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नया हरियाणा

गुरूवार, 19 सितंबर 2019

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अंबाला लोकसभा की 9 विधानसभा सीटों में कौन हो सकते हैं प्रत्याशी!

अंबाला लोकसभा में पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर जिले की 9 विधानसभा सीटें हैं- कालका, पंचकूला (पंचकूला जिला), अंबाला कैंट, अंबाला सिटी, मुलाना(SC), नारायणगढ़ (अंबाला जिला), यमुनानगर, सढोरा, जगाधरी (यमुनानगर जिला)

Ambala Lok Sabha has 9 assembly seats in Panchkula, Ambala and Yamunanagar districts, Kalka, Panchkula (Panchkula district), Ambala Cantt, Ambala City, Mulana (SC), Narayangarh (Ambala district), Yamunanagar, Sadhora, Jagadhri (Yamunanagar district), naya haryana, नया हरियाणा

17 अगस्त 2019



नया हरियाणा

                                               अंबाला लोकसभा
अंबाला लोकसभा में पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर जिले की 9 विधानसभा सीटें हैं- कालका, पंचकूला (पंचकूला जिला), अंबाला कैंट, अंबाला सिटी, मुलाना(SC), नारायणगढ़ (अंबाला जिला), यमुनानगर, सढोरा, जगाधरी (यमुनानगर जिला)
पंचकूला जिला- कालका, पंचकूला
कालका
हरियाणा के गठन के बाद कुछ चुनावों तक स्थानीय नेता प्रभावी रहे। लेकिन खासतौर पर 1993 उपचुनाव में चंद्र मोहन के यहां सक्रिय हो जाने के बाद यहां की लोकल लीडरशिप दबाव में आ गई। चंद्रमोहन लगातार चार बार 1993, 1996, 2000 और 2005 में यहां से विधायक बने। चंद्रमोहन अपने पिता चौधरी भजनलाल के मुख्यमंत्री काल में 1993 में पहली बार तब विधायक बने थे जब कालका से कांग्रेसी विधायक पुरुषभान का निधन हो गया था। तब तक पंचकूला जिला क्षेत्र (पहले अंबाला जिले का हिस्सा) की यह एकमात्र सीट थी। 2009 के चुनाव में जब कालका और पंचकुला अलग अलग सीटे बन गई और फिजा प्रकरण के चलते कांग्रेस ने चंद्रमोहन को टिकट नहीं दी तो एक अन्य बाहरी उम्मीदवार सतविंदर राणा यहां कांग्रेस की टिकट पर लड़े उस चुनाव में इनेलो के प्रदीप चौधरी जीते थे।
1967- लाल सिंह आजाद, 1968- किशोरी लाल कांग्रेस, 1972-किशोरी लाल कांग्रेस, 1977- लछमन सिंह जनता पार्टी, 1982- लछमन सिंह आजाद, 1987-कांति प्रकाश भल्ला लोकदल, 1991- पुरुष भान कांग्रेस, 1993-चंद्रमोहन कांग्रेस, 1996-चंद्रमोहन कांग्रेस, 2000-चंद्रमोहन कांग्रेस, 2005 चंद्रमोहन कांग्रेस, 2009 प्रदीप चौधरी इनेलो, 2014 लतिका शर्मा बीजेपी
चर्चित चेहरे-
बीजेपी- लतिका शर्मा, श्यामलाल बंसल, कुलभूषण गोयल
कांग्रेस- महावीर कौर गिल, विजय बसंल, चंद्रमोहन बिश्नोई
इनेलो- प्रदीप चौधरी
जजपा- भागसिंह दमदमा, सतिंद्र सिंह
पंचकूला
पंचकूला से 2008 के परिसीमन से स्वरूप में आई थी और इस पर अब तक 2009 और 2014 के ही विधानसभा चुनाव हुए हैं। मुख्य रूप से पंचकूला के शहरी क्षेत्रों वाली इस सीट में आसपास के 35 गांव भी हैं। 2009 में इस सीट से कांग्रेस के देवेंद्र कुमार बंसल चुनाव जीते थे जिन्होंने इनेलो की टिकट पर लड़ रहे पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह को हराया था। योगराज सिंह मशहूर क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता हैं और पंजाबी फिल्मों में भी काम करते रहे हैं। उस चुनाव में भाजपा के ज्ञानचंद गुप्ता तीसरे स्थान पर रहे थे। जो 2014 में बड़े अंतर से जीत हासिल कर विधायक बने। 2009 में हजका के शशि शर्मा ने भी यहां अच्छे वोट लिए थे।
2009- देवेंद्र बंसल कांग्रेस, 2014- ज्ञानचंद गुप्ता बीजेपी
चर्चित चेहरे
बीजेपी-ज्ञानचंद गुप्ता, दीपक शर्मा, विशाल सेठ, बंतो कटारिया, कुलभूषण गोयल, श्यामलाल बंसल, रेखा शर्मा
कांग्रेस-चंद्रमोहन बिश्नोई, उपेंद्र कौर आहलुवालिया, तरुष भंडारी, रंजिता मेहता, अंजलि बंसल, पवन जैन
जजपा-बसपा-ओपी सिहाग, दिलबाग नैन

