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नया हरियाणा

मंगलवार, 26 मार्च 2019

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हरियाणा की मलिक खाप ने घूंघट प्रथा को किया खत्म

यह एक अच्छी और ऐतिहासिक पहल है, जिसका अनुसरण दूसरी खापों को भी करना चाहिए.

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20 फ़रवरी 2018



नया हरियाणा

हरियाणा सरकार की पत्रिका ‘हरियाणा संवाद’ के 2017 मार्च  के अंक में अंतिम पेज पर प्रकाशित घूंघट में महिला की फोटो पर ‘हरियाणा की शान लिखना’ प्रदेश सरकार के लिए मुसीबत बन गया था। चित्र के साथ लिखा गया है, ‘घूंघट की आन -बान, म्हारे हरियाणा की पहचान।’ इस मामले को लेकर हरियाणा सरकार की काफी आलोचना हुई है।
नेशनल मीडिया में  खाप के हमेशा बुरे पहलुओं को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं, परंतु इस बार खाप ने जब ऐतिहासिक फैसला लेते हुए घूंघट प्रथा को खत्म किया है तो उसकी चर्चा न के बराबर होगी. इस तरह के दोहरे चरित्र के कारण ही खाप नेताओं को पूरी मीडिया को गरियाने का मौका मिल जाता है.
 गठवाला खाप पंचायत ने एक एतिहासिक कदम उठाते हुए घूंघट प्रथा को खत्म कर दिया है। मलिक गोत्र की (गठवाला खाप) की महिलाएं अब घूंघट नहीं ओढ़ेंगी। दूसरी तरफ सिर पर पल्लू रखना अनिवार्य रहेगा। मान-सम्मान के नाम पर सिर पर पल्लू रखने का फैसला शायद बेटी और बहू के बीच का फर्क रखने के लिए रखा गया होगा, क्योंकि यह फर्क मिटने पर यह नहीं पता चलेगा कि लड़की गांव की बहू है या बेटी।
 20 फरवरी 2018  सोमवार को खाप ने यह अहम निर्णय लिया। गोहाना के मलिक भवन में आयोजित खाप के संस्थापक दादा घासीराम जयंती पर आयोजित समारोह में इस फैसले को लिया गया। समारोह में सामाजिक दृष्टि से अन्य कई अहम निर्णय भी लिए गए। समारोह का शुभारंभ बिहार के राज्यपाल सत्यपाल  मलिक के अलावा केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह, कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ भी पहुंचे थे। 
गठवाला खाप के प्रधान दादा बलजीत सिंह मलिक ने समारोह में कई सामाजिक प्रस्ताव रखे, जिन्हें खाप के लोगों ने पास कर दिया। वहां फैसला लिया गया कि मलिक खाप के लोग बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को बढ़ावा देंगे और कन्या भ्रूण हत्या करवाने वालों की सामाजिक रूप से आलोचना की जाएगी। शादी या अन्य समारोह में डीजे नहीं बजाने व फायरिंग नहीं करने का फैसला भी हुआ। पर्यावरण को देखते हुए आतिशबाजी भी नहीं होगी। खाप के लोग अनावश्यक खर्च से बचने के लिए रात की जगह दिन में शादी करेंगे और शादियों में दहेज लेने व देने पर प्रतिबंध होगा। सत्रहवीं, मृत्यु भोज व दशोरी काज से परहेज किया जाएगा। इन कामों पर खर्च होने वाले रुपये को किसी कन्या गुरुकुल, पाठशाला या गोशाला में दिया जाएगा। गठवाला खाप के मलिक भवन के उत्थान में सहयोग देने की बात भी कही गई। यह फैसले होने के बाद मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा कि घूंघट प्रथा को खत्म करके खाप ने अच्छा फैसला लिया है, लेकिन महिलाओं के सिर पर पल्लू जरूर होना चाहिए।
दरअसल देखने वाली बात यह होगी कि मलिक गौत्र या गठवाल समाज के लोग इन फैसलों पर कितना अमल करते हैं और कितना नहीं करते हैं? 
 


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