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नया हरियाणा

शनिवार, 20 जुलाई 2019

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2019 के विधानसभा चुनावों में भजनलाल परिवार पर मंडरा रहे हैं हार के बादल!

भजनलाल परिवार का गढ़ कहे जाने वाले आदमपुर से इस बार हार के समीकरण बन रहे हैं।

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1 जुलाई 2019



नया हरियाणा

हरियाणा की राजनीति मनोहर लाल से पूर्व तीन लालों के ईर्द-गिर्द घूमती हुई दिखती थी, जिनमें भजनलाल, देवीलाल और बंसीलाल। आज हम भजनलाल के गढ़ कहे जाने वाले आदमपुर के इतिहास और वर्तमान का विश्लेषण करेंगे। आदमपुर विधानसभा सीट भजनलाल परिवार की पारंपरिक सीट मानी जाती है। इस सीट पर भजनलाल परिवार का दबदबा रहा है और यह सीट राजस्थानी जीवन शैली से मेल खाती है।
हरियाणा के किसी और हलके पर किसी परिवार का एकछत्र राज इस तरह का नहीं रहा है। इस सीट पर 1967 में हुए पहले चुनाव को छोड़कर बाकी सभी चुनाव में भजनलाल परिवार ने जीत दर्ज की है। यहां से भजनलाल 9 बार, कुलदीप बिश्नोई तीन बार और भजन लाल की धर्म पत्नी जसमा देवी व रेणुका बिश्नोई एक-एक बार विधायक बने हैं। यानी 2014 चुनाव समेत आदमपुर ने भजनलाल परिवार से कुल 14 बार विधायक बनाए हैं।

भजनलाल परिवार का एकछत्र राज
आदमपुर से चौधरी भजनलाल 1968, 1972,1977, 1982, 1991, 1996, 2000, 2005 और 2008 में विधायक बने। 1977 में जनता पार्टी और 2008 में हजका पार्टी से भजनलाल चुनाव जीते। बाकी सभी चुनावों में कांग्रेस की टिकट पर ही लड़े और जीते। भजनलाल परिवार इस सीट पर बेताज बादशाह रहा है।

मात्र 5 सीटों तक सीमट गई थी कांग्रेस
1987 में चौधरी देवीलाल की आंधी के बीच जब कांग्रेस के मात्र 5 विधायक चुने गए थे। तब उनमें से भजन लाल की पत्नी जसमा देवी विधायक बनी थी। आदमपुर  सीट पर एक बार भजन लाल के सामने चौधरी देवीलाल भी चुनाव लड़ने आए थे। 1972 में देवीलाल ने एक साथ आदमपुर में भजनलाल और तोशाम में बंसीलाल के सामने चुनाव लड़े थे। तब भजनलाल ने उन्हें करीब 10000 वोटों से हराया था, जबकि बंसीलाल के हाथों उनकी हार करीब 20 हजार वोटों की रही थी।

कुलदीप बिश्नोई की राजनीति
कुलदीप बिश्नोई 1998, 2009 और 2014 में यहां से विधायक चुने गए। 2011 में हुए उपचुनाव में रेणुका बिश्नोई यहां से जीती थी। 2011 में पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की मृत्यु के बाद कुलदीप बिश्नोई ने हिसार लोकसभा से चुनाव लड़ा था और उसी समय आदमपुर विधानसभा से रेणुका बिश्नोई ने चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी।

कुलदीप बिश्नोई की बढ़ाई थी मुश्किलें
भजनलाल परिवार को 14 चुनाव में से केवल एक बार इस सीट पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा था। 2009 में कांग्रेस की सीट पर पूर्व मंत्री जयप्रकाश ने यहां से कुलदीप बिश्नोई की मुश्किलें बढ़ा दी थी, जबकि इस क्षेत्र के लिए वे बाहरी उम्मीदवार थे लेकिन अपने प्रचार से उन्होंने कुलदीप बिश्नोई को आदमपुर तक ही सीमित कर दिया था।

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2019 के विधानसभा चुनाव में दिख रहे हैं हार के संकेत

आदमपुर भजनलाल परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में हिसार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे भव्य बिश्नोई तीसरे नंबर पर रहे और उन्हें आदमपुर से करीब 20 हजार वोटों से हार हुई। इस हार के कारण 2019 के विधानसभा चुनाव में गढ़ टूटने की चर्चाएं राजनीतिक हलकों में चल रही हैं। 

भजनलाल परिवार 1968 से 2019 तक के 51 वर्षों में 30 चुनाव लड़ चुका है और मात्र 5 चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। परिवार के 6 सदस्यों में से रेणुका बिश्नोई के अतिरिक्त शेष 5 सदस्य एक-एक बार चुनावी हार का मजा चख चुके हैं, जिनमें से कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई की ताजी-ताजी हार हुई है। आदमपुर के अलावा हांसी से विधायक रेणुका बिश्नोई पर भी हार के बादल मंडरा रहे हैं।


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