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नया हरियाणा

मंगलवार, 24 अप्रैल 2018

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पारदर्शिता और ईमानदारी का परिणाम: राजस्व विभाग ने एकत्रित किया रिकार्ड तोड़ टैक्स

नई रजिस्ट्रेशन प्रणाली राज्य की सभी तहसीलों व उप-तहसीलों में 3 फरवरी, 2015 से शुरू की गई जिसकी वजह से ना केवल आवेदकों का समय बच रहा है बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है.

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10 अप्रैल 2018

नया हरियाणा

हरियाणा सरकार ने राजस्व विभाग के माध्यम से 1 अप्रैल, 2017 से 31 मार्च 2018 की अवधि के दौरान 4265.18 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व एकत्रित किया है, जबकि पिछले वर्ष के दौरान 3260 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ था। इस प्रकार से इस वित्तीय वर्ष में 1005 करोड़ रुपये से अधिक का संग्रहण हुआ है। इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के नेतृत्व में हरियाणा सरकार की पारदर्शी नीतियों और भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेन्स की वजह से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से होने वाली आय में एतिहासिक वृद्धि हुई है. 
राजस्व मंत्री ने बताया की राजस्व विभाग ने जहाँ एक और एतिहासिक वृद्धि दर्ज करते हुए राजस्व एकत्रित किया वहीं किसानों और आम नागरिकों के लिए कई अहम् निर्णय लिए हैं. ई-दिशा के माध्यम से नई रजिस्ट्रेशन प्रणाली राज्य की सभी तहसीलों व उप-तहसीलों में 3 फरवरी, 2015 से शुरू की गई जिसकी वजह से ना केवल आवेदकों का समय बच रहा है बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है. उन्होंने बताया की इस प्रणाली के तहत यदि आवेदक चाहे तो वह रजिस्ट्री डाक द्वारा तीन दिन के अन्दर प्राप्त कर सकता है. राजस्व मंत्री ने बताया की 2 मई, 2015 से राज्य में ई-स्टैम्प प्रणाली लागू की गई. इसकी वजह से राजस्व में बढौतरी हो रही है तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है. राजस्व विभाग द्वारा प्रत्येक माह की 12 व 26 तारीख (कार्य दिवस) इंतकाल शून्य करने के लिए निर्धारित की गई हैं. इस वजह से राज्य में इंतकाल की पेंडेंसी शून्य हुई है. 
राजस्व मंत्री ने बताया की जहाँ एक और राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और लेट लतीफी पर अंकुश लगाकर विभागीय अधिकारीयों और कर्मचारियों की जिम्मेवारी सुनिश्चित की गई है वहीँ विभाग ने किसानों के हित में भी कई अहम निर्णय लिए हैं. उन्होंने बताया की हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसलों की मुआवजा राशि 10 हज़ार रू से बढ़ाकर 12 हजार रु. प्रति एकड़ की तथा कम से कम नुकसान की स्थिति में किसानों के लिए न्यूनतम 500 रु. मुआवजा सुनिश्चित किया. जिन क्षेत्रों में फसलें 50% से अधिक खराब हुई, वहां एक वर्ष के लिए किसानों के कृषि के बिल शत-प्रतिशत माफ किये गये. जिन क्षेत्रों में फसलें 25% से लेकर 50% तक खराब हुई, वहां किसानों के टयूबवेल के बिल 50% माफ किये. राज्य सरकार ने प्रति एकड़ मुआवजा दर बढ़ाने के साथ-साथ बाढ़, जलभराव, अग्नि, बिजली की चिंगारी, भारी वर्षा, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान और सफेद मक्खी के प्रकोप आदि के कारण क्षतिग्रस्त फसलों को मुआवज़ा देने का दायरा भी बढ़ाया. उन्होंने बताया की आम जनता की सुविधा के लिए कैथल में अत्याधुनिक डिजिटल अभिलेखागार शुरू किया गया है जिसमें भूमि रिकोर्ड को कुछ ही मिनटों में प्राप्त किया जा सकता है और उसके ख़राब होने का भी कोई खतरा नहीं है. उन्होंने बताया की भविष्य में राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर ऐसे अभिलेखागार खोलने की योजना पर कार्य जारी है.


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