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नया हरियाणा

गुरूवार, 19 सितंबर 2019

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गन्नौर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

2019 के विधानसभा चुनाव के लिए देवेंद्र कादयान काफी कोशिशें कर रहे हैं.

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19 अगस्त 2019



नया हरियाणा

गन्नौर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास यूं तो 1952 से शुरू होता है. लेकिन 1967 में गन्नौर विधानसभा सीट समाप्त कर दी गई और यह क्षेत्र कैलाना विधानसभा के रूप में जाना जाने लगा. परिसीमन के बाद 2009 में गन्नौर का पुनर्जन्म हुआ. 1952 में कांग्रेस के चौधरी लहरी सिंह ने यहां से जीत हासिल की और 1957 में विजय की पुनरावृति की. वर्ष 1962 में निर्दलीय पंडित चिरंजीलाल शर्मा ने कांग्रेस के चंद्रभान छिकारा को पराजित किया.

1967 के पहले चुनाव में कैलाना (वर्तमान में गन्नौर सीट) पर कांग्रेस ने राजेंद्र सिंह मलिक को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज की. मगर 1968 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर गन्नौर निवासी प्रताप सिंह त्यागी को दे दिया. इससे नाराज राजेंद्र मलिक ने निर्दलीय चुनाव लड़ा. इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का प्रचार करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहुंची और जन सभा में प्रत्याशी को जिताने की अपील की. भारी संख्या में लोग उन्हें सुनने आए तो मगर जब चुनाव परिणाम आए तो कांग्रेस प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंदी से 1948 मतों के अंतर से चुनाव हार गए.
1972 के अगले चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र सिंह मलिक को टिकट दे दिया. इससे नाराज होकर प्रताप सिंह त्यागी ने निर्दलीय नामांकन भर दिया. मगर इस बार क्षेत्र के मतदाताओं ने प्रताप सिंह को 1040 मतों के अंतर से जीता दिया. इमरजेंसी के बाद 1977 में संपन्न चुनाव में जनता पार्टी की शांति राठी ने इस दफा विशाल हरियाणा पार्टी की ओर से चुनाव मैदान में उतरे राजेंद्र सिंह मलिक को पराजित किया. 1982 में राजेंद्र सिंह मलिक निर्दलीय मैदान में कूदे और उन्होंने लोक दल प्रत्याशी को चंदर सिंह को पराजित किया. तो कांग्रेस के जगदीप सिंह को तीसरे स्थान पर धकेल दिया. 1987 में लोक दल के वेद सिंह मलिक ने निर्दलीय राजेंद्र सिंह को पराजित किया और कांग्रेस फिर से तीसरे स्थान पर आ गई. 1991 में कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभाला और जनता पार्टी के वेद सिंह मलिक को पराजित किया. 1996 में हरियाणा विकास पार्टी के रमेश कौशिक ने समता पार्टी इनेलो के वेद मलिक को पटखनी दी. 2000 में इनेलो के वेद मलिक एक बार फिर पराजय का शिकार हो गए. इस बार कांग्रेस के जितेंद्र सिंह मलिक ने उन्हें पराजित किया. 2005 में जितेंद्र मलिक ने निर्दलीय निर्मल रानी को पराजित किया.
2009 में कैलाना पुनः गन्नौर हो गया और कांग्रेस के कुलदीप शर्मा ने इनेलो के कृष्ण पाल त्यागी को पराजित किया. 2014 में भी बाजी कुलदीप शर्मा ने ही जीती. उन्होंने इनेलो की निर्मल रानी को हराया. भाजपा के जितेंद्र सिंह मलिक इस बार तीसरे स्थान पर रहे. इस क्षेत्र से चौधरी लहरी सिंह, राजेंद्र सिंह मलिक और शांति राठी मंत्री बने तो कुलदीप शर्मा हुड्डा सरकार के दौरान विधानसभा के अध्यक्ष रहे.


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