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नया हरियाणा

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

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विद्याअंतरिक्ष स्कूल है एक अनूठा और प्रकृति प्रेमी स्कूल

यह स्कूल सच्चे अर्थों में कर्मयोगी और प्रकृतिप्रेमी बनाता है.

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22 फ़रवरी 2018

धर्मेंद्र कंवारी

पोस्ट में एक फोटो है जिसे देखकर आप अंदाजा नहीं लगा पाएंगे कि इन पेडों के नीचे एक बेहद खुबसूरत स्कूल है। प्रकृति की ठीक गाेद में बैठकर पढते हैं बच्चे यहां और हर बच्चे के नाम का एक पेड भी है स्कूल में। वो भी तब जब यहां ना सप्लाई का पानी है और ना ही जमीन का। टैंकर और पसीने से लाई गई हरियाली है ये... है ना लाजवाब।

पिछले दिनों भिवानी के चांग स्थित विद्याअंतरिक्ष स्कूल में जाना हुआ। स्कूल की कुछ बातें दिल को छू गई जो आपसे सांझा करने का मन है। हरियाली के लिए इस स्कूल ने जो काम किया है वो अपने आप में अनोखा है इसके लिए साधुवाद। यहां एक परंपरा है कि स्कूल में जो भी गेस्ट आता है वो एक पेड़ गोद लेता है। अब मेरा भी यहां एक पेड है और उसका नाम मैंने चिंटू रखा है। इसी तरह सब बच्चों के एक पेड हैं यहां जो उनके अपने है। प्रकृति से जुडाव का अनोखा जरिया है यहां। फोटो में आप स्कूल के आसपास की दूसरी जमीन देख सकते हैं और स्कूल की हरियाली को देखें कितना कठिन रहा होगा ना इस हरियाली को इस धरा पर उतारना।

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-अब बात करते हैं यहां की कैंटिन की, अन्य स्कूलों की कैंटिन की तरह यहां पैटिज बर्गर सैंडविच नहीं मिलते हैं। केवल फू्ट चाट, स्प्राऊट और टमोटो सूप। तीनों में से कोई भी लो बच्चे के लिए दाम केवल दस रुपये। क्वालिटी ऐसी की बस खाते रह जाइए। लो प्रोफिट, नो लॉस मोड पर ये चलती है अब तो बच्चे अपनी मम्मी के लिए भी यहां से सूप ले जाते हैं। पहले शिकायत करने वाले बच्चे अब जमकर इस कैंटिन का मजा लेते हैं। मैंने भी लिया अब भी स्वाद जीभ पर बरकरार है।

अब बात करते हैं यहां की पढाई की। रिपोर्ट कार्ड के इस स्कूल में कोई मायने नहीं। बच्चों को पढाने से ज्यादा सिखाने पर जोर रहता है। हर बच्चा सप्ताह में दो दिन तो स्टेज पर बोलता ही बोलता है, इसका असर बच्चों के आत्मविश्वास पर साफ दिखाई देता है। हर बच्चा दमकता चेहरा है इस स्कूल में आत्मविश्वास से भरा। ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों की भी इस तरह परवरिश होता देखकर दिल को जो सुकून मिला है वह बयां नहीं कर पा रहा।

इसके अलावा भी बहुत सारी बातें हैं, अमित जी और आरती जी के इस स्कूल के संघर्ष की, इसे बनाने की और सफरनामे की। कभी आप उधर से निकले तो टमाटो सूप पीते हुए खुद जीकर देखें। मुझे स्कूल में बुलाने और इतनी सारी चीजें सिखाने के लिए विद्याअतंरिक्ष परिवार का आभार। इन्होंने मुझे स्मृति के रूप में जो अब्राहम लिंकन का पत्र दिया है जिसे शिक्षक गीता नाम से भी पुकारा जाता है उसे मैंने ठीक अपनी नजरों के सामने रखा है ताकि यादें बनीं रहें। बैचैन जी मिले यहां वो भी खुशी देने वाले पल थे.


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