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नया हरियाणा

बुधवार, 11 दिसंबर 2019

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हरियाणा के लाल बंसीलाल का राजनीतिक सफरनामा

हरियाणा में इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल विकास का श्रेय बंसीलाल को जाता है. हरियाणा के विद्युतीकरण की शुरुआत बंसीलाल ने ही की थी.

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28 मार्च 2018



नया हरियाणा

चौधरी बंसी लाल एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कई लोगों द्वारा आधुनिक हरियाणा के निर्माता माने जाते हैं। उनका जन्म हरियाणा के भिवानी जिले के गोलागढ़ गांव के जाट परिवार में हुआ था। 
चौधरी बंसीलाल का जन्म 26 अगस्त 1927 को हुआ था और 28 मार्च 2006 को उनका निधन हुआ था। बंसीलाल ने पंजाब यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, जालंधर में अध्ययन किया। 1972 में, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने उन्हें क्रमशः विधिशास्त्र एवं विज्ञान की मानद उपाधि से विभूषित किया।
बंसीलाल का जन्म हरियाणा के भिवानी ज़िले में एक तत्कालीन लोहारू रियासत में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था बंसीलाल के पिता बच्चों की अधिक शिक्षा के पक्ष में नहीं थे। इसीलिए थोड़ी आरम्भिक शिक्षा के बाद 14 वर्ष की उम्र में ही बंसीलाल को अनाज के व्यापार में जोत दिया गया। पिता की अनुमति न मिलने पर भी बंसीलाल ने अध्ययन जारी रखा और 1952 तक प्राइवेट परीक्षाएँ देते हुए बी.ए. पास कर लिया। फिर उन्होंने 1956 में पंजाब विश्वविद्यालय से क़ानून की डिग्री ले ली। भिवानी में वकालत करते हुए बंसीलाल पिछड़े हुए किसानों के नेता बन गए। बंसीलाल ने कांग्रेस की अनेक स्थानीय समितियों में भी स्थान बना लिया और 31 मई 1968 को वह 41 वर्ष की आयु में सबसे कम उम्र के राज्य के मुख्यमंत्री बने, उस समय किसी ने भी, यहां तक कि उनके राजनितिक गुरुओं ने भी कल्पना नहीं की कि वह देश के सबसे शक्तिशाली राजनेताओं में से एक बन के उभरेंगे। उन्होंने हरियाणा के राजनीतिक परिदृश्य पर इतना ज्यादा प्रभाव डाला था कि वह समय समय पर नीचे जरूर जाते पर हरियाणा की राजनीती से कभी बहार नहीं हुए।
चौधरी बंसी लाल के बड़े बेटे चौधरी रणबीर सिंह महेंद्र, मुंधल निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा (2005) सदस्य रहे हैं। चौधरी रणबीर सिंह बीसीसीआई (BCCI) के एक पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं एवं चौधरी बंसीलाल के ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते, उन्हें स्वाभाविक रूप से चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत के अग्रदूत के रूप में देखा गया। वर्तमान समय बंसीलाल की पुत्रवधु किरण चौधरी हरियाणा की राजनीति में सक्रिय हैं।
 मुख्यमंत्री के रूप में हरियाणा का दी नई दिशा
बंसीलाल ने मुख्यमंत्री के रूप में हरियाणा को नई दिशा एवं ऊचाइयां प्रदान की। उन्होंने तीन अलग-अलग अवधियों: 1968-197, 1985-87 एवं 1996-99 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।  वे भगवत दयाल शर्मा एवं राव बीरेंद्र सिंह के बाद हरियाणा के तीसरे मुख्यमंत्री थे। वे 31 मई 1968 को पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने और उस पद पर 13 मार्च 1972 तक बने रहे। 14 मार्च 1972 को, उन्होंने दूसरी बार राज्य में शीर्ष पद धारण लिया और 30 नवम्बर 1975 तक पद पर बने रहे। उन्हें 5 जून 1986 से 19 जून 1987 तक एवं 11 मई 1996 से 23 जुलाई 1999 तक तीसरी और चौथी बार मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
हरियाणा में इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल विकास का श्रेय बंसीलाल को जाता है. हरियाणा के विद्युतीकरण की शुरुआत बंसीलाल ने ही की थी. पर तब तक केंद्र में स्थिति बदल गई. इंदिरा गांधी ने 1975 में देश में इमरजेंसी लगा दी. बंसीलाल इंदिरा गांधी के विश्वासपात्र माने जाते थे. जब मंत्री इंदिरा पर संदेह जताने लगे तो उन्होंने अपने सारे नजदीकियों को अपने पास बुला लिया. शुरुआत में बंसीलाल को बिना किसी विभाग का मंत्री बनाया गया. फिर उनको रक्षामंत्री का कार्यभार दे दिया गया.
आपातकाल में बंसीलाल की भूमिका
बंसीलाल को 1975 में आपातकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी का एक करीबी विश्वासपात्र माना जाता था। उन्होंने दिसंबर 1975 से मार्च 1977 तक रक्षा मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी एवं 1975 में केंद्र सरकार में बिना विभाग के मंत्री के रूप में उनका एक संक्षिप्त कार्यकाल रहा। उन्होंने रेलवे और परिवहन विभागों का भी संचालन किया। बंसीलाल सात बार राज्य विधानसभा के लिए चुने गए, पहली बार 1967 में. उन्होंने 1996 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना की।
संजय गांधी से नजदीकियां
विनोद मेहता ने ‘द संजय स्टोरी’ में लिखा है:
“1968 में ही संजय ने प्रस्ताव दिया था कि उनकी कंपनी केवल 6 हजार रुपये में ऐसी कार बनाएगी, जो 53 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी. उस बात पर जॉर्ज फर्नांडीज और मधु लिमये ने सरकार को खूब घेरा था। अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे करप्शन अनलिमिटेड कहा था. पर संजय ने अपने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा दिया। रुके नहीं। क्योंकि हरियाणा के मुख्यमंत्री बंसीलाल ने डंडे के जोर से गुड़गांव के पास संजय की कंपनी मारुति को सैकड़ों एकड़ जमीन मुहैया करा दी।
फिर संजय गांधी 5 सूत्री काम लेकर आए. एडल्ट एजुकेशन, दहेज का खात्मा, पेड़ लगाना, परिवार नियोजन और जाति प्रथा उन्मूलन. सुनने में तो ये बड़े उद्देश्य लगते थे। पर काम करने का तरीका बर्बर था। इसमें सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना थी परिवार नियोजन। इसके लिए नसबंदी का सहारा लिया गया। बंसीलाल ने अपने दोस्त को समझाने की बजाय जी-जान से इस प्रोजेक्ट में हाथ बंटाया। गांव के गांव में पुलिस घुस जाती और मर्दों को पकड़कर उनकी नसबंदी करा दी जाती। बंसीलाल पर तो पुलिस को बाकायदा टारगेट देने के इल्जाम लगे थे। सच जो भी हो, बंसीलाल पर इसका इल्जाम तो लग ही गया।”

