Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

बुधवार, 18 सितंबर 2019

पहला पन्‍ना सर्वे लोकप्रिय 90 विधान सभा हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप English

जानिए हरियाणा की किन विधानसभा सीटों पर जीत का समीकरण तलाश रहे हैं दुष्यंत चौटाला

हरियाणा की राजनीति में बीजेपी के सही में 'अच्छे दिन' आए हुए हैं.

Dushyant Chautala, Assembly constituency of Haryana, Narnong, Uchana, Dabwali, Fatehabad, naya haryana, नया हरियाणा

6 जुलाई 2019



नया हरियाणा

हरियाणा की राजनीति में बीजेपी के सही में 'अच्छे दिन' आए हुए हैं. 2014 में हरियाणा में पहली बार बीजेपी को अकेले बहुमत मिला था और 2019 के विधानसभा चुनाव में चंद महीने बचे हैं और विपक्ष नाम भर का बचा है. दरअसल विपक्ष ने अपने लिए ये हालात खुद पैदा कर लिए है. इनेलो तो लगभग खत्म ही मानिए. उसके ज्यादातर नेता बीजेपी और कुछ जेजेपी में चले गए हैं. कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को अपनी चौधर बचाने के लाले पड़े हुए हैं. जेजेपी के नेता दुष्यंत चौटाला की पार्टी से भी बीजेपी की तरफ पलायन बढ़ रहा है. दूसरे नेताओं के अलावा भिवानी महेंद्रगढ़ से लोकसभा प्रत्याशी स्वाति यादव जल्द ही बीजेपी में शामिल हो रही है. इनके जेजेपी छोड़ने से जेजेपी को दोहरा नुकसान उठाना पड़ेगा. एक तरफ यादव बेल्ट में इसका भारी नुकसान होगा तो दूसरी तरफ वो सोशल मीडिया हैड भी थी. जिन्होंने लोकसभा चुनाव में जेजेपी पार्टी के लिए सोशल मीडिया पर रणनीति बनाने का काम किया था. 

दुष्यंत चौटाला  को विधानसभा में खुद के लिए 90 सीटों में से एक सुरक्षित सीट खोजने में पसीने छूट रहे हैं. लोकसभा चुनावों में उन्हें हिसार लोकसभा की 9 विधानसभाओं में से केवल नारनौंद से जीत मिली थी. इसलिए उनकी पहली प्राथमिकता नारनौंद हो सकती है. परंतु उनके वहां से चुनाव लड़ने पर रामकुमार गौतम और उमेद लोहान के बगावत करने की संभावनाएं हैं और चाचा भी हरवाने के लिए सक्रिय हो सकते हैं. 

इसके अलावा वो पिछली बार की तरह उचाना से भी चुनाव लड़ने का विचार कर सकते हैं. इसके अलावा डबवाली विधानसभा जहां से नैना चौटाला विधायक हैं, वहां से मैदान में कूद सकते हैं. परंतु वहां से राजनीतिक समीकरण बिगड़ने की संभावना है और चाचा अभय चौटाला हरवाने में भूमिका निभा सकते हैं. इसके अलावा फतेहाबाद में इन सभी सीटों की तुलना में कम संघर्ष वाली सीट मानी जा सकती है, क्योंकि यहां न तो किसी बड़े नेता का सामना करना पड़ेगा और न ही अभय चौटाला का यहां ज्यादा दखल परेशान कर सकता है. पुराना भट्टू कलां विधानसभा के गांव जुड़े होने का लाभ भी मिल सकता है. 


बाकी समाचार