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नया हरियाणा

शनिवार, 5 दिसंबर 2020

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लोहारू विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

लोहारू विधानसभा में वर्ष 1967 से लेकर 2014 तक भाजपा का कमल नहीं खेल पाया है।

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30 जुलाई 2019



नया हरियाणा

लोहारू विधानसभा में वर्ष 1967 से लेकर 2014 तक भाजपा का कमल नहीं खेल पाया है। हालांकि दो बार प्रयास किए गए लेकिन थोड़े से अंतराल से भाजपा का कमल खिलने से दूर रह गया। 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने लोहारू में कमल खिलाने के मकसद से पूरी ताकत झोंक दी है। पिछली बार हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी थोड़े से ही वोटों के अंतर से इनेलो प्रत्याशी से हारे थे। अब भाजपा के समक्ष उसी गैप को दूर करके हार को जीत में बदलने की तीस है। अब इस अभियान को लक्ष्य तक पहुंचा पाती है या नहीं यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन भाजपा ने विकास के कार्य, मेरिट के आधार पर नौकरियां, नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने का वादा पूरा कर दिया। जिससे जनता उत्साहित है। दूसरी तरफ भाजपा पुराने उम्मीदवार पर ही भरोसा करती है या फिर नए चेहरे पर विश्वास करके लोहारू के जनप्रतिनिधि को विधानसभा तक ले जाने में सफल हो पाती है या नहीं। फिलहाल भाजपा के आगे लोहारू में यह सबसे बड़ी चुनौती है।

 

इस सीट पर हमेशा जाट ही विधायक बने हैं। वरिष्ठ नेता सोमवीर सिंह चौधरी बंसीलाल के दामाद हैं।

 

लोहारू विधानसभा की जनता का मिजाज भांपना  कोई आसान काम नहीं है। यहां की जनता कभी हवा के साथ तो कभी हवा के विपरीत समर्थन देती रही है। इतना जरूर है कि यहां की जनता उम्मीदवार की छवि भी जरूर देखती है। जो ज्यादा मिलनसार होता है उसे ही विधायक चुनती है। वह चाहे सत्तारूढ़ पार्टी का हो या फिर किसी अन्य विपक्षी दल का प्रत्याशी हो। 1952 से लेकर अब तक हुए चुनाव का तो यही इतिहास रहा है। हालांकि हीरानंद आर्य ने अलग-अलग पार्टियों का दामन थामकर यहां से चार बार चुनाव जीता है। वही चंद्रावती ने भी दो पार्टियों से तीन चुनाव लड़कर अपनी हैट्रिक बनाई है। दोनों नेता लोहारू की जनता की नजरों में बेहद निहायत शरीफ रहे हैं। कांग्रेस व हविपा से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार सोमबीर को भी चुनाव में शराफत का ही इनाम मिला है।

बहादुर सिंह धर्मपाल व ओमप्रकाश वर्दी शरीफ उम्मीदवार के रूप में उभरे हैं। इनमें से एकाध बार ही लोहारू हलके की जनता ने किसी पार्टी की लहर या हवा के साथ बहकर उम्मीदवार को वोट दिए हो लेकिन अधिकांश चुनाव में लहर या हवा के विपरीत जाकर उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि को ही अपना समर्थन देकर आगे बढ़ाया है। अब बताया जा रहा है कि अभी तक जो कार्य पूरे हो चुके या फिर जिन पर कार्य पूरा होना है। उन पर करीब साढे 600 करोड रुपए खर्चे जा रहे हैं। सीएम मनोहर लाल की बदौलत करीब साढे तीन दशकों के बाद सूखे पड़े माइनरो व नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचा है। टूटी-फूटी सड़कों को दुरुस्त करवाया जा रहा है। ऐसी कई माइनर व टेल हैं जहां दो दो दशक बाद भी अब पानी पहुंचा है। तो भाजपा इसी पानी में अपनी उम्मीदें देख रही है।

हल्के के चर्चित चेहरे 

 

भाजपा -जेपी दलाल, वरुण श्योराण ( भाजयुमो के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य)

इनेलो- ओमप्रकाश, राज सिंह गागड़वास

कांग्रेस- मदन सिंह ठेकेदार, सोमवीर सिंह

जजपा- वजीर सिंह

 

2014 का परिणाम

 

ओमप्रकाश बड़वा इनेलो 40693

जय प्रकाश दलाल बीजेपी 38598

सोमवीर सिंह कांग्रेस 32026

बहादुर सिंह हजकां 19599

लोहारू का इतिहास

1957 चंद्रभान श्योराण

1962 चौ. जगन्नाथ निर्दलीय

1967 हीरानन्द आर्य कांग्रेस

1968 चन्द्रावती कांग्रेस

1972 चन्द्रावती कांग्रेस

1977 हीरानन्द आर्य जपा

1982 हीरानन्द आर्य लोकदल

1987 हीरानन्द आर्य लोकदल

1991 चन्द्रावती जनता दल

1996 सोमवीर सिंह हविपा

2000 बहादुर सिंह इनेलो

2005 सोमवीर कांग्रेस

2009 धर्मपाल इनेलो

2014 ओमप्रकाश इनेलो


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