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नया हरियाणा

शनिवार, 24 अगस्त 2019

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पुंडरी विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

कैथल जिले का पुंडरी विधानसभा क्षेत्र रोड बिरादरी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण 'रोडों की राजधानी' भी कहलाता है.

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9 अगस्त 2019



नया हरियाणा

कैथल जिले का पुंडरी विधानसभा क्षेत्र रोड बिरादरी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण 'रोडों की राजधानी' भी कहलाता है. 1952 से अस्तित्व में रहे इस हलके से सबसे पहले कांग्रेस के गोपीचंद विधायक चुने गए थे. 1957 में भाग सिंह और 1962 में कवंर रामपाल सिंह विधायक निर्वाचित हुए. 1967 में कांग्रेस के कवंर रामपाल सिंह निर्दलीय प्रत्याशी को पराजित कर विधायक बने. 1968 में निर्दलीय ईश्वर सिंह ने कांग्रेस के तारा सिंह को पराजित किया. 1972 में ईश्वर सिंह कांग्रेस के प्रत्याशी थे और उन्होंने संगठन कांग्रेस के नरचरण सिंह को हराया था. 1977 में स्वामी अग्निवेश जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुने गए. उन्होंने कांग्रेस के अंतराम को हराया. 1982 में ईश्वर सिंह (कांग्रेस), जनता पार्टी के भाग सिंह को हराकर तीसरी बार विधायक बने. 1987 में लोकदल के माखन सिंह ने कांग्रेस के ईश्वर सिंह को पराजित किया. 1991 में ईश्वर सिंह (कांग्रेस) ने माखन सिंह (जनता पार्टी) को शिकस्त देकर एक बार फिर से कांग्रेस का परचम फहराया. 1996 में निर्दलीय नरेंद्र शर्मा ने ईश्वर सिंह (कांग्रेस) को पराजित किया. 2000 में स्वर्गीय ईश्वर सिंह के बेटे तेजवीर सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय नरेंद्र शर्मा को मात दी. इस चुनाव में तीसरे व चौथे स्थान पर भी निर्दलीय प्रत्याशी ही रहे. भाजपा पांचवे और कांग्रेस छठे स्थान पर रही.
2005 में निर्दलीय दिनेश कौशिक ने इनेलो के नरेंद्र शर्मा को पराजित किया. कांग्रेस के भाग सिंह तीसरे व भाजपा के रणधीर गोलन चौथे स्थान पर रहे. 2009 में निर्दलीय सुलतान सिंह जड़ोला ने कांग्रेस के दिनेश कौशिक को पराजित किया. इनेलो के सज्जन सिंह व बसपा के नरेंद्र शर्मा क्रमश: तीसरे व चौथे स्थान पर रहे. 2014 में दिनेश कौशिक फिर से निर्दलीय लड़ा और विजयी रहा. उन्होंने भाजपा के रणधीर गोलन को पराजित किया. तेजवीर सिंह इस बार इनेलो प्रत्याशी थे. लेकिन वे तीसरे स्थान पर रहे. चौथे स्थान पर निर्दलीय नरेंद्र शर्मा थे. पांचवा और छठा स्थान भी निर्दलीय उम्मीदवारों को ही मिला. कांग्रेस सातवें पायदान पर खिसक गई. 

पूंडरी के मतदाता दलीय प्रत्याशी के मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशी को किस कदर पसंद करते हैं इसका अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 1996 से लेकर अभी तक पूंडरी से सभी विधायक निर्दलीय ही बने हैं. पूंडरी के लिए यह भी गौरव की बात है कि 1991 में यहां से चुने गए विधायक ईश्वर सिंह 1991 से 1996 तक विधानसभा अध्यक्ष रहे.
 


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