Hindi Online Test Privacy Policy | About Us | Contact

नया हरियाणा

गुरूवार, 20 जून 2019

पहला पन्‍ना English सर्वे लोकप्रिय हरियाणा चुनाव राजनीति अपना हरियाणा देश शख्सियत वीडियो आपकी बात सोशल मीडिया मनोरंजन गपशप

मातृभाषा दिवस : कब मिलेगा हरियाणवी को भाषा का दर्जा!

मातृभाषा वह जो हम अपने घर , आम बोलचाल में इस्तेमाल करते हैं, जिसे देशी में कहे तो माँ-बोली|

When will you get Haryanvi language status, naya haryana, नया हरियाणा

21 फ़रवरी 2019



राकेश सांगवान

अंतरार्ष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है | मातृभाषा वह जो हम अपने घर , आम बोलचाल में इस्तेमाल करते हैं, जिसे देशी में कहे तो माँ-बोली| हमारे संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार हिंदी हमारी राजभाषा है , और संविधान के आठवीं अनुसचि में सम्मिलित सभी भाषाए इसके समकक्ष हैं | इस अनुसचि में 22 के करीब भाषाएँ सम्मिलित हैं |

हरियाणवी भाषा को भी आठंवी अनुसूची में शामिल करने के लिए समय-समय पर मांग उठती रही है | इसके लिए कुरुक्षेत्र से संसाद रहे नवीन जिंदल व रोहतक से सांसद दीपेन्द्र हुड्डा भी संसद में आवाज़ उठा चुके हैं | सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने संसद में इसके लिए अपनी दलील रखते हुए कहा कि “ हरियाणवी भाषा का पौराणिक इतिहास रहा है | सदन को हरियाणवी भाषा के पौराणिक इतिहास से भी अवगत करवाते हुए हरियाणवी भाषा के उद्गम को लेकर शिव-पार्वती का किस्सा भी सुनाया | उन्होंने कहा कि अज भी हरियाणवी भाषा देश कि सभी सीमाओं पर बोली जाती है क्योंकि हर दसवां सैनिक हरियाणा से आता है | उन्होंने आगे कहा कि पुरे देश का एक-तिहाई अनाज हरियाणा का किसान देता है , यह गरीब-मजदूर-व्यापारी की भाषा है जिसमें से खेत-खलिहानों की खुशबु आती है | हरियाणवी भाषा के एतिहासिक पहुलओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत कवी निश्चल दास , गरीबदास हरियाणवी , महाकवि सूरदास हरयाणवी बृज , अहमद बक्श , मेरठ निवासी शंकरदास , पंडित लख्मीचंद , मांगेराम , मेहर सिंह , बाजे भक्त , नांदल आदि कवियों , साहित्यकारों ने हरियाणवी में पिछले 400 वर्षों से इस भाषा में साहित्य का काम किया है | उन्होंने कहा कि हरियाणा को हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साढ़े चार करोड़ लोग बोलते हैं | अपने पाकिस्तान दौरें का जिक्र करते हुए बताया कि पाकिस्तान में उनके हरियाणा के जुड़े होने के कारण उनसे पाकिस्तान के लोगों ने हरियाणवी में बात की | उन्होंने कहा कि यह कमाल बात है कि हरियाणा में हरियाणवी , बीच में (पंजाब) पंजाबी और फिर पाकिस्तान में जाकर दुबारा हरियाणवी शुरू हो जाती है | इस तरह यह केवल भारत की ही नहीं , यह एक अंतरराष्ट्रीय भाषा है |

पिछली राज्य सरकार द्वारा भी हरियाणवी भाषा को आठवीं सूचि में शामिल करने के लिए बात कही गई थी | हरियाणा साहित्य अकादमी की 33 वीं बैठक में हरियाणा ग्रन्थ अकादमी को अलग दर्जा देने की स्वीकृति प्रदान की गई ताकि हरियाणा में उपलब्ध प्राचीन ग्रंथों को संजोकर रखने के साथ-साथ उनका प्रकाशन व अनुवादन किया जा सके | इस बैठक में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा भी हाजिर थे |

