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नया हरियाणा

मंगलवार, 18 जून 2019

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किसानों को मिलेगी पेंशन, पढ़िए हिंदी में पूरा बजट

वित्त मंत्री ने पेश किया 1.32 लाख करोड़ का बजट, नहीं लगाया कोई नया टैक्स, किसानों को मिलेगी पेंशन

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25 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

हरियाणा के वित्त मंत्री के तौर पर लगातार पांचवें वर्ष बजट प्रस्तुत करते हुए मुझे बड़े गौरव का अनुभव हो रहा है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र के उद्धरण से प्रारम्भ करना चाहता हूँ –

भारतीय अर्थ-व्यवस्था का वैष्विक अर्थ-व्यवस्था में निरन्तर विशिष्ट स्थान बना हुआ है क्योंकि यह वर्ष 2018-19 में 7.2 प्रतिशत के साथ तेजी से बढ़ती हुई विश्व की प्रमुख अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक होगी। वर्ष 2019-20 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि का विश्व बैंक का आकलन 7.5 प्रतिशत तथा एशियाई विकास बैंक का आकलन 7.6 प्रतिशत है।

माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में, भारत ने तेजी से बढ़ती अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक होने तथा विश्व में एक स्थिर लोकतंत्र होने का दोहरा गौरव हासिल किया है।
हरियाणा सरकार की तरफ से, अन्तरिम बजट- 2019-20 में केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई नई योजनाओं का स्वागत करता हूँ, जिनमें हमारी अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों के लिए आय-सहायता योजना-प्रधानमंत्री-किसान योजना, हमारी अर्थ-व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण भाग माने जाने वाले असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पेंशन के रूप में आय सुरक्षा मुहैया करवाने वाली प्रधानमंत्री श्रम-योगी मानधन योजना शामिल हैं।

अग्रिम अनुमानों के अनुसार, हरियाणा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल होने की सम्भावना है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 7.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्तमान मूल्यों पर वर्ष 2018-19 के लिए हरियाणा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 7.07 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसका 188.41 लाख करोड़ रुपये के अखिल भारतीय सकल घरेलू उत्पाद में 3.75 प्रतिशत का योगदान है। वर्ष 2018-19 में स्थिर मूल्यों पर हरियाणा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 5.26 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जोकि 139.52 लाख करोड़ रुपये के अखिल भारतीय सकल घरेलू उत्पाद का 3.77 प्रतिशत है।
वर्ष 2018-19 में, स्थिर मूल्यों पर सकल राज्य मूल्य वर्धित की वृद्धि प्राथमिक क्षेत्र में 5.5 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र में 8.6 प्रतिशत और तृृतीयक क्षेत्र में 8.2 प्रतिशत अनुमानित है। इसी अवधि के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तदनुरूपी आंकड़े प्राथमिक क्षेत्र के लिए 3.3 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र के लिए 8.6 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र के लिए 7.3 प्रतिशत अनुमानित हैं।

वर्ष 2018-19 में, स्थिर मूल्यों पर सकल राज्य मूल्य वर्धित की वृद्धि प्राथमिक क्षेत्र में 5.5 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र में 8.6 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र में 8.2 प्रतिशत अनुमानित है। इसी अवधि के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तदनुरूपी आंकड़े प्राथमिक क्षेत्र के लिए 3.3 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र के लिए 8.6 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र के लिए 7.3 प्रतिशत अनुमानित हैं।
मुझे यह बताते हुए बड़ा गर्व हो रहा है कि वर्ष 2014-15 से, स्थिर मूल्यों पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 34 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि अनुमानित है। वर्ष 2017-18 में स्थिर मूल्यों पर राज्य की प्रति व्यक्ति आय 1,57,649 रुपये अनुमानित थी, जोकि वर्ष 2018-19 में 91,921 रुपये के अखिल भारतीय आंकड़े की तुलना में बढ़कर 1,68,209 रुपये होने की सम्भावना है

