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नया हरियाणा

सोमवार , 26 अक्टूबर 2020

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मुलाना विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

मुलाना विधानसभा अंबाला जिले में आती है और यह आरक्षित सीट है.

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31 जुलाई 2019



नया हरियाणा

अंबाला जिले की आरक्षित विधानसभा सीट मुलाना शुरू से ही कांग्रेस का गढ़ रही है। यहां से कांग्रेस के दिग्गज दलित नेता फूलचंद मुलाना ने 4 बार जीत दर्ज की थी। बीच-बीच में इनेलो कांग्रेस के लिए चुनौती पेश करती रही लेकिन भाजपा 1987 के बाद 2014 में ही यहां अपनी उपस्थिति दर्ज करवा पाई। 2014 में मोदी लहर में भाजपा अपना 27 साल का सूखा खत्म करने में कामयाब रही। हालांकि हरियाणा की बाकी सीटों की तरह मुलाना में भाजपा की जीत का अंतर बहुत ज्यादा तो नहीं रहा।
मुलाना सीट पर फूलचंद मुलाना एक मात्र ऐसे राजनेता रहे हैं जिन्होंने अपनी सभी जीत 10,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हासिल की। शेष कोई राजनेता इतनी वोट नहीं पा सका। 2014 के चुनाव के बाद मुलाना विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक गणित काफी बदल गया है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव इनेलो का टूटना रहा। इनेलो से दो बार विधायक व चौटाला सरकार में मंत्री रहे रिसाल सिंह के बेटे तथा 2009 में इनेलो के विधायक रहे राजवीर सिंह बराड़ा इनेलो की फूट के बाद भाजपा में शामिल हो गए। इनके भाजपा में आने के बाद हल्के में इनेलो के पास कोई विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनने लायक नेता भी नहीं बचा। राजबीर के अलावा जो लोग इनेलो में थे वह जजपा में चले गए।
ऐसे में इस बार मुलाना विधानसभा हलके में कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधी टक्कर होगी। राजवीर के आने से इस टक्कर में भाजपा एक बार फिर कांग्रेस पर भारी पड़ती दिख रही है। वरना मुलाना में कांग्रेस व इनेलो के बीच मुख्य मुकाबला होता था। विधानसभा क्षेत्र में दलित मतदाताओं की एक बड़ी संख्या होने के कारण इलाके में बसपा का भी ठीक-ठाक जनाधार है। हालांकि बसपा ने कभी मुलाना हल्के में जीत दर्ज नहीं की। लेकिन बसपा प्रत्याशी दूसरी पार्टियों का गणित अक्सर बिगाड़ देती है। कांग्रेस में भी इस बार राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत हैं। चार बार के विधायक फूलचंद मुलाना ने पिछले विधानसभा चुनाव में अपने बेटे वरुण चौधरी को अपनी राजनीतिक विरासत सौंप दी थी। लेकिन वरुण अपने पिता की तरह करिश्मा नहीं दिखा पाए व 2014 के विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे। भाजपा के पिछले 5 साल के शासन काल में बराड़ा में विकास के मामले में कई नए आयाम देखे हैं। खासकर विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले सबसे बड़े गांव बराड़ा को नगर पालिका का दर्जा मिल गया है।

हल्के में विधायक को लेकर असन्तोष जरूर है परंतु बीजेपी की कार्यशैली को लेकर किसी प्रकार की नाराजगी नहीं दिखती। जबकि हलके की विधायक सन्तोष चौहान सारवान का कहना है कि उन्होंने लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास किया है। जिन उम्मीदों के साथ लोगों ने उन्हें चुना था उनमें से काफी उम्मीदों को उन्होंने पूरा किया है। खासकर बराड़ा को शहर का दर्जा दिलाना उनकी प्राथमिकता थी। नगर पालिका गठन के साथ ही बराड़ा की सूरत बदलनी शुरू हो गई है। बराड़ा के अस्पताल का नवीनीकरण किया जा रहा है।
हल्के के चर्चित चेहरे
भाजपा- राजबीर बराड़ा, ज्ञानचंद अधोया, अरुण
कांग्रेस- वरुण चौधरी पुत्र फूलचंद मुलाना, राजकुमार बराड़ा
जजपा- रविन्द्र धीन


2014 का परिणाम


संतोष चौहान भाजपा 49970
राजबीर सिंह इनेलो 44321
वरुण चौधरी कांग्रेस 43915
करनैल सिंह बसपा 12797


मुलाना का इतिहास


1967 आर प्रसाद आरपीआई
1968 राम प्रकाश कांग्रेस
1972 फूलचंद कांग्रेस
1977 शेर सिंह जनता पार्टी
1982 फूलचंद आजाद
1987 सूरजभान भाजपा
1991 फूलचंद कांग्रेस
1996 रिसाल सिंह सपा
2000 रिसाल सिंह इनेलो
2005 फूलचंद कांग्रेस
2009 राजबीर बराड़ा इनेलो
2014 सन्तोष चौहान भाजपा


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