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नया हरियाणा

बुधवार, 18 सितंबर 2019

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बदलते राजनीतिक हालात देख हांसी विधानसभा छोड़ सकती हैं रेणुका बिश्नोई

हांसी हलके में रेणुका बिश्नोई के मैदान छोड़ने की खबर चर्चाओं का विषय बनी हुई है.

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2 जुलाई 2019



नया हरियाणा

हिसार जिला मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक नगरी हांसी है. वहां एक ऊंचे टीले पर मौजूद पृथ्वीराज चौहान के किले को असीगढ़ का किला भी कहा जाता है. संस्कृत में असी का अर्थ तलवार होता है. प्राचीन काल में यहां तलवार बनाने के कारखाने होते थे. जिसके कारण इस शहर को असीगढ़ कहा जाता था. इसके अलावा देश में सबसे पहले 23 मई 1803 को यहां पर स्किनर होर्स रेजिमेंट की स्थापना भी हुई थी. जो आज भी भारतीय सेना की शान मानी जाती है. इतिहासकारों के अनुसार हांसी राजधानी भी रहा है और बाद में जिला मुख्यालय भी रहा था. इसीलिए हांसी हल्के की सबसे पुरानी मांग यही है कि हांसी को जिला बनाया जाए. हालांकि मनोहर सरकार ने कुछ समय पहले इसे पुलिस जिला बनाया है. ऐतिहासिक नगरी विकास के मामले में काफी पिछड़ी हुई नगरी है, क्योंकि यहां अब तक कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हो सका है, जबकि हिसार को स्टील नगरी के तौर पर जाना है.

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2014 के विधान सभा चुनाव का परिणाम
रेणुका बिश्नोई (हजकां)-46335, उमेद लोहान (इनेलो)- 31683, प्रो. छतर सिंह (बीजेपी)- 24242, विनोद भ्याणा (कांग्रेस)- 22244, राव कुलदीप (आजाद)-1767
2014 में हांसी विधानसभा से जनता ने जिन उम्मीदों के साथ रेणुका बिश्नोई को जीत दर्ज करवाई थी, वो उन पर खरी नहीं उतरी. इसीलिए उनके खिलाफ हांसी में विरोध का माहौल बना हुआ है. हल्के को समय न देने के कारण जनता उनके खिलाफ खुलकर बोल रही हैं और लोकसभा चुनाव में भव्य बिश्नोई को यहां से हार का मुंह देखना पड़ा था. 
उमेद लोहान नारनौंद हल्के के भैणी अमीर गांव के निवासी हैं, उनका मन नारनौंद विधानसभा से चुनाव लड़ने का था, परंतु इनेलो ने टिकट हांसी की थमा दी थी. प्रो. छतरपाल सिंह हिसार के बड़े नेता हैं, 1991 में उन्होंने जब घिराय विधानसभा से देवीलाल को हराया था, तब से वो चर्चाओं में आ गए थे. इस जीत के इनाम देते हुए भजनलाल ने इन्हें अपनी सरकार में राज्यमंत्री बनाया था. घिराय हल्के से 4 चुनाव लड़े और उनमें से दो में जीत दर्ज की और दो में हार गए. विनोद भ्याणा हुड्डा सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहे हैं और 2014 के कार्यकाल पूरा होने से कुछ दिन पहले हाईकोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया था. 2014 के चुनाव से पहले भ्याणा एक सीडी कांड में फंसे थे, जिसमें वो सीएलयू के बदले पैसे मांगने को लेकर भी चर्चाओं में आ गए थे. 
कुलदीप बिश्नोई की पत्नी रेणुका बिश्नोई ने हांसी से पहले 2011 में आदमपुर विधानसभा से उपचुनाव जीता था. उसके बाद 2014 में हांसी से विधानसभा में जीत दर्ज की थी. बीजेपी के बृजेंद्र सिंह को हांसी की जनता ने करीब 50 हजार की लीड दिलाई थी. भजनलाल परिवार से रेणुका बिश्नोई ही ऐसी नेता हैं, जिन्होंने अभी तक हार का सामना नहीं किया है. आदमपुर के बाद हांसी विधानसभा सीट को भजनलाल परिवार का गढ़ माना जाता है. हैरानी की बात यह है कि जिस आदमपुर गढ़ से चौधरी भजन लाल 70 हजार मतों से जीत दर्ज करते थे और उनके पोते को आज 23227 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है. 52 साल बाद पहली बार इस अभेदय किले में किसी ने सेंधमारी की है. जिसने किले की दीवारों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है.
अपने बूथ पर हारे भव्य बिश्नोई
आदमपुर मार्केट कमेटी में चौधरी भजन लाल की दुकान है। यहीं के बूथ में आज तक पूरा परिवार मतदान करता आया है। हैरानी की बात है कि चौधरी भजन लाल के पोते भव्य बिश्नोई को पारिवारिक बूथ पर हार का सामना करना पड़ा। वह अपना बूथ बचाने में नाकाम रहे। आदमपुर मार्केट कमेटी में बने बूथ 57 में 136 मतों से भव्य बिश्नोई हार गए। भाजपा को यहां 287 वोट मिले तो भव्य बिश्नोई को मात्र 151 मतों से संतुष्ट होना पड़ा। बूथ नंबर 57 पर कुल 500 वोट पड़े थे।
हांसी विधानसभा के राजनीतिक हालात
वैसे तो पूरे हरियाणा में 10 लोकसभा सीट जीत जाने के बाद बीजेपी के पक्ष में लहर साफ दिख रही है. जिसके कारण बीजेपी भी 75 पार का नारा दे रही है. हांसी विधानसभा सीट की बात करें तो यहां के राजनीतिक हालात सत्ताधारी बीजेपी के पक्ष में साफ दिख रहे हैं. हांसी हल्के के पूर्व विधायक विनोद भ्याणा, पूर्व विधायक अतर सिंह सैनी व पूर्व मंत्री छतरपाल सिंह सहित कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल हो गए हैं और टिकट की दौड़ में हैं. हांसी सीट पर पंजाबी व सैनी समुदाय का दबदबा बताया जाता है. दोनों ही समाजों के बड़े नेता बीजेपी में सीट के दावेदार माने जा रहे हैं. जबकि जातीय समीकरणों के लिहाज से इस हल्के में सबसे ज्यादा जाट मतदाता हैं. हांसी हल्के में करीब 1 लाख 80 हजार कुल मतादाताओं की संख्या है. हांसी विधानसभा में अब तक हुए 15 विधानसभा चुनावों में 4-4 बार सैनी व पंजाबी, 3 बार जाट, दो बार बनिया तथा 1-1 बार बिश्नोई व एससी वर्ग के प्रत्याशी ने जीत का परचम लहराया है. दूसरी तरफ रेणुका बिश्नोई के हल्का बदलने की सुगबुगाहट भी हांसी में चर्चाओं का विषय बनी हुई है.

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किस पार्टी से कौन हैं दावेदार
बीजेपी से- विनोद भ्याणा, अतर सिंह सैनी, छतरपाल सिंह
कांग्रेस से- योगेंद्र योगी, विनोद मेहता, सुमन शर्मा (हांसी नगर परिषद से पूर्व अध्यक्ष रीटा शर्मा के पति)
इनेलो- पूर्व मंत्री सुभाष गोयल
जजपा- विजय जैन( पूर्व चेयरमैन नगर सुधार मंडल), रविंद्र सैनी, प्रदेश सचिव, पिछड़ा वर्ग
 


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