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नया हरियाणा

सोमवार , 17 जून 2019

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जानिए असंध विधानसभा का इतिहास और वर्तमान समय का राजनीतिक गणित!

2009 से पूर्व असंध विधानसभा आरक्षित सीट थी.

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7 जून 2019



दुष्यंत

असन्ध विधानसभा 1977 से लेकर 2005 तक  आरक्षित(रिजर्व) सीट रही है । 2009 में पहली बार किसी स्वर्ण जाति का विधायक यहां से चुना गया । नाम हैं जिले राम शर्मा। जिले राम शर्मा यहां से हजकां की टिकट पर जीते थे। इस सीट ने एक इतिहास भी रचा था वह इतिहास यह था कि यहां जीतने वाले उम्मीदवार की भी जमानत जब्त हो गई थी। हरियाणा बनने के बाद चुनाव जीतकर जमानत करवाने वाले अकेले नेता हैं। जमानत जब्त यानी कुल पड़े वोटों में से 16.66 प्रतिशत से ज्यादा वोट लेने पर ही जमानत बचती है. परंतु इन्हें चुनाव में 15.80 प्रतिशत वोट मिले थे. जिसके कारण विजयी होने के बावजूद इनकी जमानत राशि जब्त हो गई थी. 2014 में यहां से बीजेपी के बख्शीश सिंह विर्क जीते थे.

अंसध विधानसभा का इतिहास

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2019 को समझने या उस पर चर्चा से पहले 2009 और  2014 को समझना जरूरी है। असल में बात वहीं से शुरू होती है । 2009 में जिले राम शर्मा हजकां की टिकट से विधायक चुने गए, बाद में उन समेत चार और विधायकों ने कांग्रेस में विलय कर लिया। जिसके चलते जिले राम को सी पी एस का पद भी मिला। जिले राम जी ने असन्ध में खूब सारे विकास कार्य करवाएं एवं हुड्डा सरकार में नौकरियाँ भी लगवाई । कुल मिलाकर उनका कार्यकाल ठीक ही रहा। पर बिना अनुभव के विधायक से कई सारी चूक भी हुई। बहुत से कार्यकर्ता 2014 आते-आते उनसे नाराज हो चुके थे। 2012-13 में एक मामले में उनका जेल में जाना हुआ। इन पर और पानीपत ग्रामीण के विधायक ओमप्रकाश जैन पर किसी सरपंच की हत्या का केस चला था, जिसमें इन्हें जेल में जाना पड़ा था। खैर , वो बाहर आये । पुनः कांग्रेस की टिकट की दावेदारी ठोकी, पर कामयाब ना हो पाए । कांग्रेस ने टिकट दिया सुमिता सिंह को जो कि चुनाव हार गयीं। करनाल से मनोहर लाल खट्टर के मैदान में आने के बाद सुमिता सिंह को लगा था कि असंध सीट उनके लिए सुरक्षित सीट रहेगी, परंतु असंध की जनता ने उन्हें सिरे से नकार दिया. और जिले राम को भी आजाद चुनाव लड़ते हुए करारी हार का सामना करना पड़ा ।

साल 2014 मोदी लहर का साल कहा जाता है, जिस तरह 2019 में हरियाणा में  मनोहर लहर का साल कहा जा रहा है. उसी के चलते बीजेपी की टिकट से सरदार बख्शीश सिंह जीत गए, पर एक विशेष बात अबकी बार हुई । पहली बार जीत का मार्जन मात्र 4500 वोट्स का रहा। रनर अप अबकी बार रहे बी एस पी की टिकट से चुनाव लड़ने वाले व बार-बार पार्टी बदलने वाले मराठा वीरेंद्र ।

2014 - 2019 कार्यकाल कुल मिलाकर मौजूदा विधायक का ठीक ठाक रहा है। खट्टर साहब ने अबकी बार एम एल ए को खाली हाथ बैठा रक्खा है । ज्यादातर लोग विधायकों के पास नौकरी की सिफारिश ही लेकर जाते थे, जोकि अबकी बार HSSC के हाथ में है । खट्टर साहब भी इसी बात का ढिंढोरा पीटते नजर आते हैं। 2019 का चुनाव दिलचस्प इसीलिए भी होने वाला है क्योंकि यहां अलग-अलग पार्टी व विधायकों की एक लम्बी लिस्ट है । खुद बीजेपी में टिकट के दावेदार खूब सारे हैं ।

2019 में अगर बीजेपी की बात करें, मैंने केवल दो को ही चुना है जो टिकट के प्रबल दावेदार भी हैं , पहले मौजूदा विधायक बख्शीश सिंह विर्क और दूसरा प्रो• वीरेंद्र सिंह । कांग्रेस से भी एक लम्बी सूची है - शेर प्रताप शेरी, जिले राम शर्मा , यशपाल राणा , मराठा वीरेंद्र आदि आदि। जेजेपी से बृज शर्मा का नाम उभर कर आता है। INLD से कुक्कू राणा का नाम भी सामने आता है। ये 2014 में यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। अगर सीधे-सीधे बात करें टक्कर की, तो अगर जिले राम कांग्रेस से टिकट ले आते हैं, तो चुनाव ओर भी दिलचस्प होने वाला है। दूसरा इनको कड़ी टक्कर देने के लिए प्रो• वीरेंद्र भी कम नही हैं। अगर बीजेपी इनको मौका दे, तो यह सीट ये निकल सकते हैं। और अगर मैं अपनी राय दूँ तो प्रो • वीरेंद्र चौहान अभी वर्तमान समय में आगे चल रहे हैं।


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