Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

शनिवार, 20 जुलाई 2019

पहला पन्‍ना सर्वे लोकप्रिय 90 विधान सभा हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप English

दुष्यंत चौटाला ने बीजेपी के ट्रैप में फंसकर इनेलो की खोद दी कब्र!

अभय चौटाला को खलनायक के रूप में पोट्रेट करते खुद 'फेसबुकिया सीएम' बन गए दुष्यंत चौटाला.

Tau Devi Lal, Inelo, JJP, OP Chautala, Abhay Chautala, Ajay Chautala, Dushyant Chautala, BJP Haryana, Facebook CM, naya haryana, नया हरियाणा

26 जून 2019



नया हरियाणा

हरियाणा में ताऊ देवीलाल की विरासत और कार्यकर्ताओं के दम पर निर्मित्त मजबूत क्षेत्रीय दल इन दिनों अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 47, इनेलो व अकाली को 20, कांग्रेस को 17, निर्दलीय की 5 और बसपा को 1 सीट मिली थी. इनेलो ने पेहवा, जुलाना, उकलाना, बरवाला, नलवा, फतेहाबाद, रतिया, नरवाना, डबवाली, रानियां, सिरसा, एलनाबाद, फरीदाबाद एनआईटी, हथीन, नूंह, फिरोजपुर झिरका, दादरी, लोहारू, जींद व कलांवली से अकाली के विधायक बने थे.
दूसरा बड़ा दल होने के कारण ही अभय चौटाला को नेता प्रतिपक्ष का नेता चुना गया था. कांग्रेसी की आपसी फूट के कारण इनेलो को ही बीजेपी को टक्कर देने वाला दल माना जा रहा था. इनेलो और बसपा के गठबंधन के बाद बीजेपी के खिलाफ सबसे मजबूत दल बनकर विपक्ष के तौर पर खड़ा था. वहीं इनेलो 2019 के विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले खत्म होने के कगार पहुंच गई है.
इनेलो के खत्म होने की कहानी घर से शुरू हुई थी. जब दुष्यंत चौटाला ने पार्टी के भीतर दबाव बनाने के लिए अपने नेताओं के खिलाफ रैली में नारे लगवाने शुरू किए. ओपी चौटाला ने इस दबाव को खारिज करते हुए अजय चौटाला के परिवार को पार्टी से निकाल दिया. अजय चौटाला परिवार ने जननायक जनता पार्टी के नाम से नई पार्टी का गठन किया. जींद के विधायक के आकस्मिक निधन हो गया और उनके बेटे कृष्ण मिड्ढा बीजेपी में शामिल हो गए और जजपा के दिग्विजय चौटाला को हराकर जीत दर्ज की. यहां इनेलो के प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई. करीब साढ़े 3 हजार वोट ही मिले. जिससे इनेलो की साख एकदम से गिर गई. साख गिरते देख बसपा ने इनेलो से गठबंधन तोड़ दिया. कुछ समय बाद पेहवा के विधायक जसविंदर सिंह सिंधु का भी आकस्मिक निधन हो गया.
इनेलो विधायकों में डबवाली से नैना चौटाला, उकलाना से अनूप धानक, दादरी से राजदीप फौगाट व नरवाना से पिरथी सिंह नंबरदार जजपा में शामिल हो गए थे. फरीदाबाद एनआईटी के विधायक नगेंद्र भड़ाना शुरू से बीजेपी के पाले में चले गए थे. इनेलो की 19 सीटों में 7 विधायक कम होने से संख्या 12 रह गई. नलवा के विधायक रणबीर सिंह गंगवा व हथीन के विधायक केहर सिंह इनेलो का साथ छोड़ गए. लोकसभा चुनाव के बाद फतेहाबाद के विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया भी बीजेपी में शामिल हो गए.
आज इनेलो के जुलाना से विधायक परमिंदर सिंह ढुल व नूंह के विधायक जाकिर हुसैन बीजेपी में शामिल होंगे. रतिया से इनेलो विधायक रविंद्र बलियाला ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला से मुलाकात की है. उनके भी जल्द बीजेपी में शामिल होने की संभावना है.
हरियाणा में बीजेपी को लंबे समय तक शासन के लिए कांग्रेस की आपसी फूट के कारण कोई भय नहीं था, परंतु इनेलो और बसपा गठबंधन बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता था. ऐसे में बीजेपी नेताओं की तरफ हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला की खूब बढ़ा-चढ़ाकर प्रशंसाएं की जाने लगी. दूसरी तरफ सोशल मीडिया के प्रचार-प्रसार ने उन्हें इस भ्रम में डाल दिया कि हरियाणा की जनता दुष्यंत चौटाला को हाथों हाथ लेगी. रही-सही कसर उनके राजनीतिक सलाहकारों ने उन्हें सीएम बनने के चश्मा चढ़ा दिया. उन्होंने यह प्रचार खूब किया कि शहरी मतदाता भी दुष्यंत चौटाला को खूब पसंद कर रहे हैं. दुष्यंत चौटाला को हीरो बनाने के लिए सोशल मीडिया टीम ने अभय चौटाला को खलनायक के रूप में पोट्रेट करना शुरू कर दिया. ताकि दोनों की तुलना में दुष्यंत चौटाला नरम स्वभाव व समझदार नेता के रूप में निर्मित्त हो सकें. बहुत हद तक हुआ भी यही. पहले से चले आ रहे किस्सों ने अभय चौटाला की छवि एक खलनायक की बनाई हुई थी. सोशल मीडिया में आकर उसने विराट रूप ले लिया. 
इनेलो के कार्यकर्ताओं और खासकर युवा कार्यकर्ताओं में दुष्यंत चौटाला ने पूरी सेंध लगा ली. पहले पार्टी के भीतर यह दबाव बनाया गया कि दुष्यंत चौटाला को सीएम प्रत्याशी घोषित किया जाए. जब दबाव की राजनीति काम नहीं आई तो नई पार्टी का गठन कर लिया. जो राजनीतिक विश्लेषक व बीजेपी के नेता पहले दुष्यंत चौटाला की प्रशंसा करते थे. अब एकदम से पलटी मार गए. चढ़ाकर मारना कहावत इसे ही कहते हैं. सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट व शेयर को ही जनाधार समझने के भ्रम ने भी युवा नेता को उकसा दिया. इसी कारण उन्हें फेसबुकिया नेता के नाम से भी पुकारा जाने लगा. राजनीति के जानकारों का कहना है कि दुष्यंत चौटाला 2024 के लिए नींव रख रहे हैं. फिलहाल उनके भाषणों और उनकी पार्टी के घोषणा पत्र से ये साफ हो रहा है कि उनके पास हरियाणा के जमीनी मुद्दों व हरियाणा की जनता के बीच पहुंचने वाले ठोस सपने नहीं हैं. जिस तरह पार्टी हवा-हवाई दौर से गुजर रही है, उसी तरह वादें भी हवा-हवाई ज्यादा लग रहे हैं. दरअसल दुष्यंत चौटाला जमीनी स्तर निकले नेता नहीं हैं, बल्कि परिवारवाद की देन ही हैं. जिनके पास हरियाणा की जनता और युवाओं के लिए कोई विज़न नहीं है. जिस ढर्रें पर इनेलो चलती रही है, उसी ढर्रें पर जजपा आगे बढ़ रही है. पुरानी शराब नई बोतल में परोस दी गई है. 
जजपा का भविष्य कैसा होगा यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, परंतु इनेलो को ऐसे हालात में पहुंचा दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में एक थी इनेलो होने की पूरी संभावना है.


बाकी समाचार