राजस्व घाटा, जोकि जीएसडीपी का 2.92 प्रतिशत था, वर्ष 2019-20 के लिए जीएसडीपी का 1.53 प्रतिशत अनुमानित है।
बजट अनुमान 2018-19 के 30,011.76 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की तुलना में, हम इसे संशोधित अनुमान 2018-19 में 35,040.59 करोड़ रुपये तक बढ़ाने में सक्षम हुए हैं। बजट अनुमान 2019-20 में यह और बढ़कर 37,924.09 करोड़ रुपये होने की सम्भावना है। कुल व्यय के अनुपात में, पूंजीगत व्यय 2017-18 के 22.50 प्रतिशत से बढ़कर संशोधित अनुमान 2018-19 में 29.11 प्रतिशत हो गया। बजट अनुमान 2019-20 में यह कुल बजट का 28.69 प्रतिशत बढ़ने की सम्भावना है।

वर्ष 2017-18 में, कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत 22 सार्वजनिक उपक्रमों में से 18 उपक्रमों ने शुद्ध लाभ अर्जित किया, जबकि वर्ष 2013-14 में 13 सार्वजनिक उपक्रम शुद्ध लाभ की स्थिति में थे। वर्ष 2017-18 में इन 18 उपक्रमों द्वारा अर्जित लाभ 1116.16 करोड़ रुपये था। घाटे में रहने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या वर्ष 2013-14 के 9 से कम होकर वर्ष 2017-18 में 4 रह गई। राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का सकल घाटा वर्ष 2017-18 में कम होकर 19.89 करोड़ रुपये रह गया।
इसी प्रकार, सहकारी समितियां अधिनियम, 1984 के तहत पंजीकृत 19 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने भी सुधार के लक्षण दर्शाए हैं। लाभ कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या 2013-14 में पांच से बढ़कर 2017-18 में सात हो गई और इसी अवधि के दौरान उनका लाभ 72.91 करोड़ रुपये से बढ़कर 132.20 करोड़ रुपये हो गया।

राज्यपाल के अभिभाषण पर अपने उपकार में की गई घोषणा की भावना के अनुसरण में पांच एकड़ तक की भूमि के काश्तकार किसान परिवारों और असंगठित क्षेत्र में लगे श्रमिकों के परिवारों, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये से कम है, को वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए नई स्कीमें घोशित करते हुए मुझे बड़ा गर्व हो रहा है। किसानों के मामले में यह भारत सरकार द्वारा घोषित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) स्कीम के अलावा होगी। माननीय अध्यक्ष महोदय इस बजट में इन स्कीमों के लिए 1500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

हरियाणा सरकार ने, पहली बार कॉरपोरेट सैलरी पैकेज के तहत सरकारी कर्मचारियों को कई लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से बैंकों के साथ बातचीत करके एक अनूठी पहल की है। इस योजना के तहत, कर्मचारियों की प्राकृतिक मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये देना, 50,000 रुपये की चिकित्सा सुविधा और 30 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा जैसे कई लाभ प्रदान करने के लिए चार बैंकों-एसबीआई, एचडीएफसी, पीएनबी और हरको बैंक को चुना गया है।

फण्ड्स की पार्किंग

2019-20 के लिए, 1,32,165.99 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव, जोकि बजट अनुमान 2018-19 के 1,15,198.29 करोड़ रुपये के परिव्यय पर 14.73 प्रतिशत और संशोधित अनुमान 2018-19 के 1,20,375.40 करोड़ रुपये से 9.79 प्रतिशत अधिक है। इस बजट परिव्यय में 37,924.09 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय के रूप में 28.7 प्रतिशत और 94,241.90 करोड़ रुपये के राजस्व व्यय के रूप में 71.3 प्रतिशत परिव्यय शामिल है

1.32 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट में से 46562.37 करोड़ रुपये प्रदेश में क्रियान्वित किए जा रहे 15 सतत विकास लक्ष्यों से सम्बन्धित योजनाओं के लिए आवंटित किए गए हैं।

कृषि और संबद्ध क्षेत्र

वर्ष 2018-19 में प्रथम चरण में 15,000 पंप और वर्ष 2019-20 में दूसरे चरण में 35000 पंप लगाने की योजना है। इन प्रयासों से हमारे किसान उपभोक्ता की बजाय बिजली उत्पादक और बिजली आपूर्तिकर्ता बनेंगे। राज्य सरकार ने इस वर्ष गन्ने के लिए 340 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य की घोषणा की है,जो एक बार फिर देश में अधिकतम है। पहली बार, किसानों को गन्ने की बकाया राशि के भुगतान के लिए 16 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी दी गई।

