिसाल पेश करें। एक आदर्श समाज की रचना में अपनी निर्णायक भूमिका अदा करें। दसूरी तरफ ये खाप राजनीतिक दलों की चमची मारने में मशगूल तो थी ही अब सीधे-सीधे राजनीतिक दलों के बिचौलिए बनकर कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं।
गौरतलब है कि पिछले साल ओपी चौटाला की गोहाना रैली में दुष्यंत चौटाला समर्थकों ने हूटिंग की थी। जिसके कारण इनेलो सुप्रीमो ओपी चौटाला ने अजय चौटाला परिवार अर्थात नैना चौटाला, दुष्यंत व दिग्विजय को पार्टी से बाहर कर दिया था। उसके बाद अजय चौटाला परिवार की तरफ से अभय चौटाला पर खूब बयानबाजी की गई। नैना चौटाला ने तो उन्हें मंच से गुंडा तक कहा था। हालांकि अभय चौटाला की तरफ से काफी हद तक संयमित बयानबाजी हुई। अजय चौटाला परिवार ने नई पार्टी जननायक जनता पार्टी का गठन किया।

बताया जा रहा है कि खाप पंचायत के प्रतिनिधियों ने चौटाला परिवार को एकजुट करने के लिये जरूरी कदम उठाया है। इनेलो नेता अभय चौटाला से उन्होंने  मुलाकात की और अभय चौटाला ने कहा कि मुझे पंचायत का हर फैसला मंजूर होगा।
महागठबंधन करने को लेकर भी पंचायत का फैसला मुझे मंजूर होगा।

ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि अभय चौटाला की तरफ से समझौते को हाँ कहने का एक मतलब ये साफ निकल रहा है कि उन्हें अपनी पार्टी की करारी हार साफ दिख रही है। दूसरी तरफ वो इस तरह अपनी एक लिबरल छवि गढ़ रहे हैं और सारा दोष अजय चैटाला परिवार पर मढ़ रहे हैं। खैर दोनों परिवार एक हों या अलग-अलग चुनाव लड़ें। ये उनका और उनकी पार्टी का मामला है। परंतु किसी सामाजिक संगठन का इसके लिए बीच में आना या यूं मुखर होकर बीजेपी का विरोध करना कतई उचित नहीं है। नीतियों का समर्थन और विरोध फिर भी समझ आता है। ऐसे में इन सामाजिक संगठनों के इस तरह के प्रयास इनकी साख को गिराने के अलावा कोई काम नहीं करेंगे।

इनेलो और जेजेपी दोनों एक होती हैं या अलग रहती हैं, इस पर कहना मुश्किल है। या किसी महा गठबंधन को ठोस रूप मिलता हुआ फिलहाल प्रतीत नहीं हो रहा। बाकी राजनीति हमेशा सम्भावनाओं से भरे होती है, इसलिए इन परिकल्पनाओं को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता।


बाकी समाचार