यमुनानगर जिला- जगाधरी, यमुनानगर, सढोरा(sc)
यमुनानगर
यमुनानगर विधानसभा अपने अस्तित्व में आने के बाद से ही कांग्रेस बहुल सीट रही है. यहां हुए 13 चुनावों में से 6 बार कांग्रेस जीती है. भाजपा या जनसंघ भी 4 बार,2 बार इनेलो तथा 1 बार जनता पार्टी की जीत हुई है.
2014 के विधानसभा चुनाव का परिणाम
बीजेपी घनश्याम दास अरोड़ा-79743, इनेलो दिलबाग सिंह- 51498, बसपा अरविंद शर्मा-10367, कांग्रेस कृष्ण पंडित-9603
1967- पं. भगवतदयाल शर्मा कांग्रेस, 1968- भूपेंद्र सिंह निर्दलीय, 1972- गिरिशचंद्र जोशी कांग्रेस, 1977- डॉ. कमला वर्मा जनता पार्टी, 1982- राजेश शर्मा कांग्रेस, 1987- कमला वर्मा जनता पार्टी, 1991- राजेश शर्मा कांग्रेस, 1996- कमला वर्मा भाजपा, 2000- डॉ. जयप्रकाश शर्मा कांग्रेस, 2005- कृष्णा पंडित कांग्रेस, 2009- दिलबाग सिंह इनेलो, 2014- घनश्याम दास अरोड़ा बीजेपी
चर्चित चेहरे
बीजेपी-घनश्यामदास अरोड़ा, मदनलाल चौहान, रोजी मलिक आनंद, रामनिवास गर्ग
कांग्रेस- कृष्णा पंडित, देवेंद्र चावला, राकेश शर्मा
इनेलो- दिलबाग सिंह
जगाधरी
यमुनानगर जिले की यह सीट प्रदेश की उन चंद सीटों में से है जिन पर बहुजन समाज पार्टी की स्थिति मजबूत रहती है। पिछले 6 चुनावों (2014 समेत) में बसपा यहां या तो जीती है या दूसरे स्थान पर रही है। इस सीट पर दलित मतदाता सबसे ज्यादा संख्या में है। लेकिन हरियाणा बनने के बाद से यहां विधायक सामान्य या पिछड़े वर्ग से ही बनते आए हैं। 1996 से पहले तो इस सीट पर ब्राह्मण, बनिया या पंजाबी नेताओं का ही कब्जा था। 1996 व  2005 में यहां से सुभाष चंद्र कंबोज 2000 (1996-हविपा, 2005-कांग्रेस), 2000 में बिशन लाल सैणी (बसपा) और 2009 में अकरम खान (बसपा) विधायक बने। इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अच्छी है। इस सीट पर 2014 का विधानसभा चुनाव संतुलित स्थितियों में हुआ था। जहां विधायक बसपा का था, सरकार कांग्रेस की और लहर भाजपा की थी। 2008 परिसीमन में छछरौली विधानसभा सीट खत्म कर उसका ज्यादातर क्षेत्र जगाधरी सीट में मिल गया था। छछरौली सीट मुस्लिम और दलित बहुल सीट थी और वहां से 1977 के बाद से मुस्लिम या गुर्जर विधायक ही बनते थे। 1991 में जब से बहुजन समाज पार्टी ने हरियाणा में चुनाव लड़ने शुरू की है तब से ही पार्टी का इन दोनों सीटों पर अच्छा प्रभाव रहा है। जगाधरी सीट पर तो 1991 से 2014 तक हर चुनाव में बसपा पहले या दूसरे स्थान पर रही। बसपा से यहां 2000 में बिशनलाल सैणी और 2009 में अकरम खान विधायक बने।