किसानों के जोखिम को कम करने के लिए, सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सफलतापूर्वक लागू किया है, जिसके तहत किसानों से लिए गए 406.27 करोड़ रुपये के प्रीमियम के विरुद्ध मुआवजे के रूप में पिछले तीन वर्षों में 1140.98 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई, जो बीमा कंपनियों को दिए गए 818.20 करोड़ रुपये के प्रीमियम से अधिक है। इसके अलावा, उदार नीति अपनाते हुए, सरकार ने प्राकृतिक आपदा से हुई फसल क्षति के लिए भी प्रति एकड़ 12000 रुपये का मुआवजा दिया है।


 
कृषि एवं सम्बद्ध गतिविधियों के लिए बजट अनुमान 2019-20 में 3834.33 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव करता हूँ, जोकि बजट अनुमान 2018-19 के 3670.29 करोड़ रुपये की तुलना में 4.5 प्रतिशत की वृद्धि है। इसमें कृषि क्षेत्र के लिए 2210.51 करोड़ रुपये, पशुपालन के लिए 1026.68 करोड़ रुपये, बागवानी के लिए 523.88 करोड़ रुपये, और मत्स्य पालन के लिए 73.26 करोड़ रुपये का परिव्यय शामिल है।

सरकार का वर्ष 2020-21 तक 750 करोड़ रुपये की कुल लागत से शाहबाद चीनी मिल में 60 केएलपीडी का एथनोल प्लांट लगाने और सहकारी चीनी मिल पानीपत और करनाल का आधुनिकीकरण करने का प्रस्ताव है।
2019-20 के लिए 1396.21 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव जो बजट अनुमान 2018-19 के 802.07 करोड़ रुपये के परिव्यय से 74.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन

सरकार ने नम्बरदारों का मानदेय भी 1500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करने तथा उन्हें एक मोबाइल फोन देने का भी निर्णय लिया है।

कैथल, जींद और सोनीपत में आधुनिक रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। अब हम सभी जिलों और राज्य मुख्यालय तक इस पहल का विस्तार कर रहे हैं।

2019-20 में 1512.42 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव जो बजट अनुमान 2018-19 के 1053.95 करोड़ रुपये की तुलना में 43.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

शिक्षा-

2019-20 में मौलिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए कुल 12,307.46 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव करता हूँ, जो संशोधित बजट 2018-19 के 11,256 करोड़ रुपये पर 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्षाता है। उच्च शिक्षा के लिए, मैं वर्ष 2019-20 के लिए 2,076.68 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव करता हूँ, जो बजट अनुमान 2018-19 पर 17.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

तकनीकी शिक्षा-
2019-20 में तकनीकी शिक्षा विभाग के लिए 512.72 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव, जोकि संशोधित अनुमान 2018-19 के 465.70 करोड़ रुपये पर 10.1 प्रतिशत की वृृद्धि दर्षाता है।


 
खेल एवं युवा मामले-
अनुमान 2019-20 में खेल एवं युवा मामले विभाग के लिए 401.17 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करने का प्रस्ताव जोकि संशोधित अनुमान 2018-19 पर 13.9 प्रतिशत की वृृद्धि दर्शाता है।

बजट अनुमान 2019-20 में कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के लिए 680.6 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव जोकि संशोधित अनुमान 2018-19 के 547.83 करोड़ रुपये के परिव्यय पर 24.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

बिजली

वर्ष 2018-19 में, सरकार ने बिजली क्षेत्र में कई नई पहल की हैं, इनमें लम्बित बिजली बकाया की समस्या के समाधान के लिए शुरू की गई ‘बिल निपटान योजना’ शामिल है। इस योजना के तहत 20 किलोवाट तक के स्वीकृत भार वाले सभी घरेलू उपभोक्ताओं और 5 किलोवाट तक के स्वीकृत भार वाले गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के जून, 2005 से पहले के सभी लम्बित बिल माफ कर दिए गए। 19 जनवरी, 2019 तक 13.48 लाख उपभोक्ताओं ने योजना का विकल्प चुना और 437.52 करोड़ रुपये जमा करवाए, जबकि 3808.61 करोड़ रुपये माफ किए गए तथा कुल 4246.12 करोड़ रुपये की राशि का निपटान किया गया है।

