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नया हरियाणा

शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

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रोहतक विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

रोहतक विधानसभा शुरू से ही पंजाबी बनाम लोकल के चुनावी दंगल के लिए मशहूर रहा है।

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15 जुलाई 2019



नया हरियाणा

रोहतक विधानसभा शुरू से ही पंजाबी बनाम लोकल के चुनावी दंगल के लिए मशहूर रहा है। इसके अलावा हरियाणा के कई दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी इस तरह के दंगल होते रहे हैं। यह विधानसभा क्षेत्र इसलिए भी खास है क्योंकि यहां से जनसंघ के और पंजाबी समुदाय के चर्चित नेता डॉ मंगल सेन दिग्गज नेता रहे हैं।

वैसे तो जातिगत समीकरण के हिसाब से सभी दल टिकटों का बंटवारा करते रहे हैं। बहुसंख्यक समाज की स्वीकार्यता बनी रहे इस को ध्यान में रखकर सभी पार्टियों की तरफ से टिकट वितरण किया जाता है। कई बार इस संघर्ष में दूसरे या तीसरे नंबर की संख्या वाली जातियों को टिकट देकर भी दांव लगाया जाता है।

रोहतक विधान सभा से दूसरे नम्बर पर वैश्य समाज को टिकट दी जाती रही है। 3 बार वैश्य समाज से विधायक बने हैं। रोहतक सीट पर हुए 16 चुनावों में से 13 बार पंजाबी और 3 बार वैश्य विधायक बने हैं।

रोहतक विधानसभा क्षेत्र से 1952 में विधायक बने। देव राज सेठी झंग जिले से विस्थापित होकर रोहतक आए थे। झंग जिले के विस्थापित लोगों की रोहतक में भारी संख्या थी। सेठी 1937 में लायलपुर झंग विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। 1946 में भी इसी क्षेत्र से चुने गए। 1947 में देश के विभाजन के बाद यह व्यवस्था की गई कि जो लोग 1946 में विधायक चुने गए हैं वह विधायक तो बने रहेंगे लेकिन उनका कोई विधानसभा क्षेत्र नहीं होगा। सेठी कांग्रेस उम्मीदवार थे और उनका मुकाबला जनसंघ के राम फूल सिंह से था। सेठी को 12300 फूल सिंह को 1214 वोट मिले।

1957 में जनसंघ के डॉ मंगल सेन ने जीत दर्ज की। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी रामस्वरूप को पराजित किया। कांग्रेस प्रत्याशी शन्नो देवी तीसरे स्थान पर रही। शन्नो देवी 1946 में भी विधायक चुनी गई थी और 1952 का विधानसभा चुनाव उन्होंने अमृतसर शहर से जीता था। 1957 से लेकर 1987 डॉ मंगल के सेन के अंतिम चुनाव तक केवल 1972 के नियमित चुनाव और 1985 के उपचुनाव को छोड़कर हर एक चुनाव में इस सीट पर मंगलसेन को ही विजय मिली थी।

1972 में सेठ श्री किशन दास ने मंगलसेन को मात दी। यदि 1972 का यह चुनाव 1971 के भारत-पाक युद्ध की छाया और इंदिरा गांधी की प्रचंड लहर के बीच नहीं होता तो मंगल सेन की जीत तय थी। 1962 में मंगल सेन ने देवराज सेठी, 1967 में टेकचन्द, 1977 में सेठ श्री किशन दास, 1982 में सत राम दास बत्रा और 1987 में सेठ श्री किशन दास को पराजित किया। इन सभी चुनाव में पराजित कांग्रेस प्रत्याशी थे। मंगलसेन ने कुल मिलाकर 9 चुनाव लड़े। जिनमें से 7 चुनाव जीते। वह 1970 में मंत्री और 1987 में मंत्री के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री भी रहे।

