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नया हरियाणा

रविवार, 17 जनवरी 2021

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दिग्विजय चौटाला ने ताऊ देवीलाल की पारिवारिक परंपरा को तोड़ा!

14 फरवरी को अभय चौटाला का जन्मदिन मनाया जाता है।

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14 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

देवीलाल परिवार के किसी भी सदस्य ने चाहे व विधानसभा हो या फिर लोकसभा चुनाव अपने पहले चुनाव में जीत हासिल की है। उसी के नक्शे कदम पर चलते हुए हिसार लोकसभा से 2014 में दुष्यंत चौटाला ने पहला चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल कर परिवार की परंपरा को कायम रखा। चौ. देवीलाल परिवार के अब तक नौ सदस्य चुनाव लड़ चुके हैं। जबकि उनके पड़पौते दिग्विजय चौटाला ने जींद उपचुनाव में ताऊ देवीलाल की परंपरा को तोड़ा है। जींद उपचुनाव में बीजेपी के कृष्ण मिड्ढा ने जेजेपी के दिग्विजय चौटाला को तकरीबन 12हजार से ज्यादा वोटों से मात दी। चुनावों में हार-जीत लगी रहती है, परंतु ताऊ देवीलाल के परिवार की परंपरा में अपना पहला चुनाव हारने वाले दिग्विजय चौटाला पहले नेता हैं।

देवीलाल परिवार व राजनीति का संबंध शुरू से ही अटूट रहा है। या यूं कहिए कि इस परिवार की राजनीति पारी निरंतर चल रही है। इतना ही नहीं प्रदेश के चुनाव हो या फिर देश के हर चुनाव में देवीलाल परिवार का अहम महत्व रहता है। यह परिवार एक विधायक से लेकर उपप्रधानमंत्री के पद तक पहुंचा है।

इस परिवार प्रदेश में अपना एक विशेष वोट बैंक हैं जो पार्टियां बदलने के बाद भी कभी नहीं बदला तथा इस परिवार के साथ रहा है। यही वजह है कि आज इस परिवार की चौथी पीढ़ी ने अब तक का सबसे युवा सांसद होने का गौरव प्राप्त किया है। इतना ही नहीं दुष्यंत ने यह रिकॉर्ड बनाते हुए अपने पूर्वजों की लोकसभा का 14 वर्ष का अज्ञातवास भी समाप्त किया। चौ. देवीलाल के बड़े भाई साहब सिंह से लेकर दुष्यंत सिंह चौटाला तक परिवार के जितने भी सदस्यों ने चुनाव लड़े अपना पहले चुनाव में जीत हासिल की।


साहब सिंह ने जीता पहला चुनाव


चौ. देवीलाल के बड़े भाई साहब सिंह ने सबसे पहले 1937 में हिसार उत्तर से पंजाब विधानसभा में प्रवेश कर राजनीति की शुरूआत की थी। 1957 में चौ. देवीलाल ने कांग्रेस की टिकट पर सिरसा विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कर संयुक्त पंजाब विधानसभा के सदस्य बन कर परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाया था। इसके बाद 1967 में ऐलनाबाद से चौ. देवीलाल के छोटे बेटे प्रताप सिंह ने हरियाणा विधानसभा में प्रवेश किया। 1970 में उनके बड़े पुत्र ओमप्रकाश चौटाला ने ऐलनाबाद से हुए उपचुनाव में विधानसभा में प्रवेश किया। 1987 में रणजीत सिंह ने अपने पहले चुनाव में जीत दर्ज की।

ओमप्रकाश चौटाला के बड़े पुत्र अजय सिंह चौटाला ने तीसरी पीढ़ी की शुरूआत करते हुए दाताराम गढ़ सीट से राजस्थान विधानसभा में प्रवेश किया था। इसी प्रकार अजय के छोटे भाई अभय सिंह चौटाला ने वर्ष 2000 में रोड़ी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया।


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