पहली बार, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी प्रदान कर बिजली की दरें घटाकर लगभग आधी की गई, इससे 41.5 लाख उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है, जो कुल घरेलू उपभोक्ताओं का 90 प्रतिशत से अधिक है। भुगतान के विभिन्न ऑनलाइन तरीकों की शुरुआत से डिजिटल लेनदेन की संख्या अप्रैल, 2018 के 43.30 लाख से बढ़कर दिसंबर, 2018 में 57.80 लाख हो गई है।

सरकार ने 31 दिसंबर, 2018 तक प्राप्त 85,000 लम्बित आवेदनों के संबंध में कनेक्शन जारी करने का निर्णय लिया है। नई नीति के तहत, 10 बीएचपी तक के आवेदकों के पास डिस्कॉम का ग्रिड कनेक्टिड बिजली कनेक्शन या हरेडा से ऑफ-ग्रिड सोलर पावर्ड कनेक्शन लेने का विकल्प होगा। यह भी निर्णय लिया गया है कि राज्य में नए नलकूप कनेक्शन अनिवार्य रूप से सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली और ऊर्जा कुशल पंप सेट के साथ दिए जाएंगे।

रोज़गार

रोजगार विभाग के लिए 365.20 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव जोकि बजट अनुमान 2018-19 के 241.44 करोड़ रुपये के परिव्यय से 51.3 प्रतिशत अधिक है।

श्रम
58.57 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव

सिंचाई एवं जल संसाधन
3,324.51 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित करता हूँ, जोकि संशोधित अनुमान 2018-19 के 3,130.63 करोड़ रुपये के परिव्यय से 6.2 प्रतिशत अधिक है।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी

3,605.32 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित जबकि वर्ष 2018-19 का संशोधित अनुमान 3,590.47 करोड़ रुपये था।
बिजली सम्प्रेषण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए, वर्ष 2019-20 में 19 सब-स्टेशन बनाने, 89 मौजूदा सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने तथा 1000 से अधिक सर्किट किलोमीटर सम्प्रेषण लाइनें बिछाने की योजना बनाई गई है।

बिजली के उचित वितरण के लिए पिछले चार वर्षों में, 33 केवी के 140 नए सब-स्टेशन स्थापित किये गए, 386 मौजूदा सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई गई और 1,555 सर्किट किलोमीटर की नई 33 केवी लाइनें बिछाई गई। वर्ष 2019-20 में, 95 नए सब-स्टेशन बनाने, 107 मौजूदा 33 केवी सब-स्टेशनों के संवर्धन तथा नई 700 किलोमीटर लम्बी 33 केवी लाइनें बिछाने की योजना बनाई गई है।

नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा

राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में जैव ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए मार्च, 2018 में एक जैव ऊर्जा नीति अधिसूचित की गई। इस नीति के तहत वर्ष 2022 तक 150 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

राज्य सरकार किसानों की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें सौर वाटर पंपिंग सिस्टम प्रदान करने की एक योजना लागू कर रही है। इस योजना के तहत किसानों को 2 एचपी और 5 एचपी के सौर वाटर पम्पिंग सिस्टम प्रदान किए जाएंगे, जिन पर 75 प्रतिशत राज्य सब्सिडी होगी तथा 25 प्रतिशत राशि उपयोगकर्ता द्वारा वहन की जाएगी।
135 सरकार की 3 एचपी से 10 एचपी क्षमता के 50,000 ऑफ-ग्रिड सोलर पंप स्थापित करने की योजना है जिसे 75 प्रतिशत राज्य सब्सिडी के साथ नाबार्ड से ऋण लेकर दो चरणों में लागू किया जाएगा। वर्ष 2018-19 में प्रथम चरण में 15,000 पंप और वर्ष 2019-20 में दूसरे चरण में 35000 पंप लगाने की योजना है।
बिजली विभाग के 12988.61 करोड़ रुपये और नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के लिए 475.91 करोड़ रुपये का आवंटन करता हूँ।

