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नया हरियाणा

रविवार, 16 जून 2019

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मंत्री राव नरबीर सिंह ने किया हिसार में सड़क घोटाला!

इससे पहले इन पर फर्जी डिग्रियों का भी आरोप लग चुका है।

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21 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

हरियाणा की  पीडब्ल्यूडी  मंत्री नरबीर सिंह पर पहले फर्जी डिग्रियों के आरोप लग चुके हैं, इस बार इन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। आरटीआई कार्यकर्ता हरिंदर ढीगरा ने प्रेसवार्ता कर बताया कि उन्होंने 2017 में मंत्री राव नरबीर की शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मांगी थी। उन्हें सूचना नहीं मिली और प्रथम अपील दाखिल करनी पड़ी। 1 दिसंबर 2018 को उन्हें राव नरबीर के शपथ पत्रों और शैक्षणिक योग्यता की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया है कि राव नरबीर ने झूठे शैक्षणिक पत्र दाखिल किए इसलिए उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग को उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है। 
ढींगरा ने बताया कि राव नरवीर ने 2005, 2009 और 2014 में चुनाव लड़े और शपथ पत्र दाखिल किए। उन्होंने 2005 में शपथपत्र दाखिल किया कि 10वीं की पढ़ाई 1976 में माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से की है। 2009 के चुनाव में शपथ पत्र दाखिल किया कि उन्होंने 10वीं बिरला विद्या मंदिर, नैनीताल से की है। उन्होंने 1986 में हिंदी साहित्य में हिंदी विश्वविद्यालय, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से ग्रेजुएशन करने की बात कही है। ढींगरा ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में राजस्थान प्रदेश बनाम सरदार शहर एवं अन्य की सुनवाई करते हुए कहा था कि हिंदी साहित्य सम्मेलन को विश्वविद्यालय या बोर्ड की मान्यता नहीं है। 1997 में राम भगत शर्मा बनाम हरियाणा राज्य के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने साफ किया था कि यह विश्वविद्यालय अमान्य है। इससे डिग्री लेकर सरकारी नौकरी लगे लोगों को हटाया जाए। 

मीडिया मित्रों और राजनीतिक गलियारों में ये चर्चाएं चली हुई हैं कि मुख्यमंत्री के खासमखास मंत्री राव नरबीर सिंह ने अफसरों के साथ मिली भगत करके हिसार में बड़ा घोटाला किया है। बताया जा रहा है कि हिसार से तोशाम के लिए जिस रोड का टेंडर हुआ है उसमें बड़ी धांधली की गई है। मंत्री और अफसरों ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया है। इस रोड की अनुमानित लागत करीब 9 करोड़ रुपए बताई जा रही है। जिसका टेंडर मंत्री की चहेती कंपनी हरियाणा कंस्ट्रक्शन कपंनी को दिया है। इसके कंपनी को कंट्रेक्टर घोटिया बताे जा रहे हैं।  नियमों से खिलवाड़ करते हुए सिंगल टेंडर कंपनी को टेंडर दे दिया गया है। जबकि दूसरी कंपनी के टेंडर को भीतर खाने में रद्द कर दिया गया। दूसरा बड़ा घोटाला इसमें यह किया है कि टेंडर की आखिरी डेट को अगले दिन सुबह 10:30 बजे तक एक्टेंड किया गया, जबकि नियमानुसार एक्सटेंड नहीं कर सकते या करते हैं तो कम से कम 24 घंटे के लिए करते हैं. नियमों को ताक पर रखकर उस कहावत को चरितार्थ किया गया है कि घर की बही लिखणिया काका। मंत्री राव नरबीर सिंह और उनके चहेते एससी हिसार नरेश कुमार तोमर ने हरियाणा सरकार को अपने घर की बही समझ रखा है।

एक तरफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल ईमानदारी के कलमें पढ़ते-गाते हुए नहीं थकते, दूसरी तरफ उनके चहेते मंत्री सड़क में घोटाले करने से नहीं चूक रहे हैं। वहीं हरियाणा के सबसे जागरूक और चौकन्ना रहने वाले सांसद दुष्यंत चौटाला की छाती के नीचे इतना बड़ा घोटाला हो गया और उन्हें भनक तक नहीं लगी। ऐसा कैसे संभव हो सकता है। क्या इस घोटाले में सभी मिले हुए हैं या अभी यह घोटाला उजागर होने की बांट जोह रहा है।
 


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