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नया हरियाणा

मंगलवार, 18 जून 2019

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ब्राह्मण के बाद अब वैश्य समाज भी टिकटों के मैदान में उतरा, सोनीपत-हिसार से वैश्य समाज को चुनाव लड़वाने की रखी मांग

हरियाणा में लोकसभा चुनाव की टिकटों को लेकर चल रही लॉबिंग के बीच अब जातिगत समीकरण भी सामने आने लगे हैं

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26 मार्च 2019



नया हरियाणा

हरियाणा में लोकसभा चुनाव की टिकटों को लेकर चल रही लॉबिंग के बीच अब जातिगत समीकरण भी सामने आने लगे हैं. पार्टियां तो जातिगत संतुलन की कोशिश में लगी ही हुई है. लेकिन अब समाज के लोगों ने भी अपने लोगों के लिए टिकट की मांग करनी शुरू कर दी है. ब्राह्मणों के बाद अब वैश्य समाज के लोग भी टिकटों के मैदान में कूद पड़े हैं. सत्तारूढ़ भाजपा के समक्ष वैश्य समाज के अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की ओर से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखा गया है. वैश्य समाज भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता  है. हरियाणा-चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब व जम्मू कश्मीर में एक भी संसदीय क्षेत्र में वैश्य समाज के नेता को टिकट नहीं मिला है. 

2014 के चुनाव में इस अनदेखी पर सवाल उठाए गए थे. लेकिन इस बार अग्रवाल समाज के लोगों के तेवर कुछ बदले हुए हैं. चुनाव में कांग्रेस भी लंबे समय से हरियाणा में लोकसभा की 10 सीटों में से एक सीट पर वैश्य को जरूर चुनाव लड़वाती है. इस बार कुरुक्षेत्र से पूर्व सांसद नवीन जिंदल का चुनाव लड़ाया जाना तय है. जनवरी में जींद उपचुनाव के दौरान भी यह मुद्दा गरमाया था. जींद सीट को वैश्यों की सीट माना जाता है. लेकिन खट्टर सरकार ने उपचुनाव में पार्टी के तमाम वैश्य नेताओं को नजरअंदाज करके पंजाबी समाज के कृष्ण मिड्डा को चुनाव मैदान में उतारा. बेशक भाजपा ने साढ़े बारह हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की थी. लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान वैश्य समाज को मनाने में सरकार के पसीने छूट गए थे.

 इस बार अग्रवाल समाज ने सोनीपत और हिसार की सीट पर दावा किया है. वर्तमान में सोनीपत से भाजपा के रमेश कौशिक और हिसार से दुष्यंत चौटाला सांसद हैं. हरियाणा मामलों के प्रभारी अनिल जैन व सीएम मनोहर लाल खट्टर को लिखे गए पत्र में इन दोनों ही सीटों पर वैश्य समाज के लोगों को चुनाव लड़ाने की मांग की गई है.

सीएम के मीडिया एडवाइजर राजीव जैन का नाम सोनीपत के लिए बनाए गए पैनल में शामिल है. सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस सीट पर किसी जाट चेहरे को चुनाव लड़ाने का मन बना रही है. वैश्य समाज की मांग के चलते जाट को चुनाव मैदान में उतारना पार्टी को महंगा पड़ सकता है. रमेश कौशिक की जीत भी जाट और नॉन-जाट के समीकरण की वजह से ही हुई थी. तो वहीं हिसार संसदीय क्षेत्र से वैश्य समाज के ही अशोक गोयल मंगालीवाला टिकट के प्रबल दावेदारों में से एक हैं. माना जा रहा है कि नलवा से विधायक रणवीर गंगवा की भाजपा में एंट्री से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं. भाजपा गंगवा के द्वारा प्रजापति के अलावा तमाम पिछड़े वर्ग के लोगों को साधने की कोशिश करेगी.


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