शहरी स्थानीय निकाय

शहरी स्थानीय निकाय शहरी क्षेत्रों में स्वशासन, भौतिक आधारभूत संरचना तथा नागरिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण संस्थान है। सरकार ने 2018-19 में पांच नई नगरपालिकाएं नामतः कुण्डली, सढ़ौरा, बास, इस्माइलाबाद और सिसाय अधिसूचित की हैं। तीन चयनित शहरों फरीदाबाद, करनाल और गुरुग्राम में स्मार्ट सिटी परियोजना क्रियान्वित की जा रही है।

अटल पुनरुत्थान और शहरी परिवहन (अमरूत) के तहत हरियाणा के 18 कस्बों के लिए भारत सरकार ने 2,565.74 करोड़ रुपये की राज्य वार्षिक कार्य योजना स्वीकृत की है। इसमें से 2,274.50 करोड़ रुपये की लागत के 41 कार्य आवंटित कर दिए गए हैं। राज्य ने सरल पोर्टल पर 120 सेवाएं ऑनलाइन शुरू की हैं, 70 से भी अधिक सेवाएं प्रक्रियाधीन हैं और 50 अन्य सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। हरियाणा की सभी पालिकाओं की 2019-20 के लिए 3994.95 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें)

3626.21 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित करता हूँ, जोकि बजट अनुमान 2018-19 के 3169.70 करोड़ रुपये की तुलना में 14.4 प्रतिशत अधिक है।

नागरिक उड्डयन
214.10 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव , जोकि संषोधित अनुमान 2018-19 के 141 करोड़ रुपये के परिव्यय से 51.9 प्रतिषत अधिक है।


 
उद्योग एवं वाणिज्य
406.72 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव जोकि बजट अनुमान 2018-19 में 399.86 करोड़ रुपये था।

नगर एवं ग्राम आयोजना

1,873.79 करोड़ रुपये का परिव्यय आवंटित किया गया है, जोकि संशोधित अनुमान 2018-19 के 1,364.24 करोड़ रुपये के परिव्यय से 37.4 प्रतिशत अधिक है।

सूचना, जन सम्पर्क एवं भाषाएं

सरकार ने 60 वर्ष से अधिक की आयु वाले तथा 20 वर्ष से अधिक के अनुभव वाले मान्यता प्राप्त मीडिया कर्मियों को 10,000 रुपये की मासिक पेंशन प्रदान करने के लिए एक योजना लागू की है। इस योजना के तहत 118 मीडिया कर्मियों की पेंशन स्वीकृत की जा चुकी है। मान्यता प्राप्त मीडिया कर्मियों के लिए 5 से 20 लाख रुपये तक का सावधि/समूह बीमा शुरू किया गया है। ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के तहत मान्यता प्राप्त मीडिया कर्मियों को 5 लाख रुपये का कैशलेस मेडिक्लेम देना शुरू किया गया है। मीडिया कर्मियों की सुविधा के लिए प्रदेश के सभी जिलों में कंप्यूटर और अन्य सम्बद्ध बुनियादी ढांचे से युक्त हाइटेक मीडिया सेंटर स्थापित किए गए हैं।

हिंदी आंदोलन, 1957 के मातृभाषा सत्याग्रहियों को 10,000 रुपये की मासिक पेंशन देने की योजना भी शुरू की है। इस स्कीम के तहत 206 सत्याग्रहियों को पेंशन का लाभ मिल रहा है।

वर्तमान सरकार हरियाणा को फिल्म-संबंधी गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने के कार्य में लगी हुई है। प्रदेश को फिल्म अनुकूल राज्य बनाने के लिए एक फिल्म नीति लागू की गई है।

विभाग के लिए 216.96 करोड़ रुपये का परिव्यय आवंटित किया गया है।

गृह ग्रामीण विकास

महात्मा गांधी राष्ट्रिय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (मनरेगा) के तहत पहली अप्रैल, 2018 से, इस स्कीम में लगे श्रमिकों को न्यूनतम 281 रुपये की दिहाड़ी दी जाती है। चालू वर्ष के दौरान (21 जनवरी, 2019 तक) 292.59 करोड़ रुपये खर्च करके 55.42 लाख मानव दिवस सृजित किये गये हैं। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों के लिये 25.06 लाख मानव दिवस और महिलाओं के लिये 27.34 लाख मानव दिवस सृजित किये गये।

