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नया हरियाणा

शुक्रवार, 22 जनवरी 2021

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मीडिया प्रभारी रणबीर गुलिया ने लगाए कृषि मंत्री ओपी धनखड़ पर बड़े आरोप!

2014 में बादली से पहली जीत दर्ज की थी ओपी धनखड़ ने.

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29 जून 2019



नया हरियाणा

कृषिमंत्री ओपी धनखड़ के खिलाफ बीजेपी के नेता रणबीर गुलिया ने बगावत शुरू कर दी है। रणबीर गुलिया झज्जर से बीजेपी के जिला मीडिया प्रभारी हैं। उनका आरोप है कि धनखड़ जनता गुमराह और पार्टी को कमजोर कर रहे हैं. उनका कहना है कि धनखड़ हलके में कह रहे हैं कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा। उन्होंने उन आरोप लगाते हुए कहा कि वो अभी से अपने बेटे की टिकट पक्के होने की भी बात कह रहे हैं। मंत्री के खास लोग गलत प्रचार कर रहे हैं और बेटे को बादली से चुनाव लड़ने की कह रहे हैं। 

दिल्ली के ग्रामीण इलाकों से लगती यह विधानसभा सीट लोकदल की पारंपरिक सीट मानी जाती है, क्योंकि यहां से लगातार पांच बार 1982, 1987, 1991, 1996 और 2000 में इनेलो के विधायक बने।
2014 में रोहतक लोकसभा से ओम प्रकाश धनखड़ भले ही चुनाव हार गए हो परंतु 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बादली से जीत दर्ज की। जबकि लोकसभा चुनाव में बादली से उन्हें जीत नसीब नहीं हुई थी। ओम प्रकाश धनखड़ भाजपा के राष्ट्रीय किसान मोर्चा के दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं। बादली विधानसभा से यह उनका पहला विधानसभा चुनाव था। इससे पहले वे दादरी सीट से चुनाव लड़ चुके थे, जहां उन्हें नाम मात्र ही वोट मिले थे।
ओमप्रकाश धनखड़ भाजपा में लंबे समय से सक्रिय थे और हिमाचल प्रदेश के पार्टी प्रभारी भी रह चुके थे। 1978 में आर एस एस की गतिविधियों से जुड़ने के बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ भी सक्रिय रहे।  किसानों से जुड़े आंदोलनों और यात्राओं का वह नेतृत्व करते रहे हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति के निर्माण में लोहा इकट्ठा करने वाली समिति के राष्ट्रीय संयोजक बने थे।

बादली विधानसभा का इतिहास

बादली विधानसभा 1970 में वजूद में आई। यहां अब तक 9 बार चुनाव हो चुके हैं। पहली बार यहां से चौधरी हरद्वारी लाल ने चुनाव जीता। उसके बाद बादली एक तरीके से चौधरी धीरपाल की होकर रह गई, क्योंकि उन्होंने पांच बार लगातार इस सीट पर जीत दर्ज की। चार बार पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष चौधरी मनफूल सिंह को मात दी।

बादली विधानसभा से धीरपाल ने कभी हार का मुंह नहीं देखा। जब उनकी सेहत काफी खराब चल रही थी, जिसके कारण उन्होंने 2005 का चुनाव नहीं लड़ा और 2014 के चुनाव से पहले उनका निधन हो गया। 2005 और 2009 में नरेश शर्मा ने यहां पहले निर्दलीय और फिर कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की और क्रमशः चतर सिंह व विजेंद्र सिंह चाहर (जो कि मनफूल सिंह के बेटे हैं) को हराया।

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मोदी लहर में 2014 में ओमप्रकाश धनखड़ यहां से विजई हुए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप वत्स को पराजित किया। इनेलो ने धीरपाल की पत्नी सुमित्रा को मैदान में उतारा था लेकिन वे तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस के नरेश शर्मा चौथे पायदान पर रहे। बादली से धीरपाल व ओमप्रकाश धनखड़ दोनों मंत्री रहे। तमाम जिंदगी देवीलाल व चौटाला के भरोसेमंद सिपाही रहे  धीरपाल 2009 के विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेसी हो गए थे। 


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