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नया हरियाणा

रविवार, 7 जून 2020

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उकलाना विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

कुमारी शैलजा का पृतक गांव भी इसी हलके में है.

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9 अगस्त 2019



नया हरियाणा

उकलाना विधानसभा 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया। यह सीट आरक्षित है। इसे इनेलो का गढ़ माना जाता रहा है। उकलाना सुरक्षित सीट पर दो बार विधानसभा चुनाव हुए। जिसमें एक बार कांग्रेस तथा एक बार इनेलो ने जीत दर्ज की है। यहां से पहली बार कांग्रेस से नरेश सेलवाल विधायक बने थे और वर्तमान में अनूप धानक इनेलो से विधायक चुने गए। जिन्होंने बाद में नई पार्टी जेजेपी को ज्वाइन कर लिया। इनेलो के चार बागी विधायकों ने दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में नई पार्टी जे जे पी के साथ जाना पसंद किया।

उकलाना आरक्षित विधानसभा क्षेत्र के गठन के दौरान बरवाला विधानसभा क्षेत्र के 30 गांव, पुराने घिराए विधानसभा क्षेत्र के 7 गांव, बट्टू हलके के 12 गांव, टोहाना तथा उचाना के दो-दो गांवों को शामिल किया गया। बरवाला टोहाना तथा उचाना हल्के आज भी अस्तित्व में है, जबकि भट्टू तथा घिराय  हलका अब अस्तित्व में नहीं है।

उकलाना विधानसभा क्षेत्र को इनेलो के गढ़ के रूप में जाना जाता है। परिसीमन के बाद जिन क्षेत्रों को जोड़कर उकलाना हल्के का गठन किया गया था। उनमें इनेलो की तूती बोलती थी। साल 2009 के चुनाव में लग रहा था कि इनेलो प्रत्याशी सीमा गैबीपुर कांग्रेस प्रत्याशी नरेश सेलवाल को आसानी से हराकर जीत जाएंगी। लेकिन जब चुनावी नतीजा आए तो सब चौक गए। जिले के सातों विधानसभा सीटों में से उकलाना से कांग्रेस प्रत्याशी नरेश सेलवाल ने सबसे कम वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर हल्के का पहला ताज अपने नाम किया। साल 2014 में नरेश सेलवाल ताज को बरकरार नहीं रख पाए और इनेलो प्रत्याशी अनूप धानक ने शानदार जीत दर्ज की।

उकलाना हल्का राजनीतिक रूप से जरूर नया है। लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से हल्के में पड़ने वाला अग्रोहा विश्व के मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए हैं। अग्रोहा किसी समय महाराज अग्रसेन के राज्य की राजधानी थी। यह नगर अत्यंत सुख समृद्धि और संपन्न था। लेकिन कालांतर में यह विदेशी आक्रमणों से नष्ट हो गया। परंतु आज अग्रोहा धाम एक धार्मिक व दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। अग्रवाल समाज अग्रोहा को अपना पांचवा धाम मानता है। अग्रोहा हिसार से फतेहाबाद जाने वाली सड़क पर है। हिसार से इसकी दूरी करीब 14 मील है। ठीक अग्रोहा धाम के बगल में ही कहीं टीले दिखाई पड़ेंगे। इन टीलों के बीच सबसे ऊंचे टीले की ऊंचाई 87 फुट है। जब यहां खुदाई हुई तब एक विध्वंस किए गए नगर के अवशेष मिलते हैं। इतिहासकार मानते हैं कि महाराजा अग्रसेन की राजधानी अग्रोहा यही हुआ करती थी। बताते हैं कि यहां की समृद्धि के कारण कई बार इस नगर पर विदेशी आक्रमण हुए। सबसे बड़ा आक्रमण सन 1194 में मोहम्मद गोरी ने किया। उसने पूरे अग्रोहा को तहस-नहस कर दिया। कहते हैं कि नगर के विध्वंस के समय अग्रोहा का वैश्य समाज देश के कोने कोने में चला गया। जहां उन्होंने अपनी सत्य निष्ठा और मेहनत के बल पर नई ऊंचाई हासिल की। अग्रोहा का इतिहास करीब 5000 साल पुराना बताया जाता है। महाभारत के युद्ध के बाद महाराजा अग्रसेन ने माता महालक्ष्मी की कृपा से आग्रेय साम्राज्य की स्थापना की। इस राज्य की राजधानी अग्रोहा हुआ करती थी। उकलाना हलके के गांव बनभौरी में माता भ्रामरी देवी मंदिर भी देशभर के लोगों की आस्था का प्रतीक है। इसके अलावा पावड़ा का चबूतरा, बिठमड़ा खाप भी हरियाणा में अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए।