1967- डी प्रकाश bjs, 1968- रामेश्वरदास कांग्रेस, 1972- ओमप्रकाश आजाद, 1977-बृजमोहन जनता पार्टी, 1985-ओमप्रकाश कांग्रेस, 1987-बृजमोहन बीजेपी, 1991- ओमप्रकाश शर्मा हविपा, 1996- सुभाषचंद हविपा, 2000- डॉ. बिशनलाल सैनी, बसपा, 2005- सुभाषचंद कांग्रेस, 2009- अकरम खान बसपा, 2014- कंवरपाल बीजेपी
चर्चित चेहरे
बीजेपी- कंवरपाल गुर्जर, रमेश्वरदास चौहान
बसपा-जेजेपी- अकरम खान
सढोरा
साढोरा यमुनानगर जिले में आने वाली ऐसी सीट है जो हरियाणा बनने के बाद से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित चली आ रही है। आरक्षित होने के बाद से इस सीट पर चमार जाति से ही विधायक बने हैं। 2009 में यहां से राजपाल भुखड़ी चुनाव जीते थे जो कुमारी सैलजा के प्रबल समर्थक थे। उससे पहले इनेलो ने यह सीट दो बार जीती थी और दोनों बार बलवंत सिंह विधायक बने थे। नेता सैलजा की मुख्यमंत्री हुड्डा से वैचारिक दूरी के चलते सढोरा क्षेत्र में विकास के काम ठीक से नहीं हो पाए। कुछ मौकों पर उन्होंने विधान सभा से इस्तीफा देने तक की बातें कहीं और सरकार पर उनका फोन टेप करवाने जैसे आरोप लगे।
1977- भागमल जनता पार्टी, 1982-भागमल बीजेपी, 1987-भागमल आजाद, 1991-शेरसिंह आजाद, 1996- रामजीलाल SAP, 2000- बलवंत सिंह इनेलो, 2005- बलवंत सिंह इनेलो, 2009- राजपाल भुखड़ी कांग्रेस, 2014-बलवंत सिंह बीजेपी
चर्चित चेहरे
बीजेपी-बलवंत सिंह, दाता राम
कांग्रेस- राजपाल भदुड़ी
इनेलो-पिंकी छप्पर
बसपा-जेजेपी--- कपूर सिंह
अंबाला जिला- अंबाला सिटी, अंबाला कैंट, नारायणगढ़, मुलाना (sc)
अंबाला कैंट
अम्बाला छावनी विधानसभा सीट पर पंजाबी वर्ग का वर्चस्व रहा है। हरियाणा बनने के बाद अंबाला कैंट सीट पर हुए 13 विधानसभा चुनाव में से 10 बार पंजाबी समुदाय से विधायक बने। दो बार सुषमा स्वराज (ब्राह्मण) और एक बार देवेंद्र बंसल (बनिया) यहां से चुनाव जीते। 5 बार अनिल विज चुनाव जीते हैं। अम्बाला छावनी मुख्यतः शहरी सीट है। शहर में जनसंघ का प्रभाव होने के कारण इस सीट पर भाजपा में इस सीट से कांग्रेस पर भारी पड़ती रही है। हालांकि कांग्रेस के अंबाला छावनी के स्थानीय पंजाबी व बनिया समुदाय के उम्मीदवारों ने भाजपा को कई बार टक्कर दी है। लेकिन पिछले दो चुनावों से नग्गल  हल्के से आए पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के लिए शहरी वोटरों को आकर्षित करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। उम्मीद लगाई जा रही है कि निर्मल सिंह छावनी में अपनी बेटी को चुनावी मैदान में उतारेंगे।
चर्चित चेहरे
बीजेपी- अनिल विज, नीता खेड़ा, पूर्व जिला अध्यक्ष व हरियाणा लोकसेवा आयोग की सदस्य, अरुण
इनेलो- ओंकार सिंह