डॉ मंगल सेन के निधन के बाद जनसंघ के हाथों से फिसल गयी और कांग्रेस के हाथ में आ गई। जबकि कांग्रेस के सेठ श्री किशन दास कांग्रेस को छोड़कर बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी में शामिल हो गए। 1991 में चुनाव हुआ तो सेठ कांग्रेस के सुभाष बत्रा से चुनाव हार गए। सुभाष बत्रा का यह पहला चुनाव था लेकिन 1996 के चुनाव में सेठ श्री किशन दास ने सुभाष बतरा को हरा दिया। वर्ष 2000 व 2005 में उन्हें शादीलाल बत्रा ने और 2009 में भारत भूषण बत्रा ने पराजित किया। 2014 में भाजपा के मनीष ग्रोवर ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को पराजित किया। लगातार तीन पराजय के बाद चौथे प्रयास में मनीष ग्रोवर को जीत मिली और मनोहरलाल के मंत्रिमंडल में जगह भी मिली। इस तरह रोहतक विधानसभा क्षेत्र से डॉ मंगल सेन, सेठ श्री किशन दास और सुभाष बतरा के बाद मंत्री बनने वाले चौथे विधायक बन गए।

रोहतक विधानसभा में शुरू से ही कांग्रेस और भाजपा का वर्चस्व रहा है और एक तरह से यह सीट पंजाबी समुदाय के लिए आरक्षित हो चुकी है। सेठ श्री किशन दास के अलावा सभी अन्य 6 विधायक पंजाबी समुदाय के रहे हैं। 1968 के बाद सभी चुनाव में कांग्रेस ने बत्रा प्रत्याशी ही खड़े किए और भाजपा ने डॉ मंगल सेन के निधन के बाद 1991 में सुंदरलाल सेठी को लड़वाया और उसके बाद भाजपा मनीष ग्रोवर पर दांव लगाती रही।
रोहतक विधानसभा में कुछ दिलचस्प किस्से जुड़े हुए हैं। जिस तरह 2014 में मनोहर लाल के मुख्यमंत्री बनने पर कुछ कांग्रेसियों द्वारा उन्हें रिफ्यूजी कहा जाता रहा है। इसी तरह का आरोप 1957 में कांग्रेस की प्रत्याशी शन्नो देवी ने मंगलसेन पर लगाया था। उन्होंने अदालत में इस आधार पर चुनौती दी थी कि मंगलसेन भारत के नागरिक ही नहीं है परंतु अदालत ने शन्नो देवी के पक्ष को खारिज कर दिया और कहा कि मंगलसेन की नागरिकता असंदिग्ध है।
शन्नो देवी 1962 में जगाधरी विधानसभा से विधायक चुनी गई थी और हरियाणा के अलग राज्य के रूप में आने के बाद वह विधानसभा अध्यक्ष चुनी गई। 1966 से 1967 तक विधानसभा अध्यक्ष रही। शन्नो देवी देश की सबसे पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष चुनी गई थी।

2009 में विधायक बने भारत भूषण बतरा के पिता सतराम दास बत्रा को 1982 में सेठ श्री किशन दास की टिकट काटकर कांग्रेस ने टिकट दी। इसकी बगावत करते हुए श्री किशन दास में अपने भाई को निर्दलीय चुनाव में उतार दिया। उस चुनाव में मंगल सेन ने मात्र 380 वोटों से जीत दर्ज की। शादी लाल बत्रा रोहतक विधानसभा के एकमात्र ऐसे विधायक रहे हैं जिन्हें राज्य सभा सदस्य बनकर दिल्ली जाने का अवसर मिला।
सेठ किशन दास को पद्मश्री के सम्मान से भी नवाजा गया है। मंगलसेन उपमुख्यमंत्री रहे। बीबी बत्रा हरियाणा लोकसेवा आयोग के चेयरमैन रह चुके हैं। 

कांग्रेस ने रोहतक में वकीलों की मजबूत लॉबी के जरिये एक मजबूत किले का निर्माण किया। जिसे 27 साल बाद बीजेपी ने ध्वस्त कर दिया।

2014 के परिणाम
बीजेपी के मनीष ग्रोवर को 57718 वोट मिले। कांग्रेस के भारत भूषण बत्रा को 465856 वोट मिले। इनेलो के राज कुमार शर्मा को 3954 वोट मिले हैं। बसपा के डॉ. कर्ण वीर को 1346 वोट मिले।


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