विकास एवं पंचायत विभाग

816.91 करोड़ रुपये का और विकास एवं पंचायत विभाग के लिए 4,377.25 करोड़ रुपये का परिव्यय शामिल है।

परिवहन
2605.00 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव करता हूँ।

सैनिक एवं अर्ध-सैनिक विभाग कल्याण के लिए 211.30 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित है जो बजट अनुमान 2018-19 के 128.81 करोड़ रुपये से 64.0 प्रतिशत अधिक है।


 
अनुसूचित जातियों एवं पिछड़े वर्गों का कल्याण तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

अनुसूचित जातियों एवं पिछड़े वर्गों के कल्याण तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता क्षेत्र के लिए 7199.32 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव करता हूँ, जोकि संषोधित अनुमान 2018-19 के 6348.62 करोड़ रुपये की तुलना में 13.4 प्रतिशत की वृृद्धि दर्शाता है।

महिला एवं बाल कल्याण विभाग

1504.98 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव करता हूँ, जोकि संशोधित अनुमान 2018-19 के 1317.10 करोड़ रूपये के परिव्यय से 14.3 प्रतिशत अधिक है।

सैनिक एवं अर्ध-सैनिक कल्याण

यह बड़े गर्व की बात है कि देश में हर दसवां जवान हरियाणा राज्य से है। युद्ध में शहीद हुए वीरों के 63 आश्रितों को वर्ष 2018-19 के दौरान सरकारी नौकरियां दी गई हैं। सरकार प्रतिरक्षा कार्मिकों, अर्ध-सैनिक बलों, भूतपूर्व सैनिकों और युद्ध विधवाओं को सभी अनुदानों की समय पर अदायगी सुनिष्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। शहीदों के परिवारों की सहायता के लिए पिछले चार वर्शों में शहीदों के आश्रितों को 273 नौकरियां दी गई हैं। वन रैंक वन पेंशन प्रदान करने के लिए तथा वन रैंक वन पेंशन के विरूद्ध वयोवृद्ध सैनिकों के खाते में 35,000 करोड़ रुपये जमा करवाने के लिए भारत सरकार का धन्यवाद भी करता हूँ। मैं, नई दिल्ली में इंडिया गेट पर राष्ट्रिय युद्ध स्मारक बनाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूँ। भूतपूर्व सैनिकों की यह युद्ध स्मारक बनाने की चिरलम्बित मांग थी। आजादी के बाद यह पहला युद्ध स्मारक है।

आबकारी एवं कराधान – जीएसटी

हरियाणा ने जीएसटी, जिसने ‘एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर’ की अवधारणा को वास्तविकता बना दिया है, की कार्यान्वयन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की है और देश के शीर्ष राजस्व संग्रहकर्ताओं में अपनी जगह बनाई है।

जीएसटी व्यवस्था के तहत केंद्र और राज्य के बीच करदाताओं के विभाजन के प्रथम दौर को अंतिम रूप दिया गया है। कुल 4.46 लाख करदाताओं में से, राज्य का 3.07 लाख करदाताओं पर और केंद्र का 1.38 लाख पर नियंत्रण है।
प्रदेश में जीएसटी लागू होने के बाद, पूर्ववर्ती वैट/सीएसटी अधिनियमों के तहत पंजीकृत कुल 2.18 लाख डीलरों ने 31 दिसंबर, 2018 तक जीएसटी को अपनाया है। इसके अलावा, 2.28 लाख से अधिक डीलरों ने इस अधिनियम के तहत पंजीकरण कराया है, जिससे प्रदेश के राजस्व में वृद्धि हुई है। इसके अलावा, विभाग द्वारा समय-समय पर बाजार सर्वेक्षण करवाया जा रहा है और 31 दिसंबर, 2018 तक 2,809 गैर-कार्यात्मक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का पंजीकरण रद्द किया गया है।

