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नया हरियाणा

सोमवार , 26 अक्टूबर 2020

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रेवाड़ी विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

कैप्टन अजय यादव ने लगातार छह चुनाव जीतकर अपना इतिहास रच दिया.

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6 अगस्त 2019



नया हरियाणा

अहीरों का लंदन कही जाने वाली रेवाड़ी का जब से से से रेवाड़ी का जब से से जाने वाली रेवाड़ी का जब से से से रेवाड़ी का जब से से से लोकतंत्र से साक्षात्कार हुआ है तब से यहां अहीर विधायक ही हुए हैं. यदि 1991 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी विजय सोमाणी की किस्मत थोड़ी सी जोर पकड़ती तो इस लंदन का इतिहास बदल गया होता. इस चुनाव में विजय सोमाणी अजय यादव से तकरीबन 4900 वोटों से पिछड़ गए. यादव बहुल क्षेत्र में किसी बनिया को मिला यह जनसमर्थन कोई साधारण बात नहीं थी.
1952 के पहले चुनाव में कैप्टन अजय यादव के पिता राव अभय सिंह ने जमींदार पार्टी के वीरेंद्र सिंह को पराजित कर एक नए सियासी कुनबे की नींव डालने का काम किया. अभय सिंह ने जिन वीरेंद्र सिंह को हराया था वह कोई साधारण नेता नहीं थे. बल्कि यादव समुदाय में देव तुल्य माने जाने वाले क्रांतिकारी राव तुलाराम के वंशज थे और इस हार के 15 साल बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री हुए. क्योंकि 1952 में रेवाड़ी डबल सीट थी इसीलिए दूसरे विधायक चुन्नीलाल चुने गए थे.
अगले 4 चुनाव राव वीरेंद्र सिंह की बहन सुमित्रा ने जीते. 1957 में सुमित्रा ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा और निर्विरोध ही विधायक निर्वाचित हो गई. 1962 में भी वे कांग्रेस प्रत्याशी थी और उन्होंने निर्दलीय हुकुम सिंह को पराजित किया. 1967 में उन्होंने राव अभय सिंह को शिकस्त दी. 1968 में सुमित्रा अपने भाई बिरेंद्र सिंह की विशाल हरियाणा पार्टी से लड़ी और कांग्रेस के बाबू दयाल शर्मा को करारी मात दी. इस चुनाव में राव अभय सिंह प्रत्याशी थे और वे तीसरे स्थान पर रहे. 1972 में अभय सिंह ने विशाल हरियाणा पार्टी के उम्मीदवार व राव वीरेंद्र सिंह के भाई श्योराज सिंह को पराजित किया. 1977 में जनता पार्टी के कर्नल राव राम सिंह यहां से विशाल हरियाणा पार्टी के शिव रतन सिंह को पराजित कर विधायक बने. 1982 में भी कर्नल का सीट पर दबदबा बना रहा. इस बार वे निर्दलीय प्रत्याशी थे और उन्होंने कांग्रेस की सुमित्रा देवी को मात दी.
1987 में रेवाड़ी से युवा नेता रघु यादव विधायक चुने गए. रघु से पहले जो भी यादव विधायक चुने गए, उन सभी के नाम के आगे राव लिखा होता था. रघु पहले यादव विधायक थे. बागी तेवर और धारदार राजनीति के लिए चर्चित रघु ने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया. उपचुनाव हुआ तो अजय यादव विधायक चुने गए और उसके बाद रेवाड़ी कैप्टन अजय यादव की हो गई. उन्होंने लगातार छह चुनाव जीतकर अपना इतिहास रच दिया. 1991 में उन्होंने हविपा के राजेंद्र सिंह, 1996 में रणधीर कापडीवास, 2000 में विजय सोमानी, 2005 में फिर से रणधीर कापडीवास और 2009 में सतीश खोला को पराजित किया. 25 साल लगातार विधायक रहने के बाद 2014 में अजय यादव को अपने जीवन में पहली चुनावी पराजय का सामना करना पड़ा. उन्हें भाजपा के रणधीर कापड़ीवास ने मात दी.


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