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नया हरियाणा

रविवार, 21 अप्रैल 2019

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चंद्रावती से बंसीलाल, हुड्डा से देवीलाल व आईडी स्वामी से भजनलाल, तीनों लालों को खानी पड़ी थी मात

1980 में रामबिलास शर्मा को महेंद्रगढ़ सीट पर कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह ने हराया था.

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3 अप्रैल 2019



नया हरियाणा

हरियाणा के सियासी दंगल में बड़े-बड़े नेताओं ने हार का मुंह देखा है. तीनों 'लाल' के नाम से मशहूर बंसीलाल, देवीलाल और भजनलाल को मुख्यमंत्री रहने के बाद लोकसभा चुनाव में जनता ने सिर आंखों पर बिठाने की बजाय नकार दिया था. अतीत के पन्नों में झांका जाए  तो पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल 1977 में आपातकाल के गुस्से का शिकार हुए और भिवानी लोकसभा सीट पर भारतीय लोकदल की चंद्रावती ने 1,61,242 वोटों से उन्हें हराया था. चंद्रावती को 2,89,135 और कांग्रेस उम्मीदवार बंसीलाल को 1,27,893 वोट मिले थे. बंसीलाल को ठीक पहले तीसरा मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल हुआ था. वह 22 मई, 1968 से 30 नवंबर, 1975 तक मुख्यमंत्री रहे. बंसीलाल ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. 11 मई, 1966 से 23 मई, 1999 तक वह प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.

ताऊ देवीलाल को दो बार मुख्यमंत्री बनने का गौरव मिला था. पहली बार वह 21 जून, 1977 से 28 जून, 1979 तक और दूसरी बार 17 जुलाई, 1987 से 2 दिसंबर, 1989 तक मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद देवीलाल को 3 बार रोहतक लोकसभा सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा. उन्हें कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 1991, 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में हराया था. 1999 में हुड्डा को भी इनेलो के इंद्रजीत सिंह से हार का सामना करना पड़ा था. मगर 2004 में कैप्टन अभिमन्यु को हराकर हुड्डा एक बार फिर कांग्रेस सांसद बने और दिल्ली से मुख्यमंत्री की कुर्सी पाकर हरियाणा लौटे. इसके बाद लगातार दो बार 2014 तक हरियाणा के सीएम रहे. वर्तमान में गढ़ी सांपला से विधायक है. सीएम रहे भजनलाल को भी लोकसभा चुनाव में लोगों ने आईना दिखा दिया और उन्हें करनाल लोकसभा सीट पर हार का सामना करना पड़ा. उन्हे भाजपा नेता आईडी स्वामी ने हराया था. इससे पहले 1998 में भजनलाल इसी सीट पर आईडी स्वामी को हरा चुके हैं. भजनलाल 1989 में फरीदाबाद क्षेत्रीय सांसद रहे. केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, कुमारी सैलजा और आईडी स्वामी को भी हार का सामना करना पड़ चुका है.
वर्तमान में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज भी 1980 में करनाल लोकसभा सीट पर चिरंजी लाल, 1984 में चिरंजीलाल और 1989 में चिरंजीत लाल के हाथों पराजित हो चुके हैं. 1998 के चुनाव में कुमारी शैलजा को सिरसा में डॉ सुशील इंदौरा के हाथों हार झेलनी पड़ी. आईडी स्वामी को करनाल में ही 1998 में हार का मुंह देखना पड़ा था. 2004 में इनेलो नेता अभय चौटाला भी कुरुक्षेत्र सीट पर नवीन जिंदल के मुकाबले हार गए थे. 1980 में रामबिलास शर्मा को महेंद्रगढ़ सीट पर कांग्रेस के बीरेंद्र सिंह ने हराया था.


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