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नया हरियाणा

बुधवार, 16 अक्टूबर 2019

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थानेसर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

2019 के लोकसभा चुनाव में नायब सैनी ने जीत दर्ज की थी.

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9 अगस्त 2019



नया हरियाणा

हरियाणा की कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट (Kurukshetra Lok Sabha Election Results 2019) पर 2014 के चुनाव में BJP के राज कुमार ने जीत दर्ज की थी. उन्हें 4,18,112 वोट मिले. वहीं INLD के बलबीर सिह 2,88,376 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नायब सैनी बहुत बड़े अंतर से विजयी हुए.
सन् 1977 में यह सीट BLD के रघबीर सिंह के हाथ में थी. 1980 में JNP (S) के मनोहर लाल, 1984 में कांग्रेस के हरपाल सिंह, 1989 में JD के गुरदयाल सिंह, 1991 में कांग्रेस के तारा सिंह, 1996 में विश्व हिंदू परिषद के ओम प्रकाश, 1998 में HLD (R) की कैलाशो देवी ने जीत दर्ज की थी, वहीं 1999 में INLD की कैलाशो देवी, 2004 व 2009 में कांग्रेस के नवीन जिंदल इस सीट पर विजयी रहे थे.

कुरुक्षेत्र लोकसभा के अंतर्गत यह 9 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें रादौर, लाडवा, शाहबाद, थानेसर, पेहवा, गुहला, कलायत, कैथल व पुंदरी शामिल हैं.


कुरुक्षेत्र का धार्मिक इतिहास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुरुक्षेत्र में ही महाभारत की लड़ाई हुई थी और भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश यहीं के ज्योतिसर नामक स्थान पर दिया था. यहां स्थित विशाल तालाब का निर्माण महाकाव्य महाभारत में वर्णित कौरवों और पांडवों के पूर्वज राजा कुरु ने करवाया था. कुरुक्षेत्र नाम 'कुरु के क्षेत्र' का प्रतीक है. कुरुक्षेत्र का ऋग्वेद और यजुर्वेद में अनेक स्थानों पर वर्णन किया गया है, यहां की पौराणिक नदी सरस्वती का भी खास है.

थानेसर विधानसभा

कांग्रेस प्रत्याशी व स्वतंत्रता सेनानी बनारसी दास गुप्ता ने 1952 के पहले चुनाव में यहां से जीत दर्ज की. उन्होंने निर्दलीय काशीराम को पराजित किया. सोशलिस्ट पार्टी का उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा. लेकिन चौथे स्थान पर जो नेता रहा उसका नाम निश्चित ही चौकाने वाला है. यह नेता थे पंजाब के पहले मुख्यमंत्री और कदावर स्वतंत्रता सेनानी डॉ. गोपीचंद भार्गव. डॉ भार्गव को मात्र 1240 वोट मिले. असल में भार्गव कांग्रेस से अलग हो गए थे और पहली बार उन्होंने हरियाणवी क्षेत्र में कोई राजनीतिक सक्रियता दिखाई थी.
1957 और 1962 के चुनाव में भी बनारसीदासगुप्ता ने विजय हासिल की. गुप्ता संयुक्त पंजाब में मंत्री भी रहे है. बनारसीदास गुप्ता की हैट्रिक के बाद कांग्रेस के ही ओमप्रकाश गर्ग ने तीन चुनाव लगातार जीते. 1967, 1968 और 1972 तीनों बार उन्होंने जनसंघ प्रत्याशी को पराजित किया. लेकिन 1977 में गर्ग जनता पार्टी के देवेंद्र शर्मा से हार गए. 1982 में भी गर्ग को हार का सामना करना पड़ा और लोकदल के साहब सिंह सैनी यहां से जीते. 1987 में लोकदल ने गुरदयाल सिंह को उम्मीदवार बनाया और उनका मुकाबला कांग्रेसी हो चुके साहब सिंह सैनी से हुआ. साहब सिंह चुनाव हार गए. 1991 में कांग्रेस के डॉ रामप्रकाश ने जनता पार्टी प्रत्याशी अशोक अरोड़ा को परास्त किया. हविपा से लड़े साहिब सिंह सैनी तीसरे स्थान पर रहे.
1996 के चुनाव में लोकदल के अशोक अरोड़ा ने निर्दलीय रमेश कुमार गुप्ता को पराजित किया. 2000 में भी अशोक अरोड़ा ही विजयी हुए. इस बार उन्होंने कांग्रेस की शशि सैनी को हराया. 2005 में कांग्रेस से लड़े रमेश गुप्ता ने अशोक अरोड़ा को मात दी. भाजपा के गुरुदयाल सिंह सैनी तीसरे स्थान पर रहे. 2009 में अशोक अरोड़ा ने कांग्रेस के रमेश गुप्ता को मात देकर फिर से यहां इनेलो का झंडा गाड़ दिया. निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष सुधा का प्रदर्शन भी प्रभावी रहा. उन्होंने लगभग 16 हजार वोट हासिल किए. 2014 में सुभाष सुधा भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लड़े और इनेलो के अशोक अरोड़ा को 25 हजार वोटों से हराने में सफल रहे. कांग्रेस उम्मीदवार पवन गर्ग तीसरे स्थान पर रहे.

2014 विधानसभा का परिणाम

सुभाष सुधा बीजेपी 68080
अशोक अरोड़ा इनेलो 42442
पवन गर्ग कांग्रेस 13769
राजेश शर्मा हजकां 1017


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