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नया हरियाणा

शनिवार, 24 अगस्त 2019

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बेरी विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

बेरी में 4 बार लगातार और कुल 5 बार इस सीट से डॉ रघुवीर सिंह का कादियान जीतकर विधानसभा पहुंच चुके हैं,

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13 अगस्त 2019



नया हरियाणा

बेरी में 4 बार लगातार और कुल 5 बार इस सीट से डॉ रघुवीर सिंह का कादियान जीतकर विधानसभा पहुंच चुके हैं, लेकिन इस बार माहौल कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। भाजपा लगातार मजबूत हो रही है और 75 पार के नारे में कादयान की नैया भी हिल रही है। भाजपा के पूर्व में प्रत्याशी रहे विक्रम कादयान चुनाव हारने के बावजूद पिछले 5 साल से 1 दिन भी चैन से नहीं बैठे हैं और हल्के में सीधे मतदाताओं तक दस्तक दे रहे हैं। वहीं मनोहर लाल खट्टर की छवि और कमजोर विपक्ष हल्के में कमल खिलाने की आहट दे रहा है।

डॉ कादयान कुल पांच बार विधायक बने चुके हैं लेकिन अबकी बार उनके बिल्कुल करीबी रहे कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन अजय अहलावत ने कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की ताल ठोक दी है। जिसने डॉ कादयान की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। हालांकि पूरे देश में मोदी लहर है। लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद यह स्पष्ट भी हो गया था लेकिन अब जम्मू और कश्मीर से धारा 370 और 35a हटाए जाने के बाद के माहौल का असर भी विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा। बेरी सीट से पहली बार 1967 में प्रताप सिंह दौलता कांग्रेस से जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। इसके बाद 1968 में कांग्रेस से रण सिंह ने चुनाव जीता। 1972 में प्रताप सिंह दौलता ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा पहुंचे। 1977 में रण सिंह ने जेएनपी के बैनर तले चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

1980 में हुए उपचुनाव में अजित सिंह कादयान जेएनपी (एसएल)  ने चुनाव जीता। 1982 में ओमप्रकाश बेरी ने लोकदल पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1987 में डॉ रघुवीर सिंह कादियान ने लोकदल से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1991 में एक बार फिर ओमप्रकाश बेरी ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा पहुंचे। 1996 में वीरेंद्र पाल ने एसपी के बैनर तले चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। उसके बाद वर्ष 2005 से 2014 तक कांग्रेस पार्टी से लगातार चार बार चुनाव जीते। 2019 के चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और देखने वाली बात ये होगी कि ये गढ़ बचेगा या खिसकेगा।

चर्चित चेहरे
बीजेपी- विक्रम कादियान, प्रदीप अहलावत, शिव कुमार रंगीला
कांग्रेस- रघुवीर कादियान, अजय अहलावत
जजपा- उपेंद्र कादियान
इनेलो- प्रमोद राठी

2019 में क्या होने वाला है?

डॉ कादयान के लिए छठी बार इस सीट से जीतना बिल्कुल आसान नहीं होगा क्योंकि वर्तमान समय में कांग्रेस बिखरी हुई है और पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा कांग्रेस के भीतर लगातार कमजोर पड़ रहे हैं। जिसके कारण कादयान की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। दूसरी तरफ बीजेपी इस बार ज्यादा उत्साह से मैदान में उतरने वाली है और उसके सभी नेता मतदाताओं तक पहुंचकर पार्टी को मजबूत कर रहे हैं ऐसे में 2019 के चुनाव में बेरी में भी रोमांचक चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा और प्रदेश भर की नजरें इस सीट पर रहेंगी।

राजनीतिक इतिहास

1967 प्रताप सिंह दौलता कांग्रेस
1968 रण सिंह कांग्रेस
1972 प्रताप सिंह दौलता आजाद
1977 रण सिंह जनता पार्टी
1980 अजीत सिंह जनता पार्टी
1982 ओमप्रकाश बेरी लोकदल
1987 रघुवीर कादयान लोकदल
1991 ओमप्रकाश बेरी कांग्रेस
1996 वीरेंद्र पाल समता
2000 रघुवीर कादयान कांग्रेस
2005 रघुबीर कादयान कांग्रेस
2009 रघुबीर कादयान कांग्रेस
2014 रघुबीर कादयान कांग्रेस


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