किसी भी भाषा-बोली के प्रचार में उस बोली के स्थानीय कलाकारों – साहित्यकारों की बहुत अहम् भूमिका होती है | पंजाबी का उदहारण ले तो इस बोली के प्रचार में इस बोली के साहित्यकरों व कलाकारों का बहुत बड़ी भूमिका है | इस बोली के गायकों जैसे कि लालचंद यमला जट , कुलदीप मानक , गुरदास मान , चमकीला , सुरेन्द्र कौर आदि सबकी बहुत बड़ी भूमिका है | हरियाणवी बोली के साथ बहुत बड़ी त्रासदी हुई कि मेहर सिंह , बाजे भक्त , लख्मीचंद , मांगेराम आदि के बाद इस बोली को कोई ढंग का गायक – सांगी नहीं मिला | बाद के जो हुए उन्होंने हरियाणवी कला जैसे कि रागनी व सांग में फूहड़ता ला दी जिस कारण आम हरियाणवी इनसे कटता चला गया | और हरियाणवी के पतन में रही सही कसर पूरी की हरियाणा में बसने वाले बाहरी लोगों ने | मुझे ध्यान है नब्बे के दशक चैनल-V पर एक उदम सिंह नाम का पात्र आता था | इस पात्र को निभाने वाला शक्श जानीमानी फिल्म अभिनेत्री व डायरेक्टर पूजा भट्ट का पति मनीष मखीजा होता था | मनीष मखीजा ने इस पात्र में हिरयाणा और हरियाणवी की उलट ही तस्वीर पेश की | इसमें मनीष ने दिखाया कि हरियाणा का आदमी अनपढ़ गंवार होता है उसे बोलने की कोई खास तहजीब और तमीज नहीं होती | इसमें वह अक्सर दिखाता कि हरियाणवी उदम सिंह अपनी भैंस को लेकर फाइव स्टार होटल के स्विमिंग पूल में पहुँच जाता है कि इसे यही नह्लौंगा | मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा ? ऐसे कुछ उसने गाने के बोल बना रखे थे | मतलब कि इसके अनुसार हरियाणवी आदमी निरा पाली होता है | हालाँकि , बताया ये जाता था कि मनीष मखीजा भी हरियाणा का रहने वाला है और रोहतक जिले के कलानौर से है | पर इसकी हकीकत ये है कि मनीष मखीजा मूलरूप से हरियाणवी भाषी नहीं है , वह मुलतानी या झांगी भाषी है , और शायद इसीलिए उसने हरियाणवी बोली का मखौल अपना पेशा बनाया | सिर्फ मनीष मखीजा ही नहीं, आज बोलीवूड में जब भी हरियाणा या हरियाणवी बोली का इस्तेमाल होता है तो वह हमेशा नेगेटिव ही होता है | हरियाणवी बोली को फूहड़ बोली , अक्खड़ बदमाश आदमी की बोली दिखाएंगे | इन लोगों के इस दुष्प्रचार के कारण ही ये असर है कि दिल्ली जोकि हरियाणवी भाषी क्षेत्र है , इस हरियाणवी गढ़ में ही हरियाणवी भाषी लोगों को बाहरी लोग घोड़ू बोलते हैं | और हरियांवियों को यह घोड़ू शब्द देने वाले भी मनीष मखीजा जैसे ही है |

जैसा कि ऊपर लिखा है कि किसी भी बोली के प्रचार में उस बोली के स्थानीय कलाकारों की अहम् भूमिका होती है | जो हरियाणवी बोली बिलकुल ही पतन के कगार पर पंहुचा दी थी , जिसको घर से बाहर बोलने में खुद हरियाणवी ही शर्म मानने लगे थे उसके उत्थान में हमारे बहुत से नए कलाकार अच्छा प्रयास कर रहें हैं | हरियाणवी बोली और कला में नई जान डालने का श्रेय मैं सपना चौधरी को देता हूँ | हालाँकि , सपना चौधरी का जो अंदाज रहा उसकी बहुत आलोचना हुई पर ये बात माननी पड़ेगी कि उसके इस अंदाज के कारण आज हरियाणवी गाने हरियाणा से बाहर कानपूर , मध्यप्रदेश तक बज रहें हैं | अब यह आगे के कलाकारों पर है कि वह हरियाणवी गानों की क्वालिटी अच्छी रखें ताकि हमारी हरियाणवी बोली भी सिर्फ देश ही नहीं विदेशों तक गुन्जें | अभी हाल में कुछ हरियाणवी गायकों व लेखकों ने कुछ अच्छे गाने लिखे व गाये हैं जिनकी गूंज दुसरे प्रदेशों व विदेशों तक सुनी | इसके लिए विक्की काजल , राममेहर महला , अजय हुड्डा , गजेन्द्र फोगाट , हरेन्द्र मलिक , अन्नू कादियान , जांगड़ा , फाजिलपुरिया (राहुल यादव) , ललित शोकीन , रितु-विकास श्योराण आदि कई कलाकार हैं जो बहुत ही अच्छा काम कर रहें हैं , और उम्मीद हैं कि ये सभी हमारी हरयाणवी माँ बोली को और ऊँचाइयों तक ले जायेंगे | साथ ही मैं हमारे हरियाणा के नेताओं से दरख्वास्त करता हूँ कि वे लोग हरियाणवी बोली को आठवीं सूचि में शामिल करवाने का हर संभव प्रयास करें | माँ-बोली हमारी पहली पहचान होती है , जिसको अपनी पहली पहचान पर फक्र नहीं उसका जीवन नीरस है |


बाकी समाचार