अप्रैल, 2018 में ई-वे बिल के कार्यान्वयन के बाद दिसंबर, 2018 तक 4 करोड़ से अधिक ई-वे बिल सृजित किए गए हैं। वर्तमान में हरियाणा प्रतिदिन औसतन एक लाख ई-वे बिलों के सृजन के साथ, ई-वे बिल सृजन में देश में चैथे स्थान पर है।

प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी)

प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के तहत हरियाणा में 61 केन्द्र प्रायोजित योजनाएं तथा 74 राज्य योजनाएं चलाई जा रही हैं। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान छद्म लाभार्थियों को निकालने के परिणामस्वरूप 258.98 करोड़ रुपये की बचत हुई है। वित्त वर्ष 2014-15 से 2018-19 तक (दिसम्बर, 2018 तक) कुल 1177.20 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इसके अलावा, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के तहत सभी योजनाओं में दिसम्बर, 2018 तक 3088.87 करोड़ रुपये का नोशनल लाभ हुआ है, यदि छंटनी किए गए लाभार्थी वर्ष 2014-15 से निरंतर सम्बन्धित योजनाओं में बने रहते तो यह लाभ नहीं होना था।

सरकारी कर्मचारी और नौकरियां

हरियाणा पहली जनवरी, 2016 से अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने वाला अग्रणी राज्य है, जिससे लगभग 2300 करोड़ रुपये वार्षिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है।

सरकार ने 46 निगमों, बोर्डों और सहकारी संस्थानों के कर्मचारियों के लिए भी पहली जनवरी, 2016 से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की हैं, जिससे लगभग 287 करोड़ रुपये वार्षिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है।

इसके अलावा, भत्ता पुनरीक्षण समिति की सिफारिशों पर, सरकार ने मई 2018 से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार दस भत्तों को संशोधित किया, जिससे 800 करोड़ रुपये वार्षिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा।

लगभग 56,000 युवक-युवतियों को पारदर्शी ढंग से योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियों के लिए चुना गया है। सरकारी क्षेत्र में सर्वाधिक युवाओं को न केवल संख्या में बल्कि गुणवता में योग्यता के आधार पर नौकरियां देने का इतिहास रचा गया है। इसके अलावा, लगभग 17,000 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है, जिसके शीघ्र ही पूरा होने की संभावना है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का हाल ही में लिया गया निर्णय राज्य सरकार की एक और प्रमुख पहल है।

राजस्व प्राप्ति

वर्ष 2019-20 के लिए किसी नये कर का प्रस्ताव नहीं किया है, लेकिन मुझे विश्वास है कि कर और गैर-कर राजस्व प्राप्तियों की बेहतर वसूली के जरिए वर्ष 2019-20 में 82,219.41 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति होगी, जबकि संशोधित अनुमान 2018-19 में प्राप्तियां 76,828.11 करोड़ रुपये थीं। इसमें राज्य की स्वयं की 51,105 करोड़ रुपये की कर राजस्व प्राप्तियां और 10,024.95 करोड़ रुपये की गैर-कर राजस्व प्राप्तियां शामिल हैं।

कर राजस्व के प्रस्तावित प्रमुख स्रोतों, जीएसटी से 22,750 करोड़ रुपये, वैट से 10,900 करोड़ रुपये, आबकारी षुल्क से 7000 करोड़ रुपये और स्टाम्प एवं पंजीकरण से 6500 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। गैर-कर प्राप्तियों में ईडीसी से 3500 करोड़ रुपये, परिवहन से 2000 करोड़ रुपये और खनन से 800 करोड़ रुपये शामिल हैं।

कर प्रस्ताव:

मैं कौटिल्य के कथन का उल्लेख करना चाहता हूँ-
‘‘कर लेने वाले को करदाता से उसी कुशलता से कर लेना चाहिए जैसे एक मधुमक्खी फूल पर बैठकर उससे पराग लेती है और फूल का कुछ भी नहीं बिगड़ता।‘‘

इसी भावना के अनुरूप, पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी मैं, न तो हरियाणा मूल्य वर्धित कर (एचवीएटी) अधिनियम, 2003 के तहत करों की वर्तमान दरों में कोई परिवर्तन करना चाहता और न ही विŸाीय वर्ष 2019-20 के इन बजट अनुमानों में किसी नये कर का प्रस्ताव करता हूँ।


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