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नया हरियाणा

बुधवार, 24 अप्रैल 2019

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दल-बदल कानून में फंसे दुष्यंत चौटाला के नैना चौटाला समेत चार विधायक

अभय सिंह चौटाला का नेता प्रतिपक्ष का पद उन से छीन गया है। 

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27 मार्च 2019



नया हरियाणा

जननायक जनता पार्टी (जजपा) समर्थित चारों इनेलो विधायकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नैना सिंह चौटाला (डबवाली), राजदीप सिंह फौगाट (चरखी दादरी), अनूप धानक (उकलाना) और पिरथी सिंह नंबरदार (नरवाना) के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत मुकदमा चलेगा। स्पीकर कंवरपाल गुर्जर ने इन चारों के खिलाफ याचिकाओं को मंजूर कर लिया है।
अब स्पीकर कोर्ट से इन चारों विधायकों को नोटिस भेजे जाएंगे। ऐसे में दुष्यंत चौटाला के समर्थन में गए चारों विधायकों की सदस्यता रद्द हो सकती है.

इनेलो नेता केहर सिंह रावत व गंगवा के भाजपा में चले जाने के बाद अभय सिंह चौटाला का नेता प्रतिपक्ष का पद उन से छीन गया है। फतेहाबाद से इनेलो विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया ने चारों के खिलाफ स्पीकर कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। मंगलवार को पहली सुनवाई के दौरान स्पीकर ने याचिकाओं को मंजूर कर लिया और कहा कि चारों को नोटिस जारी किए जाएंगे। चारों ही विधायकों ने 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो टिकट पर चुनाव जीता था।

नैना चौटाला हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला की मां हैं और वे खुलकर जजपा के कार्यक्रमों में शिरकत कर रही हैं। दुष्यंत ने 9 दिसंबर को जींद में बड़ी रैली करके जननायक जनता पार्टी का गठन किया था। इनेलो और चौटाला परिवार में हुए बिखराव के बाद से ही ये चारों विधायक दुष्यंत चौटाला के साथ खड़े हैं। अभय चौटाला के साथ दुष्यंत का राजनीतिक विवाद अब खुलकर सामने आ चुका है।

नगेंद्र पर कार्रवाई नहीं 
अभय चौटाला जेजेपी समर्थित और भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों पर तो कार्रवाई चाहते हैं लेकिन फरीदाबाद से इनेलो विधायक नगेंद्र भड़ाना के खिलाफ वे कार्रवाई के मूड में नहीं हैं। भड़ाना तो पिछले लगभग तीन वर्षों से खुलकर भाजपा का गुणगान कर रहे हैं। वे सीएम को अपने कार्यक्रमों में भी बुलाते हैं और भाजपा के कार्यक्रमों में भी मंच साझा करते हैं। दल-बदल केस में फंसे जजपा समर्थित विधायक भड़ाना के मुद्दे पर भी अभय को लगातार घेर रहे हैं।

क्या कहता है कानून 
दल-बदल कानून के तहत कोई भी विधायक इस्तीफा दिए बिना किसी दूसरे दल में शामिल नहीं हो सकता। अगर किन्हीं कारणों से पार्टी खुद ही विधायक को पार्टी से बाहर कर दे तो उसकी सदस्यता बची रह सकती है। बिना निष्कासन के दूसरे दलों के साथ जुड़ने पर सदस्यता जाना तय है। इनेलो के चारों विधायक जजपा का समर्थन तो कर रहे हैं लेकिन उन्होंने अभी तक विधिवत तौर पर पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं की है। ऐसे में स्पीकर कोर्ट में यह मामला लम्बा चल सकता है।


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