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नया हरियाणा

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

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बराला, धनखड़ और अभिमन्यु से आपको तकलीफ क्यूँ है यशपाल मलिक?

यशपाल मलिक के नाम वरिष्ठ वकील नारायण तेहलान ने फेसबुक पर खुला ख़त लिखा है. इस ख़त में तेहलान जी ने कई संजीदा और तीखे सवाल उठाये हैं जिनसे यशपाल मलिक की मंशा और कार्यप्रणाली सवालों और शक के घेरे में आती है. पढ़िए क्या लिखा है इसमें.

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15 फ़रवरी 2018

नारायण तेहलान

भाई यशपाल मलिक जी से चंद सवालात ... आखिर वह कौनसी ग़ैबी ताकत है जो आपको जो आपको कभी खाईयों तो कभी खंदकों में धकेले जा रही है?अगर सुभाष बराला हरियाणा के सत्ताधारी दल भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष है तो आपको क्या तकलीफ है जबकि उसने बीजेपी का प्रदेशाध्यक्ष होते हुए जाट होने के नाते जाट आरक्षण की मांग का पुरजोर समर्थन किया था? अगर कैप्टन अभिमन्यु, एक जाट, बीजेपी की सरकार में प्रदेश के वित्तमंत्री के अहम ओहदे पर है और कामयाबी के साथ अपना काम कर रहा है तो उससे आपको क्या तकलीफ है जबकि उसने सरकार में मंत्री रहते हुए जाटों के हकों की पुरजोर हिमायत की थी, और आज भी कर रहा है।

यही नहीं बराला और अभिमन्यु दोनों ने ही अपनी ही पार्टी के सांसद राजकुमार सैनी को खुल कर लताड़ा था क्योंकि वह जाट बिरादरी के लिए बदकलामी से पेश आ रहा था? आपको क्या दिक्कत हो रही है अगर ओमप्रकाश धनखड़ प्रदेश की सरकार में केबिनेट मंत्री हैं, जबकि पहले दो सज्जनों की ही तरह इसने भी जाटों को आरक्षण दिये जाने की पुरजोर हिमायत की थी और आज भी कर रहा है?

आप किस कारण से एक भी जाट को सत्तारूढ़ दल और इसकी सरकार में किसी अहम पद पर नहीं देखना सहन कर पा रहे ? अगर आप यह नहीं चाहते कि कोई भी जाट नेता बीजेपी में मंत्री या पदाधिकारी न रहे क्योंकि इसमें जाट समुदाय को फायदा होगा तो फिर आप क्यों केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह को हरियाणा से और दो केंद्रीय मंत्रियों को उ प से उठाए फिरते रहे हो? उन्हें भी क्यों नहीं समझाया या दुत्कारा कि उनके सत्ता में रहने से जाटों के हितों को नुकसान हो रहा है? क्यों आप बीरेंद्र सिंह और अभय सिंह चौटाला जी को जसिया के मंच जैसी विवादित जगह पर लेकर आए थे और भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को जीभर कर कोसा था? हुड्डा को कोसने और अभय और बीरेंद्र सिंह को साथ बैठाने से जाट समुदाय को कौन सा खास फायदा होने वाला आपको दिखाई दिया था ? आखिर किस मुंह से और किस आधार पर आप यह कह सकते हैं कि हरियाणा को बराला धनखड़ और अभिमन्यु ने जलवाया था?

आप जब अब तक यह कहते आए थे कि इसके पीछे राजकुमार सैनी आदि थे आज अचानक ये बीजेपी के तीनों जाट नेता कैसे पिक्चर में आ गए? आपको समैण में तथाकथित तौर पर अपने ऊपर हुए हमले का जितना मलाल हुआ उसका दसवां हिस्सा भी अभिमन्यु का घर जलने पर क्यों नहीं हुआ? आपको अपने जेल जाने के भय से कलेजा कांपा और आपने अपना केस वापिस करा लिया अगर इसका दसवां हिस्सा भी जेल जाने वाले और मरने वाले युवाओं के लिए कंपता तो हालात बदल सकते थे, फिर क्यों नहीं बदले ? आपने समझौते की शर्तों में अपने ऊपर हुए समैण के हमले पर कार्रवाई की शर्त लगा दी और यह तक भी नहीं सोचा कि फिर अभिमन्यु से किस मुंह से केस वापसी की बात करेंगे? वह कौन सी ताकत रही जिसने आपको कौम का नेतृत्व करते हुए कोम के हित में अभिमन्यु के पास जाने से रोके रखा जबकि एक नेता का यह फर्ज होता है कि वह हर वह काम करे जिससे जनता का फायदा होता हो? ऐसी कौन वजुहात रही जिनके कारण आप रूठे हुए जाट नेताओं को मनाने और एक मंच पर लाने में खरे तौर पर इंकार करते रहे जबकि एकता निहायत जरूरी थी जिसकी कमी के कारण आखिरतः पूरी कौम की पिटाई छिताई धुनाई हुई? इस सबके पीछे या तो आपका प्रबल अहंकार कि मैं भला.....? या फिर आपका हीनभाव और आत्मविश्वास की कमी के कारण मन में उपजा संदेह कि कहीं मेरे नेतृत्व को कोई चेलेंज न कर दे, या फिर हिसाब किताब की गड़बड़ी के चलते हड़बडी का भय कि कहीं परतें न खुल जाएं, या फिर स्वार्थी चमचों का दबाव या कोई बड़ा राजनीतिक लालच आदि आदि कारण रहे। इनसे अन्य कोई रहा हो तो आप बताएं।

मुझे यह लगता है कि अब आप धकेले जाने लगे हो। इस्तेमाल होने लगे हो और अपना प्रभाव खोने लगे हो। अब आप कौम को नेतृत्व देने के काबिल नहीं रहे हो और न ही अब कौम के लिए कोई बड़ा जज्बा अब आप में बचा है। अगर बचा होता तो आपको कोई जाट मुख्यमंत्री बनने की कोशिश करने से तकलीफ के बजाय खुशी होती। एक तरफ तो आप जाट जाट पुकार रहे हो और दूसरी तरफ जाट मंत्रियों की चुगली मुख्यमंत्री और पार्टी हाईकमान में करते हो। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपने किसी चहेते को मुख्यमंत्री बनवाने की सुपारी ले रखी हो? अब आप खुलकर और सब खोलकर समाज में आइये। सबको साथ लेकर चलिये और सब दंभ त्याग कर नेतृत्व संभालिये या फिर नेतृत्व संभलवाइये और सहयोग का आश्वासन दीजिए।...... सादर नमस्कार


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