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नया हरियाणा

बुधवार, 18 सितंबर 2019

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ऐतिहासिक नगरी हांसी विधानसभा का इतिहास

2014 विधानसभा चुनावों में रेणका बिश्नोई ने जीत दर्ज की थी.

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2 जुलाई 2019



नया हरियाणा

हिसार लोकसभा के हांसी विधानसभा क्षेत्र से 1952 के प्रथम चुनाव में कांग्रेस के लाजपत राय विधायक चुने गये। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी को हराया। 1957 के विधानसभा चुनाव में यह सीट आरक्षित हो गई।  सामान्य सीट से कांग्रेस के सरूप सिंह व आरक्षित सीट पर कांग्रेस के दलबीर सिंह चुने गए। 1962 में हांसी से एक सामान्य वर्ग से प्रतिनिधि चुनना था। इस बार सोशलिस्ट पार्टी के टेकराम विधायक चुने गए। उन्होंने कांग्रेस के सरूप सिंह को हराया।
1967 में कांग्रेस के हरि सिंह ने आजाद उम्मीदवार को हराया। 1968 में विशाल हरियाणा पार्टी के अजीत सिंह को पराजित कर हरि सिंह दोबारा विधायक बने। 1972 में निर्दलीय इशार सिंह ने हरी सिंह को हराकर उन्हें हैट्रिक लगाने से रोका।
1977 में स्वतंत्रता सेनानी बलवन्त राय तायल ने जनता पार्टी प्रत्याशी के रूप में आजाद उम्मीदवार अमीर चन्द मक्कड़ को हराकर जीत दर्ज की।
1982 में लोकदल के अमीर चन्द मक्कड़ कांग्रेस के हरि सिंह से हार गए। 1987 में स्वर्गीय छज्जूराम के पुत्र प्रदीप चौधरी ने यह सीट जीत कर बीजेपी में झोली में डाल दी।
1991 में अमीर चन्द ने आजाद चुनाव लड़कर निर्दलीय अतर सिंह सैनी को हराया। 1996 में अतर सिंह सैनी ने हविपा से चुनाव जीता। उन्होंने अमीर चन्द मक्कड़ को पराजित किया।
2000 में इनेलो के सुभाष चंद यहाँ से विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय अमीर चन्द को पराजित किया।
2005 में मक्कड़ कांग्रेस की ओर से लड़े और निर्दलीय विनोद भ्याना को पराजित किया। इनेलो की सत्य बाला तीसरे व बीजेपी के पीके चौधरी चौथे स्थान पर रहे।
2009 में हरियाणा जनहित कांग्रेस के विनोद भ्याना ने कांग्रेस के प्रो. छतरपाल सिंह को शिकस्त दी।
2014 में तीन बड़े खिलाड़ी मैदान में थे लेकिन रेणुका बिश्नोई ने जीत दर्ज की। उन्होंने इनेलो के उमेद लोहान को पराजित किया। बीजेपी के छतर पाल तीसरे व कांग्रेस के विनोद भ्याना चौथे स्थान पर रहे।

2014 के विधान सभा चुनाव का परिणाम
रेणुका बिश्नोई (हजकां)-46335, उमेद लोहान (इनेलो)- 31683, प्रो. छतर सिंह (बीजेपी)- 24242, विनोद भ्याणा (कांग्रेस)- 22244, राव कुलदीप (आजाद)-1767
2014 में हांसी विधानसभा से जनता ने जिन उम्मीदों के साथ रेणुका बिश्नोई को जीत दर्ज करवाई थी, वो उन पर खरी नहीं उतरी. इसीलिए उनके खिलाफ हांसी में विरोध का माहौल बना हुआ है. हल्के को समय न देने के कारण जनता उनके खिलाफ खुलकर बोल रही हैं और लोकसभा चुनाव में भव्य बिश्नोई को यहां से हार का मुंह देखना पड़ा था. 
उमेद लोहान नारनौंद हल्के के भैणी अमीर गांव के निवासी हैं, उनका मन नारनौंद विधानसभा से चुनाव लड़ने का था, परंतु इनेलो ने टिकट हांसी की थमा दी थी. प्रो. छतरपाल सिंह हिसार के बड़े नेता हैं, 1991 में उन्होंने जब घिराय विधानसभा से देवीलाल को हराया था, तब से वो चर्चाओं में आ गए थे. इस जीत के इनाम देते हुए भजनलाल ने इन्हें अपनी सरकार में राज्यमंत्री बनाया था. घिराय हल्के से 4 चुनाव लड़े और उनमें से दो में जीत दर्ज की और दो में हार गए. विनोद भ्याणा हुड्डा सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहे हैं और 2014 के कार्यकाल पूरा होने से कुछ दिन पहले हाईकोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया था. 2014 के चुनाव से पहले भ्याणा एक सीडी कांड में फंसे थे, जिसमें वो सीएलयू के बदले पैसे मांगने को लेकर भी चर्चाओं में आ गए थे. 
कुलदीप बिश्नोई की पत्नी रेणुका बिश्नोई ने हांसी से पहले 2011 में आदमपुर विधानसभा से उपचुनाव जीता था. उसके बाद 2014 में हांसी से विधानसभा में जीत दर्ज की थी. भजनलाल परिवार से रेणुका बिश्नोई ही ऐसी नेता हैं, जिन्होंने अभी तक हार का सामना नहीं किया है. आदमपुर के बाद हांसी विधानसभा सीट को भजनलाल परिवार का गढ़ माना जाता है. हैरानी की बात यह है कि जिस आदमपुर गढ़ से चौधरी भजन लाल 70 हजार मतों से जीत दर्ज करते थे और उनके पोते को आज 23227 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है. 52 साल बाद पहली बार इस अभेदय किले में किसी ने सेंधमारी की है. जिसने किले की दीवारों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है.
 


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