कांग्रेस- निर्मल सिंह, चित्रा सरवारा, वेणु अग्रवाल, पूर्व निगम पार्षद परविंदर सिंह परी।
प्रमुख जातियों का वोट बैंक--एससी-बीसी 60000, पंजाबी- 25000, बनिया- 35000, सिख - 20000
राजनीतिक इतिहास
1967 डीआर आनन्द कांग्रेस, 1968 भगवान दास भाजपा, 1972 हंसराज सूरी कांग्रेस, 1977 सुषमा स्वराज जपा, 1982 रामदास धमीजा कांग्रेस, 1987 सुषमा स्वराज भाजपा, 1991 ब्रिज आनन्द कांग्रेस, 1996 अनिल विज आजाद, 2000 अनिल विज आजाद, 2005 देवेंद्र बंसल कांग्रेस, 2009 अनिल विज भाजपा, 2014 अनिल विज भाजपा
अंबाला सिटी
हरियाणा गठन के बाद अस्तित्व में अंबाला शहर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का शुरू से ही मजबूत जनाधार रहा है। हरियाणा गठन के बाद 1967 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में जनसंघ के एडवोकेट फकीर चंद ने अंबाला शहर विधानसभा चुनाव जीतकर यहां पर संघ व मौजूदा भाजपा की विचारधारा की नींव रखी। हालांकि अगले चुनाव में कांग्रेस की लेखवती जैन  यहां से चुनाव जीत गई। इसके बाद 1991, 2005 और 2009 में कांग्रेस यहां पर जीत पाई है। अंबाला शहर विधानसभा में अब तक कुल 11 चुनाव में 7 बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। कांग्रेश के विनोद शर्मा 2005 व 2009 में हाथ से लगातार दो बार जीते। लेकिन हैट्रिक भाजपा के ही नाम है। भाजपा के मास्टर शिवप्रसाद अंबाला शहर से लगातार तीन बार चुनाव जीते। इमरजेंसी के बाद तो अंबाला शहर में कांग्रेस विरोध का ऐसा नजारा था कि जनता पार्टी के प्रत्याशी मास्टर शिव प्रसाद को यहां से 76% वोट मिले थे। मास्टर शिव प्रसाद की सादगी भरी छवि का ही कमाल था कि उन्होंने एक के बाद एक अंबाला शहर से तीन बार विधानसभा चुनाव जीते। यहां तक कि हरियाणा में कांग्रेस के प्रचंड बहुमत वाले दौर में भी कोई कांग्रेसी मास्टर शिव प्रसाद को टक्कर नहीं दे पाया। 2004 तक अंबाला मूलतः शहरी सीट थी। यही वजह है कि यहां पर आर एस एस के कैडर के कारण भाजपा का जनाधार मजबूत रहा। 2008 में परिसीमन के कारण नग्गल हल्का टूटने के कारण इस हलके के अधिकतर गांव अंबाला शहर से जोड़ दिए गए।
चर्चित चेहरे
बीजेपी-असीम गोयल, डॉ. संजय, जगमोहन लाल, अनुभव अग्रवाल
कांग्रेस- हिम्मत सिंह, निर्मल सिंह, धर्मेंद्र वर्मा, जसबीर मल्लौर
विनोद शर्मा
इतिहास--1967 फकीर चन्द जनसंघ, 1972 लेखवती जैन कांग्रेस, 1977 मा. शिवप्रसाद जपा, 1982 शिवप्रसाद बीजेपी, 1987 शिवप्रसाद बीजेपी, 1991 सुमेर चन्द भट्ट कांग्रेस, 1996 फकीर चन्द अग्रवाल बीजेपी, 2000 वीना छिब्बर बीजेपी, 2005 विनोद शर्मा कांग्रेस, 2009 विनोद शर्मा कांग्रेस, 2014 असीम गोयल बीजेपी

