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नया हरियाणा

रविवार, 21 अप्रैल 2019

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हिसार से भतीजे दुष्यंत के सामने चुनावी समर में उतरेंगे अभय चौटाला

रोचक है चाचा-भतीजा का सियासी सफर.

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1 अप्रैल 2019



नवदीप सेतिया

हरियाणा की सियासी पिच पर सियासी खेल दिलचस्प होता जा रहा है। पिछले कुछ समय से चाचा-भतीजों (अभय-दुष्यंत) में चल रही लड़ाई अब चुनावी समर में बिल्कुल आमने-सामने नजर आने वाली है। अभय लोकसभा चुनाव में हिसार संसदीय क्षेत्र से इनैलो उम्मीदवार होंगे। इस आश्य का ऐलान नई दिल्ली में पार्टी की संसदीय कार्यसमिति की बैठक में किया गया। पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला से मंथन के बाद पार्टी की कोर कमेटी ने भी इस पर मोहर लगा दी है। गौरतलब है कि जननायक जनता पार्टी की ओर से दुष्यंत चौटाला हिसार से उम्मीदवार होंगे। जाहिर है हॉट सीट हिसार पर रोचक जंग देखने को मिलेगी। कैसे इनैलो में विघटन हुआ और अब आने वाले समय में चौटाला परिवार में छिड़ी सियासी जंग कहां तक पहुुचेंगी इन्हीं तथ्यों पर आंकलन पर आधारित है यह रिपोर्ट:
दो दशक में इनैलो में आया बिखराव
करीब दो दशक भर पहले अप्रैल 1998 में जब ओमप्रकाश चौटाला ने इंडियन नैशनल लोकदल का गठन किया तो उन्होंने सोचा नहीं होगा कि करीब दो दशक बाद इसमें बिखराव आ जाएगा। चौटाला ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि उनके बेटों अजय एवं अभय की सियासी राहें अलग-अलग हो जाएंगी। आज दोनों ही भाइयों की राहें अलग हो गई हैं। इनैलो पिछले करीब 13 वर्ष से सत्ता से बाहर है। पिछले साल अप्रैल में इनैलो का जब बसपा के साथ गठबंधन हुआ तो सत्ता वापसी की आस कार्यकत्र्ताओं को जगी थी। अब एकाएक हुए घटनाक्रम के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं। इनैलो का दारोमदार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अभय ङ्क्षसह चौटाला पर है। उनके नेतृत्व में पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 2 सीटें जीतीं तो विधानसभा चुनाव में शिअद संग गठबंधन कर 20 सीटें हासिल की। वहीं नई सियासी पारी खेलने जा रहे अजय ङ्क्षसह और दुष्यंत चौटाला की राहें भी मुश्किल हैं। अजय इस समय जेल में हैं। ऐसे में सारा बोझ दुष्यंत के कंधों पर हैं। पहले दुष्यंत को नया दल खड़ा करना है। पूरे राज्य में पदाधिकारियों की टीम और उसके बाद मिशन इलैक्शन है। खैर लोकसभा चुनावों मेें चाचा-भतीजे में छिड़ी सियासी जंग जोरों पर है। ऐसे में चाचा-भतीजा (अभय-दुष्यंत) के किरदार को गहनता से हर कोई जानना चाहते हैं। दोनों का ही सियासी कॅरियर बेहद दिलचस्प है। अभय पंचायत चुनाव के जरिए सियासत में आए और बाइ इलैक्शन जीत कर पहली बार विधानसभा में पहुंचे। दुष्यंत सबसे कम आयु में हिसार से 2014 में सांसद बने। इन दोनों किरदारों को तलाशती-खंगालती हमारी यह रिपोर्ट:
अभय चौटाला
