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नया हरियाणा

मंगलवार, 18 जून 2019

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रोहतक लोकसभा को छोड़ने की योजना बना रहे हैं दीपेन्द्र हुड्डा!

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों से पता चला है कि कांग्रेस के इंटरनल सर्वे में रोहतक लोकसभा सीट कांग्रेस इस बार बुरी तरह हार रही है.

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8 मार्च 2019



नया हरियाणा

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों से पता चला है कि कांग्रेस के इंटरनल सर्वे में रोहतक लोकसभा सीट कांग्रेस इस बार बुरी तरह हार रही है. ऐसे में कांग्रेस रोहतक लोकसभा सीट से दीपेंद्र हुड्डा को लड़वाने को लेकर असमंजस में है. दूसरी तरफ पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा नहीं चाहते कि उनका बेटा लोकसभा का चुनाव हारे. उसकी हार के साथ ही कांग्रेस में हुड्डा की पैठ कमजोर हो जाएगी. वैसे भी रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा के अध्यक्ष अशोक तंवर व किरण चौधरी को अपने खेमे में शामिल करके संकेत दे दिए हैं कि हरियाणा की कमान अब भूपेंद्र हुड्डा के हाथ ंमें आनी असंभव लग रही है. हुड्डा लोकसभा में बेटे दीपेंद्र की जीत के माध्यम से अपना कद बढ़ाने के सपने देख रहे हैं. ऐसे में बताया जा रहा है कि भूपेंद्र हुड्डा अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को रोहतक लोकसभा के बजाय सोनीपत लोकसभा से चुनाव लड़वा सकते हैं और खुद रोहतक से चुनाव लड़ सकते हैं.

रोहतक लोकसभा में 9 विधानसभा सीटें हैं. जिनमें 2014 में दीपेंद्र हुड्डा बहादुरगढ़ और कोसली से हारे थे तथा महम, रोहतक, गढ़ी सांपला, कलानौर, बादली, झज्जर व बेरी से जीते थे. पिछले 3 लोकसभा चुनावों में जब दीपेंद्र हुड्डा की जीत हुई थी, तब वे तीनों बार मुख्यमंत्री के बेटे थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में रोहतक लोकसभा क्षेत्र की जनता ये मानकर चल रही थी कि ऊपर(लोकसभा) भले ही मोदी आ जाएगा परंतु नीचे(विधानसभा) कांग्रेस ही आएगी. कांग्रेस आने का मतलब था कि हुड्डा सीएम बनेंगे. परंतु 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन में हुड्डा गुट के शामिल होने के कारण खुद रोहतक शहर और बाकी शहरी सीटों पर हुड्डा की इमेज खराब हुई है. दूसरी तरफ बीजेपी की कार्यशैली में खासकर ईमानदारी से नौकरियां देने से हरियाणा की जनता का मन पूरी तरह से बीजेपी की तरफ झुका हुआ है. खासकर ओबीसी और एससी वोट लगभग बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो गया है. 

कोई भी नेता अपनी व्यक्तिगत छवि के भरोसे चुनाव कभी नहीं जीत सकता. पार्टी के वोट ही उसे असली जनाधार देते हैं. अब 2019 के लोकसभा चुनाव में न तो दीपेंद्र हुड्डा सीएम के बेटे हैं और न ही कांग्रेस का कोई जनाधार रहा है. ऐसे में अपने व्यक्तिगत कामों के भरोसे चुनाव जीतना किसी भी तरह संभव नहीं है. क्योंकि व्यक्तिगत काम भी बहुत सीमित हिस्से के ही हो पाते हैं. ऐसे में बहादुरगढ़, रोहतक, झज्जर, कोसली, कलानौर और बादली पूरी तरह बीजेपी के रंग में रंगी हुई है. गढ़ी सांपला व महम में ही हुड्डा परिवार अपनी मजबूत पैठ बनाए रख सकेगा. बेरी में मामला बराबरी का रहेगा.

2014 के चुनाव में

1. महम से कांग्रेस को 61982, बीजेपी को 11384

2. गढ़ी सांपला से कांग्रेस को 82564 और बीजेपी को 18671

3. रोहतक से कांग्रेस को 49379, बीजेपी को 41932

4. कलानौर से कांग्रेस को 59151, बीजेपी को 25823

5. बहादुरगढ़ से कांग्रेस को 42783, बीजेपी को 46311

6. बादली से कांग्रेस को 49637, बीजेपी को 38629

7. झज्जर से कांग्रेस को 51740, बीजेपी को 29526

8. बेरी से कांग्रेस को 55444 , बीजेपी को 26950

9. कोसली से कांग्रेस को 37220, बीजेपी को 79758

दीपेंद्र हुड्डा को 489900 वोट मिले थे

ओमप्रकाश धनखड़ को 318984 वोट मिले थे.

आखिर कांटा निकालने का मौका रणदीप सुरजेवाला को भी मिलने वाला है. जैसे जींद उपचुनाव में उनके विरोधियों को मिला था.


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