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नया हरियाणा

गुरूवार, 3 दिसंबर 2020

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जींद के बाद रोहतक और हिसार लोकसभा पर बीजेपी की है खास नजर

जींद में बीजेपी ने पहली जीत दर्ज की है और हिसार में भी पहली जीत दर्ज के लिए रणनीति बना रही है.

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15 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

हिसार की स्थापना सन् 1354 में तुगलक वंश के शासक फिरोज शाह तुगलक ने की थी. उस समय तुगलक ने इसका नाम हिसार-ए-फिरोजा रखा था. उसके बाद अकबर के शासन में इस शहर के नाम से फिरोजा हटा दिया गया और फिर केवल हिसार रह गया. इतिहास के आईने से देखें तो हिसार पर कई साम्राज्यों का शासन था. तीसरी सदी ई. पू. में मौर्य राजवंश, 13वीं सदी में तुगलक वंश, 16वीं सदी में मुगल साम्राज्य और फिर 19वीं सदी में ब्रिटिश साम्राज्य का इस शहर पर कब्जा रहा था.

हिसार लोकसभा के दायरे में 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. 2014 लोकसभा चुनाव के मुताबिक हिसार में कुल 11,94,689 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. जिसमें 6,53,423 पुरुष और 5,41,266 महिला वोटर्स की संख्या थी. 2014 में हिसार लोकसभा के अंदर कुल 1202 पोलिंग बूथ बनाए गए थे.

पूरे प्रदेश में मोदी लहर के बावजूद हिसार सीट पर 2014 में भारतीय जनता पार्टी की पकड़ ढीली पड़ गई थी. इस सीट पर इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा जनहित कांग्रेस (HJC BL) के कुलदीप बिश्नोई को हराया था. 2014 में चुनाव में बीजेपी और (HJC BL) के बीच गठबंधन था. गठबंधन के अनुसार 10 में से 8 सीटों पर बीजेपी ने और कुलदीप बिश्नोई की पार्टी ने 2 सीटों पर चुनाव लड़ी थी.

2014 में दुष्यंत चौटाला को कुल 4,94,478 वोट मिले थे, जबकि बिश्नोई को 4,62,631 वोट पड़े थे. इस तरह युवा दुष्यंत चौटाला ने हिसार लोकसभा क्षेत्र से 31,847 वोट से जीत हासिल की थी. 2014 में INLD को हरियाणा में हिसार और सिरसा लोकसभा सीट से संतोष करना पड़ा था.

हिसार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर नज़र डालें तो यहां कुल 2,304,063 लोगों की आबादी है, जिनमें 74.37% लोग ग्रामीण इलाकों में और 25.63% लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। हिसार एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। साथ ही यहां कई फैक्ट्रियां भी हैं। यानी यहां का असली वोटर किसान और कामगार हैं। अगर इतिहास के पन्‍ने पलटें तो इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी आज तक काबिज नहीं हो सकी है। वहीं केवल एक मात्र सांसद सुरेंदर सिंह बरवाला ही ऐसे हैं, जो लगातार दो बार जीत दर्ज करने में कामयाब हुए हैं। पहली बार यानी 1998 में वे हरियाणा लोक दल (राष्‍ट्रीय) के टिकट पर जीते थे, जबकि दूसरी बार आईएनएलडी के टिकट पर। सबसे अधिक बार चुनाव जीतने के मामले में जय प्रकाश सबसे आगे रहे। जयप्रकाश पहली बार 1989 में जनता दल के टिकट पर जीते, दूसरी बार 1996 में हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर और तीसरी बार 2004 में कांग्रेस के टिकट पर वे दिल्‍ली पहुंचे।

जींद में बीजेपी ने पहली जीत दर्ज की है और हिसार में भी पहली जीत दर्ज के लिए रणनीति बना रही है। रोहतक और हिसार लोकसभा सीटों पर अपना फोकस इसलिए किए हुए क्योंकि केंद्र में 10 सीटों पर जीत दर्ज करके हरियाणा सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करना चाहती है। दूसरी तरफ विपक्ष की दो पार्टियों के मुख्यमंत्री चेहरों को हराकर हरियाणा में एक मजबूत मैसेज देने के लिए ठोस रणनीति बना रही है। दीपेंद्र हुड्डा की हार मुख्यमंत्री के दावेदार भूपेंद्र हुड्डा को कमजोर करेगी तो जेजेपी से प्रमुख नेता दुष्यंत चौटाला को हराकर जेजेपी की कमर तोड़ने का काम करेगी। लोकसभा में इन दो नेताओं की हार के बाद आने वाले विधानसभा चुनाव का आधा रण पहले ही जीत लेना चाहती है। ऐसे में पूरी सरकार इन दो सीटों पर पूरी जी जान से लगी हुई है। दूसरी तरफ विपक्ष खुद को अभी तक यह कहकर बरगलाने की कोशिश करता रहा था कि हरियाणा की जनता बीजेपी सरकार से पूरी तरह तंग है, जबकि नगर निगम चुनाव और जींद उपचुनाव के नतीजों ने बता दिया कि हरियाणा की जनता से बीजेपी के विकास कार्यों पर मोहर लगाई है।


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