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नया हरियाणा

शनिवार, 24 अगस्त 2019

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कैथल विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

1952 से मौजूद कैथल विधानसभा क्षेत्र से दौलतराम पहले विधायक चुने गए थे.

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9 अगस्त 2019



नया हरियाणा

2014 के विधानसभा में इनेलो की टिकट पर दूसरे नंबर पर रहने वाले कैलाश भगत बीजेपी में शामिल हो गए हैं. जिसके कारण बीजेपी कैथल में काफी मजबूत स्थिति में आ गई है. 2018 में रणदीप सुरजेवाला जींद उपचुनाव में उतरे थे और करारी हार का सामना करना पड़ा था. उनकी जमानत मुश्किल से बची थी और जींद विधानसभा के किसी भी बूथ पर जीत नहीं पाए थे. ऐसे में इस बार कैथल विधानसभा का चुनाव रणदीप सुरजेवाला के लिए काफी चुनौतियों भरा रहना वाला है और बीजेपी के द्वारा 370 खत्म करने के बाद तो मुश्किलें ओर बढ़ गई हैं. कांग्रेस आपसी भीतरघात से भी नहीं उभर पा रही है. प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर और पूर्व सीएम हुड्डा के बीच संघर्ष लगातार जारी है. जिसमें रणदीप सुरजेवाला का मौन समर्थन अशोक तंवर को मिला हुआ है.

1952 से मौजूद कैथल विधानसभा क्षेत्र से दौलतराम पहले विधायक चुने गए थे. इसके बाद ओम प्रभा जैन के रूप में कैथल में एक ऐसी महिला नेत्री का उदय हुआ जिसमें न केवल यहां से लगातार चार चुनाव जीते, बल्कि एक ही समय में वे हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार भी रहीं. ओम प्रभा पहली बार 1957 में जनसंघ प्रत्याशी को पराजित कर विधायक चुनी गई. 1962 में उन्होंने जनसंघ के बारूराम को पराजित किया. 1967 में वे स्वतंत्रत पार्टी के उम्मीदवार को परास्त कर विधायक बनीं.1968 के मध्यावधि चुनाव में ओम प्रभा जैन ने जनसंघ प्रत्याशी को भारी मतों से हराया. 15 साल लगातार विधायक रहने के बाद वे 1972 में निर्दलीय प्रत्याशी चरणदास शोरेवाला से चुनाव हार गई. 1977 में ओम प्रभा ने अपने जीवन का अंतिम चुनाव लड़ा और जनता पार्टी प्रत्याशी रघुनाथ गोयल से पराजित हो गई. चुनाव के कुछ महीनों बाद ही एक कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया. 1982 में निर्दलीय रोशन लाल तिवारी ने कांग्रेस के देवेंद्र शर्मा को पराजित किया. 1987 की चुनावी जंग सुरेंद्र कुमार मदान और चरणदास शोरेवाला के बीच हुई. जिसमें मदान की जीत हुई. 1991 में भी सुरेंद्र मदान ने शोरेवाला को शिकस्त दी. 1996 में एक बार फिर शोरेवाला की किस्मत ने उनका साथ दिया और वे हविपा के रोशन लाल तिवारी को हराकर विधायक बन गए.  2000 में इनेलो के लीला राम ने निर्दलीय धर्मपाल को पराजित कर जीत दर्ज की. कांग्रेस के सुरेंद्र मदान तीसरे स्थान पर रहे.
2005 में कैथल में सुरजेवाला परिवार का आगमन हुआ और तब से अभी तक हुए तीनों चुनावों में सुरजेवाला ही विजयी हुए हैं. 2005 में शमशेर सिंह सुरजेवाला ने इनेलो के कैलाश भगत को हराया. 2009 व 2014 के चुनाव में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यहां से जीत दर्ज की और दोनों बार निकटतम प्रतिद्वंदी रहे इनेलो के कैलाश भगत को हराया.

विधानसभा का इतिहास 

रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस 65524
कैलाश भगत इनेलो 41849
सुरिंद्र सिंह  बीजेपी 38171
निर्मला जांगड़ा बसपा 2722


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