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नया हरियाणा

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

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हस्तकला और दस्तकारी के नमूने अन्य स्थानों पर दूर-दूर तक पहुंचाए जाने की जरूरत है-अनिल विज

मेलों में एक दूसरे की सभ्यता, संस्कृति, आचार-व्यवहार तथा जीवन शैली को देखने और समझने का मौका भी मिलता है।

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23 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

भारतीय समाज और संस्कृति में मेले मिलन का केंद्र होते है, मेलों में एक दूसरे की सभ्यता, संस्कृति, आचार-व्यवहार तथा जीवन शैली को देखने और समझने का मौका भी मिलता है। मेले सामाजिक व्यवस्था के परिचायक माने जाते है। ऐसे मेले हस्तशिल्पियों, बुनकरों व उद्यमियों को अपने द्वारा तैयार सम्मान को बेचने का मंच भी देते हैं। यह बात हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने  दीपशिखा प्रज्ज्वलित करके सरस मेले की शुरूआत की। दीपशिखा प्रज्ज्वलन के समय धीमी-धीमी अध्यात्मिक धुन बज रही थी जो बहुत मनमोहक लग रही थी। उन्होंने  प्रतिभागियों को स्मृतिचिन्ह भेंट करके प्रोत्साहित किया। 

 स्वास्थ्य मंत्री  ने कहा कि मेले में सैल्फ हैल्प ग्रुप, कुटीर उघोग, हस्तशिल्प, हस्तकरधा, घर और गांव में बनने वाली वस्तुएं इसलिए भी प्रदर्शित की जा रही हैं ताकि उन्हें स्वयं द्वारा बनाया गया सामान बेचने के लिए बाजार मिल सकें। ऐसे स्थानों पर वस्तुओं को बनाने वाले लोगों को उनकी मेहनत का मूल्य भी मिलता है तथा वह अपनी संस्कृति का परिचय भी देते हैं।    अपनी अभिव्यक्ति में उन्होंने आगे बताया कि मेले में 22 राज्यों से सैल्फ हैल्प ग्रुप, कुटीर उघोग, हस्तशिल्प, हस्तकरधा, फनकार और कलाकार आए हैं। इस मेले में सम्पूर्ण भारत वर्ष का लघु रूप का दर्शन हो रहा है। मेले भारत वर्ष की धरोहर तथा पहचान है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां पर विविधता में एकता के सांस्कृतिक रंग और जीवन शैली देखने को मिलती है। 

हस्तकला और दस्तकारी के नमूने अन्य स्थानों पर दूर-दूर तक पहुंचाए जाने की जरूरत है ताकि कौशल मिशन को और बढ़ावा मिल सके।  कलाकरों की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए मंत्री ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से मानसिक तनाव तो दूर होता ही है साथ ही कुछ नया करने की सीख भी जहन से निकलती है ! मेले में लगे स्टालों का निरीक्षण किया तथा स्टाल लगाने वाले उद्यमियों से खुलकर  बातचीत की। मेले में पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, असम, झांरखंड, हरियाणा, गुजरात, सहित अन्य राज्यों के उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टालों पर गए तथा उद्यमियों द्वारा बेचे जा रहे समान की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि वे सामान बेचने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक मूल्यों को भी सांझा करें। उन्होंने कहा कि मेले में जब भी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाए तो उन्हें भी अवश्य बुलाया जाए चूंकि पंतगबाजी में वे खुद भी हिस्सा लेना चाहते हैं।


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