Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

शनिवार, 17 अगस्त 2019

पहला पन्‍ना सर्वे लोकप्रिय 90 विधान सभा हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप English

हरियाणा सरकार ने अंग्रेजी हुकूमत के 120 साल पुराने कानून को बदल दिया

पीएलपीए विधेयक-2019 के पास होने पर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों के हाथों खेलते रहने का आरोप लगाया है.

Haryana Government, 120 years of British rule, changed old law, PLPA Bill-2011, Manohar Lal, naya haryana, नया हरियाणा

28 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

हरियाणा सरकार ने अंग्रेजी हुकूमत के 120 साल पुराने कानून को बदल दिया. पीएलपीए यानी पंजाब भू-परिरक्षण (हरियाणा संशोधन) विधेयक-2019 को विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद विधानसभा ने पास कर दिया. कानून में हुए संशोधन के बाद अब अरावली फॉरेस्ट रेंज में भी निर्माण कार्य किया जा सकेगा. यह कानून शिवालिक की पहाड़ियों पर भी लागू होगा. फरीदाबाद की एक कॉलोनी और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के एक सेक्टर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह संशोधन किया गया है.
कांग्रेस या इनेलो के विधायकों ने इस विधेयक का जमकर विरोध किया और सरकार पर बिल्डरों के हाथों खेलने के आरोप भी लगाए गये. कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने कहा कि अरावली की पहाड़ियां दुनिया की सबसे पुरानी रेंज है. विधेयक में संशोधन के बाद इको सिस्टम पूरी तरह खत्म हो जाएगा. एनसीआर में पहले से ही अधिक प्रदूषण है और अब अरावली में निर्माण होने से हालात और अधिक बिगड़ेंगे.  उन्होंने कहा कि मैं खुद वन मंत्री रह चुकी हूं. प्रदेश में केवल 7% ही फॉरेस्ट एरिया है और अब यह भी कम हो जाएगा. सरकार को चाहिए था कि फॉरेस्ट एरिया बढ़ाती. लेकिन वह बिल्डरों के हाथों में खेलते हुए इसे और कम करने पर तुली है. वहीं जुलाना से इनेलो विधायक परमिंदर सिंह ढुल ने कहा कि सरकार यह स्पष्ट करें कि संशोधित कानून को 1966 से जो लागू किया जा रहा है. इसके पीछे सरकार का क्या उद्देश्य है. इस बदलाव के बाद अरावली को उजाड़ कर वहां बड़ी इमारतें खड़ी कर दी जाएगी. सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद फॉरेस्ट को डी- नोटिफाई कर रही है. यह बिल हर हाल में कोर्ट में चैलेंज होगा. पूरे देश में ट्री-प्रोटेक्शन एक्ट लागू है. लेकिन सरकार ने इसकी धज्जियां उड़ा दी हैं. ढुल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने बिल्डर और खनन माफिया के दबाव में यह बदलाव किया है.


बाकी समाचार