अभय का जन्म अपने ननिहाल पंजाब के अबोहर के पंचकोसी में 14 फरवरी 1963 को हुआ। एसएम ङ्क्षहदू हाई स्कूल से स्कूङ्क्षलग पूरी करने के बाद उन्होंने हिसार की हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के स्पोर्टस कालेज से डिग्री हासिल की। सबसे पहले वे अपने पैतृक गांव चौटाला में पंचायत सदस्य बने। इसके बाद सन् 2000 में रोड़ी उपचुनाव में जीत हासिल कर पहली बार विधायक बने। इसके बाद कांग्रेस सरकार के गठन के करीब तीन माह बाद ही जनवरी 2010 में ऐलनाबाद में उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में कांग्रेस के तमाम मंत्रियों-संतरियों ने ऐलनाबाद के गांव-गांव में डेरा डाल लिया। पर इस उपचुनाव में 64,813 वोट हासिल करते हुए अभय ङ्क्षसह ने कांग्रेस के भरत ङ्क्षसह बैनीवाल को 6227 वोटों से पराजित कर जीत हासिल कर ली। इसके बाद अभय ङ्क्षसह ने 2014 के विधानसभा चुनाव में ऐलनाबाद हलके को चुना। इस बार उनके लिए चुनौती थे उनके सखा रहे और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पवन बैनीवाल। अभय ने 69 हजार 162 वोट हासिल करते हुए पवन बैनीवाल को करीब 11 हजार 539 वोट से पराजित किया। सियासत के साथ-साथ अभय चौटाला का खेलों संग खासा लगाव रहा। उन्होंने आठ बार हरियाणा की तरफ वॉलीबाल नैशनल चैम्पियनशिप में शिरकत की। देश के प्रतिष्ठित खेल संस्थान भारतीय ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष के अलावा वे साल 2000 में भारतीय बॉक्सिंग फैडरेशन के अध्यक्ष बने। भारतीय ओलम्पिक संघ एवं एशियन बॉक्सिंग फैडरेशन के उपाध्यक्ष रहे। लम्बे अरसे तक हरियाणा ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष रहने के अलावा हरियाणा बॉक्सिंग एसोसिएशन के भी अध्यक्ष रहे। उन्होंने बार्सेलोना, अटलांटा, सिडनी, एथैंस एवं ङ्क्षबङ्क्षजग में हुए ओलम्पिक गेम्स में भी शिरकत की। 
दुष्यंत चौटाला 
दुष्यंत चौटाला का सियासी सफर भी दिलचस्प रहा है। तीस वर्षीय दुष्यंत को उस समय सक्रिय सियासत में उतरना पड़ा जब जनवरी 2013 में उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला व पिता अजय ङ्क्षसह चौटाला को जेल हो गई। हालांकि दुष्यंत इससे पहले 2009 में दुष्यंत को पार्टी ने डबवाली, महेंद्रगढ़ व उचाना विधानसभाओं की जिम्मेदारी दी। इन तीनों विधानसभाओं में उस समय पार्टी को जीत मिली। अक्तूबर 2011 के हिसार संसदीय उपचुनाव में भी उनकी ड्यूटी लगी। उनके दादा व पिता को जेल हो जाने के बाद पार्टी ने दुष्यंत को हिसार जैसे संसदीय क्षेत्र में उतारा। उनके सामने थे हरियाणा जनहित कांग्रेस के कुलदीप बिश्रोई। हजकां का भाजपा संग गठबंधन था। मोदी लहर में भी दुष्यंत ने कुलदीप को करीब 31 हजार 847 वोटों से पराजित किया।  3 अप्रैल 1988 को जन्मे दुष्यंत की स्कूङ्क्षलग हिसार से हुई। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश के संावर से सीनियर सैकेंडरी की और उसके बाद कैलिफ्रोनिया स्टेट यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनस्ट्रेशन में गे्रजुएट की। सियासत के साथ खेलों में उनकी रूचि रही। वे स्कूल की बास्केट बाल टीम के कैप्टन के अलावा मुक्केबाजी के भी अच्छे खिलाड़ी रहे। 2014 में चुनावी समर में उतरने से पहले उन्होंने अनेक जिम्मेदारियां संभाली।
पिछले तीन विधानसभा चुनावों में इनैलो का प्रदर्शन
वर्ष    सीट        वोट प्रतिशत
2005    9        26.77
2009    31        25.79
2014    19        24.11


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