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नया हरियाणा

शनिवार, 20 जुलाई 2019

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नई पार्टी बनाना तो दूर की कौड़ी, किलोई में हुड्डा के बन रहे हैं हार के समीकरण!

राहुल गांधी ने भले इस्तीफा दे दिया हो पर अशोक तंवर इस्तीफा नहीं देंगे.

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5 जुलाई 2019



नया हरियाणा

हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कईं तरह की चर्चाएं चली हुई हैं. कहा जा रहा है कि बीजेपी 2019 के विधानसभा चुनावों में ताऊ देवीलाल के 1987 के रिकॉर्ड तोड़ सकती है! सन् 1987  के चुनाव में ताऊ देवीलाल की लोकदल को 60 सीट मिली थी और उनके गठबंधन की बीजेपी को 16, सीपीआई और सीपीएम को 1-1 सीट मिली थी व 7 निर्दलीय चुनाव जीते थे. इन सभी की सीटों का जोड़ 85 पहुंच गया था. विपक्षी पार्टी के तौर पर कांग्रेस 5 सीटों तक सीमित रह गई थी. हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस की ये सबसे बुरी हार मानी जाती है और 2019 में लगभग इसी तरह की हार के समीकरण बने हुए हैं. क्योंकि दूसरे विपक्षी दल इनेलो का अप्रत्यक्ष तौर पर बीजेपी में पूरी तरह विलय हो गया है. जेजेपी अभी अपनी राजनीति के बाल्यकाल से गुजर रही है. 1987 में बलबीर पाल शाह, मोहम्मद असलम खान, चौधरी महेंद्र प्रताप सिंह, तोयब हुसैन और जसमा देवी ने कांग्रेस की तरफ से जीत दर्ज की थी. कांग्रेस को गर्त में जाते देख राहुल गांधी ने भले ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया हो परंतु हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा दूसरे कांग्रेसियों की तुलना हाथ-पैर मारते हुए जरूर दिख रहे हैं. जबकि हरियाणा में कांग्रेस को इस हालात तक पहुंचाने में हुड्डा के 10 साल का राज और उसके बाद रोहतक में हुई आगजनी व हिंसा की बड़ी भूमिका रही है. जिस रोहतक व सोनीपत के दम पर वो कांग्रेस को दबाव में रखते थे, उसी गढ़ को बीजेपी ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. अबकी बार उनकी किलोई हलके से अपनी खुद की सीट बचानी मुश्किल लग रही है. जिस चक्रव्यूह से उन्होंने कांग्रेस की किलेबंदी की थी, उसी के खुद शिकार बनते चले गए. 
राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद एक फिर से पूर्व सीएम हुड्डा की उम्मीदों पर पंख लग गए हैं. उन्हें उम्मीद है कि वो दोबारा से हरियाणा कांग्रेस में अपनी पकड़ को मजबूत बना लेंगे, जो पिछले कुछ वर्षों में उनकी हाथ से छिटकती हुई दिख रही है. पिछले पांच साल में उनकी सबसे लड़ाई हरियाणा के कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर को अध्यक्ष पद से हटवाने की रही है. जिसमें वो अभी तक सफल नहीं हुए हैं. इसके लिए उन्होंने अपने चिर-विरोधी कुलदीप बिश्नोई तक को अपने खेमे में मिला लिया था. पर परिणाम अनुकूल नहीं निकले. कुलदीप बिश्नोई को अध्यक्ष बनने का लालच ही उन्हें भपेंद्र हुड्डा के दरवाजे तक लेकर गया. पर मन चाहा फल नहीं मिला.
आज कुलदीप बिश्नोई ने भी कार्यसमिति की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने ट्वीट कर इसका कारण लोकसभा चुनाव में बेटे भव्य बिश्नोई की हार को बताया है. वे लंदन में इलाज कराने के लिए गए हुए हैं और वहीं से उन्होंने ट्वीटर के जरिए ये जानकारी दी है. हरियाणा कांग्रेस की पूरी तिकड़मबाजी में चुप रहने वाले असली खिलाड़ी रणदीप सुरजेवाला ही हैं. जो दिखते भले ही नेशनल राजनीति का हिस्सा हैं पर उनकी नजरें जमी हरियाणा की राजनीति पर ही हैं. वो इस उठा-पटक से दूर दिखते हैं जिसका उन्हें भविष्य में फायदा भी होगा. आज के दिन कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता जमीन से कटकर राजनीति कर रहे हैं. उनके इस रवैये से साफ लगता है कि वो केवल बीजेपी की हार में अपनी जीत का सपना देख रहे हैं. उनकी तरफ से कांग्रेस की जीत का कोई सार्थक प्रयास नजर नहीं आता है.
राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी की बुरी हार की जिम्मेदारा लेते हुए कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. 134 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी के 91 साल के कार्यकारी अध्यक्ष मोतीलाल वोरा को बनाया गया है. इनके कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद क्या हरियाणा की राजनीति में कुछ फेरबदल होने की संभावना बन सकती है, क्योंकि पूर्व सीएम हुड्डा और मोतीलाल वोरा दोनों एक केस में केसवार है. कांग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की मालिक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को प्लॉट रि-अलॉट करने में गड़बड़ी के मामले में पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा और अन्य आरोपियों पर केस चल रहा है.
एजेएल कांग्रेस नेताओं व गांधी परिवार के नियंत्रण वाली कंपनी है. इसे जिस समय प्लॉट रि-अलॉट किया गया, उस समय हुड्डा सीएम के साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के चेयरमैन भी थे. वोरा एजेएल के चेयरमैन रहे हैं.  24 अगस्त 1982 को पंचकूला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन सीएम चौधरी भजनलाल ने एजेएल को अलॉट कराया था. कंपनी ने 10 साल तक कंस्ट्रक्शन नहीं किया तो 30 अक्टूबर 1992 को हुडा ने अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट पर वापस कब्जा ले लिया. 28 अगस्त 2005 को तत्कालीन सीएम हुड्‌डा ने अफसरों के मना करने के बावजूद एजेएल को 1982 की मूल दर पर ही प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर दिए. इस मामले समेत जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार के दर्जनों मामले पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा पर चल रहे हैं. जिनमें सबसे बड़ा मामला मानेसर जमीन घोटाले को लेकर चल रहा है.
हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में इस तरह की चर्चाएं चल रही हैं कि पूर्व सीएम हुड्डा कांग्रेस को छोड़कर नई पार्टी का गठन करने वाले हैं. हालांकि इस तरह की चर्चाएं समय-समय पर कई साल से चल रही हैं. जो कि सीधे तौर पर कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बनाने की रणनीति लगती है. कांग्रेस हाईकमान ने इस तरह की टैक्टिस के दबाव में पहले भी हरियाणा के कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर को नहीं बदला था. इसके अलावा पूर्व सीएम हुड्डा के खास विधायकों व खासकर राई हलके के जयतीर्थ दहिया की तरफ से ब्लैकमेलिंग वाले लहजे में बयान दिए गए थे. कांग्रेस हाईकमान ने न तो उनके बयानों को लेकर उन पर कोई सख्त एक्शन लिया और न ही उनके बयानों को गंभीरता से लिया. 

इस बार पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के किलोई से हार के समीकरण बनते हुए दिख रहे हैं. किलोई से बीजेपी की टिकट पर सतीश नांदल चुनाव लड़ सकते हैं. जो कि पूर्व सीएम के लिए कड़ी चुनौती देने वाले हैं. बीजेपी का संगठन यहां पूरा जोर लगा देगा, जिस तरह उसने लोकसभा चुनाव में दीपेंद्र हुड्डा के खिलाफ लगाया था.


 


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