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नया हरियाणा

शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

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अशोक तंवर का प्रदेशाध्यक्ष का कार्यकाल कल खत्म, बन सकता है नया प्रदेशाध्यक्ष

कांग्रेस को एक लाइन पर लाने में जुटे नबी वन-टू-वन फीडबैक जुटा रहें हैं

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13 फ़रवरी 2019



नया हरियाणा

कांग्रेस के हरियाणा मामलों के प्रभारी गुलाम नबी आजाद अपने फुल फॉर्म में आ गए हैं. प्रदेश कांग्रेस की गुटबाजी और खींचतान पर कड़ा नोटिस लेते हुए उन्होंने वन- टू-वन फीडबैक लेना शुरु कर दिया है. कांग्रेस दिग्गजों को एक मंच पर लाने और गुटबाजी खत्म करने का जिम्मा राहुल गांधी ने आजाद को सौंपा है. आजाद ने अपनी इस मुहिम की शुरुआत कर दी है. हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कांग्रेस के कुल 17 विधायक हैं. इनमें कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन रणदीप सुरजेवाला, सीएलपी लीडर किरण चौधरी और आदमपुर विधायक कुलदीप बिश्नोई भी शामिल है. सूत्रों का कहना है कि गुलाब नबी ने इन सभी नेताओं से मुलाकात की है. वर्तमान में अशोक तंवर कांग्रेस के प्रधान हैं जिनका कार्यकाल 14 फरवरी को पूरा हो जाएगा. पार्टी में तंवर को हटाने के लिए उनके विरोधी लंबे समय से लॉबिंग कर रहे हैं. हरियाणा प्रभारी से विधायकों की मुलाकात इसी सिलसिले में की गई.
गुलाम नबी आजाद ने पहले हरियाणा प्रभारी नियुक्त किए गए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं में चल रही गुटबाजी के कारण ज्यादा समय नहीं चल पाए. अतीत से सबक लेते हुए आजाद पूरी रणनीति के तहत हरियाणा में अपने कदम आगे बढ़ा रहे हैं. विधायकों के साथ हो रही बैठक में लोकसभा के संभावित और जीत हासिल करने में सक्षम प्रत्याशियों के बारे में भी बातचीत की जा रही है. इसके अलावा प्रत्येक विधायक से कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी कलह और हरियाणा के राजनीतिक हालात पर भी चर्चा जारी है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर पहली बार किसी प्रभारी द्वारा रणनीतिक तरीके से हरियाणा में काम किया जा रहा है. जिससे यह साफ है कि हरियाणा में कांग्रेस का संगठनात्मक विस्तार जल्दी हो जाएगा. तंवर अकेले ऐसे नेता हैं जो आपसी खींचतान के चलते जिला ब्लाक कार्यकारिणी का गठन नहीं कर सके हैं. अब आजाद द्वारा निजी दिलचस्पी लेकर आने के बाद यह साफ हो गया है कि हरियाणा में अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खींचतान भले ही खत्म न हो, लेकिन 4 साल से अटका संगठन का विस्तार अवश्य हो जाएगा. 
आजाद विधायकों से हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एक मंच पर कैसे आ सकते हैं, लोकसभा में संभावित प्रत्याशी कौन हो सकता है, क्या आप मौजूदा हलके से चुनाव लड़ना चाहते हैं या हल्का बदलना चाहते हैं, हरियाणा के वर्तमान राजनीतिक हालात क्या हैं और भाजपा को किन मुद्दों पर किया जा सकता है आदि प्रश्न पूछ रहे हैं. 

मौटे तौर पर देखने में कांग्रेस मूलतः दो धड़ों में बंटी हुई साफ दिखती है- भूपेंद्र हुड्डा खेमा और रणदीप सुरजेवाला खेमा. पहले खेमे के पास शक्ति बल अर्थात् एमएलए हैं तो दूसरे खेमे के पास बौद्धिक बल है. जिसकी पहुंच हाईकमान तक है. प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर का कार्यकाल 14 फरवरी को पूरा हो जाएगा. ऐसे में उनको दोबारा ये कार्यभार मिलना संभव नहीं लग रहा है, क्योंकि वो 5 साल में संगठन को विस्तार देना तो दूर पदाधिकारी भी नहीं बना सके. जिसकी उन्हें कीमत चुकानी तय दिख रही है. अशोक तंवर रणदीप सुरजेवाला के खेमे में हैं. कुलदीप बिश्नोई आंतरिक तौर पर पूर्व सीएम हुड्डा से भले ही खार खाए हुए हों, परंतु उनकी गोटियां आजकल हुड्डा खेमे के साथ जमी हुई हैं. ऐसे में उनके प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की प्रबल संभावनाएं हैं, क्योंकि उनके नाम पर रणदीप सुरजेवाला भी विरोध नहीं करेंगे, क्योंकि बीजेपी की जाट-गैर जाट की राजनीति में कुलदीप बिश्नोई ही कांग्रेस के पास तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं. कुलदीप बिश्नोई के प्रदेशाध्यक्ष बनने को लेकर पूर्व सीएम हुड्डा को भी एतराज नहीं होगा.


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