राजनीतिक सफर
एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में, वे 1943 से 1944 तक लोहारू राज्य में परजा मंडल के सचिव थे। बंसीलाल 1957 से 1958 तक बार एसोसिएशन, भिवानी के अध्यक्ष थे। वह 1959 से 1962 तक जिला कांग्रेस कमेटी, हिसार के अध्यक्ष थे और बाद में वे कांग्रेस कार्यकारिणी समिति तथा कांग्रेस संसदीय बोर्ड के सदस्य बने। वे 1958 से 1962 के बीच पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति के सदस्य थे। वे 1980-82 के बीच संसदीय समिति और सरकारी उपक्रम समिति और 1982-84 के बीच प्राक्कलन समिति के भी अध्यक्ष थे। 31 दिसम्बर 1984 को वे रेल मंत्री और बाद में परिवहन मंत्री बने। वह 1960 से 2006 और 1976 से 1980 तक राज्य सभा के सदस्य थे। वे 1980 से 1984, 1985 से 1986 और 1989 से 1991 तक लोक सभा के सदस्य थे।
हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना
1996 में कांग्रेस से अलग होने के बाद, बंसीलाल ने हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना की एवं शराबबंदी के उनके अभियान ने उन्हें उसी वर्ष विधान सभा चुनाव में सत्ता में स्थापित कर दिया।
 

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