मनोहर सरकार में क्या हुआ

मनोहर लाल ने करीब 500 करोड़ रु की लागत से कार्य करवाये हैं। उकलाना सरकारी कॉलेज, आईटीआई, सुरेवाला चौक के फोरलेन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

2019 में क्या होने वाला है?

उकलाना हलके के अस्तित्व में आने के बाद अभी तक दो बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। लेकिन भाजपा यहां से जीत का स्वाद नहीं चख पाई है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2014 से ठीक पहले  इनेलो छोड़कर कमल थामने वाली सीमा गैबीपुर को प्रत्याशी बनाया था और वह दूसरे नंबर पर रही थी। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों की बात करें तो यहां इनेलो की टिकट से विधायक बने अनूप धानक पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी के साथ लगे हुए हैं। लोकसभा चुनाव में हल्के से मिली रिकॉर्ड तोड़ जीत के बाद भाजपाई पूरे जोश में है। मनोहर सरकार में हल्के में हुए करोड़ों के विकास कार्यों के कारण भी हवा का रुख भाजपा की तरफ है। इनेलो के बिखरने का भी लाभ भाजपा को मिलता दिख रहा है।

हलके का सबसे चर्चित गांव

उकलाना हल्के में पड़ने वाले गांव प्रभुवाला की राजनीति में अपनी विशेष पहचान है। प्रभुवाला में जन्मे स्वर्गीय चौधरी दलबीर सिंह चार बार लोकसभा सांसद रहे और केंद्रीय मंत्री भी बने। उनके चचेरे भाई स्वर्गीय नेकीराम दो बार राज्यसभा से सांसद तथा एक बार रतिया सुरक्षित सीट से विधायक निर्वाचित हुए। चौधरी दलबीर सिंह की बेटी कुमारी शैलजा भी चार बार लोकसभा सांसद व एक बार राज्यसभा सांसद रही हैं। वे केंद्र में मंत्री पद का दायित्व संभाल चुकी हैं। प्रभुवाला के ही स्वर्गीय रेलू राम पूनिया जोकि बरवाला हल्के से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं।

चर्चित चेहरे

बीजेपी- आशा रानी खदेड़, सीमा गैबीपुर
इनेलो- ललिता टाक
जजपा- अनूप धानक, जोगेंद्र सेलवाल
कांग्रेस- कुसुम सेलवाल, नरेश सेलवाल

इतिहास

2009 नरेश सेलवाल कांग्रेस
2014 अनूप धानक इनेलो

2019 विधानसभा का परिणाम

Haryana-Uklana (SC)
Result Status
O.S.N. Candidate Party EVM Votes Postal Votes Total Votes % of Votes
1 Asha Khedar Bharatiya Janata Party 41522 154 41676 29.87
2 Bala Devi Indian National Congress 11526 47 11573 8.29
3 Ch. Bhajan Lal Bahujan Samaj Party 4193 13 4206 3.01
4 Lalita Taank Indian National Lok Dal 1871 2 1873 1.34
5 Anoop Dhanak Jannayak Janta Party 65230 139 65369 46.84
6 Naveen Surewala Swaraj India 517 0 517 0.37
7 Manjit Ranga Aam Aadmi Party 1132 0 1132 0.81
8 Mukesh Duggal Aadarsh Bharat Nirman Dal 107 0 107 0.08
9 Ramphal Bithmara Sarva Hit Party 652 2 654 0.47
10 Balmiki Rohtash Chhan Bhartiya Kisan Party 100 1 101 0.07
11 Sandeep Loktanter Suraksha Party 285 0 285 0.2
12 Ishwar Chander Independent 468 0 468 0.34
13 Naresh Selwal Independent 10299 54 10353 7.42
14 Bharti Uklana Independent 244 0 244 0.17
15 Bhai Sandip Kanoh Independent 297 0 297 0.21
16 NOTA None of the Above 689 1 690 0.49
  Total   139132 413 139545  
 

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