नारायणगढ़
अंबाला लोकसभा क्षेत्र की यह इकलौती सीट है जहां जाट मतदाता अच्छा असर रखते हैं। इस सीट पर दबदबा गुज्जर नेताओं का रहा है। हालांकि बीच-बीच में राजपूत, सैणी और पंजाबी विधायक भी यहां से बने हैं। हरियाणा बनने के बाद 2014 से पहले यहां हुए 11 चुनावों में से सात बार गुज्जर विधायक बने। इस बार यहां से भाजपा के नायब सिंह सैणी चुनाव जीते। हालांकि इससे पहले कभी भाजपा उम्मीदवार यहां जीतना तो दूर दूसरे स्थान पर भी नहीं रहा था। बस 1967 में जनसंघ का उम्मीदवार दूसरे नंबर पर आया था।
1996 में विफल निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी राजनीति की शुरुआत करने वाले रामकिशन गुज्जर ने 2005 में कांग्रेस के टिकट पर जीतकर लगातार 10 साल तक यहां अपना दबदबा बनाए रखा। इससे पहले इनके पिता लाल सिंह जी यहां से चार बार 1967, 1968, 1977 और 1982 में विधायक रहे। 2009 में लगातार दूसरी जीत के बाद 2014 में भी उन्होंने कांग्रेस की टिकट हासिल की। लेकिन इस बार जीत नहीं पाए। रामकिशन को नारायणगढ़ सीट पर 33 साल बाद कांग्रेस की वापसी करवाने का श्रेय जाता है।
1967 लाल सिंह कांग्रेस, 1968 लाल सिंह कांग्रेस, 1972 जगजीत सिंह कांग्रेस, 1977 लाल सिंह जनता पार्टी, 1982 लाल सिंह निर्दलीय, 1987 जगपाल सिंह आजाद, 1991 सुरजीत कुमार बसपा, 1996 राजकुमार हविपा, 2000 पवन कुमार इनेलो, 2005 राम किशन कांग्रेस 2009 रामकिशन कांग्रेस, 2014 नायब सैनी बीजेपी
चर्चित चेहरे
बीजेपी-सुमेर सैनी, राकेश बिंदल, मनीष मित्तल, डॉ. अनुकंपा गर्ग, डॉ. संजय शर्मा, अशोक सैनी, सुमन नायब सैनी
कांग्रेस- रामकिशन गुर्जर, पवन सैनी, अशोक मेहता, सुखविंद्र नारा
इनेलो- जगमाल सिंह, तेजपाल शर्मा, सतवीर चौधरी
जजपा-रामसिंह कोडवा, हरबिलास 
मुलाना
अंबाला जिले की आरक्षित विधानसभा सीट मुलाना शुरू से ही कांग्रेस का गढ़ रही है। यहां से कांग्रेस के दिग्गज दलित नेता फूलचंद मुलाना ने 4 बार जीत दर्ज की थी। बीच-बीच में इनेलो कांग्रेस के लिए चुनौती पेश करती रही लेकिन भाजपा 1987 के बाद 2014 में ही यहां अपनी उपस्थिति दर्ज करवा पाई। 2014 में मोदी लहर में भाजपा अपना 27 साल का सूखा खत्म करने में कामयाब रही। हालांकि हरियाणा की बाकी सीटों की तरह मुलाना में भाजपा की जीत का अंतर बहुत ज्यादा तो नहीं रहा।
हल्के के चर्चित चेहरे
भाजपा- राजबीर बराड़ा, ज्ञानचंद अधोया, अरुण
कांग्रेस- वरुण चौधरी पुत्र फूलचंद मुलाना, राजकुमार बराड़ा
जजपा- रविन्द्र धीन
2014 का परिणाम--संतोष चौहान भाजपा 49970, राजबीर सिंह इनेलो 44321, वरुण चौधरी कांग्रेस 43915, करनैल सिंह बसपा 12797
मुलाना का इतिहास--1967 आर प्रसाद आरपीआई, 1968 राम प्रकाश कांग्रेस, 1972 फूलचंद कांग्रेस, 1977 शेर सिंह जनता पार्टी, 1982 फूलचंद आजाद, 1987 सूरजभान भाजपा, 1991 फूलचंद कांग्रेस, 1996 रिसाल सिंह सपा, 2000 रिसाल सिंह इनेलो, 2005 फूलचंद कांग्रेस, 2009 राजबीर बराड़ा इनेलो, 2014 सन्तोष चौहान भाजपा


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