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नया हरियाणा

शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

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हरियाणा नहीं चाहता क्षेत्रवाद, भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार और अकुशलता वाले पुराने दिन : जवाहर यादव

हाऊसिंग बोर्ड के चेयरमैन जवाहर यादव ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हरियाणा के लोग कभी नहीं चाहेंगे कि हुड्डा का कुशासन कभी आए.

Do not scare Hooda ji, Haryana does not want regionalism, Bhai-nepotism, old days of corruption and inefficiency- Jawahar Yadav, naya haryana

13 फ़रवरी 2018

जवाहर यादव

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि हरियाणा के लोग पुराने दिनों को याद करने लगे हैं और पुराने दिन वापिस लाना चाहते हैं। अपने गिने-चुने समर्थकों के सपनों को राज्य के लोगों की भावना समझ बैठे हैं। हरियाणा के लोग उनकी सरकार और मौजूदा मनोहर सरकार के बीच के अंतर को बखूबी समझ रहे हैं ।
भला किस राज्य के किसान चाहेंगे कि फ़सल खराब होने पर उन्हें मिलने वाला मुआवज़ा 12 हजार रुपये एकड़ से घटकर 6 हजार रुपये हो जाए? कौन बुज़ुर्ग 1800 रुपये की बजाय 1000 रुपये पेंशन के तौर पर पाकर खुश होंगे ? जिस बुढ़ापा पेंशन को 100 रुपये से 1000 तक पहुंचने में 27 साल लग गए, उसे भाजपा सरकार ने 3 साल में 1000 से 1800 पर पहुंचा दिया है, और कुछ महीनों बाद 2000 रुपये मिला करेंगे। ये सब ना तो हुड्डा सरकार में संभव था, ना किसी अन्य सरकार में।
हुड्डा जी की भले इच्छा हो लेकिन हरियाणा के लोग बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि तबादलों के लिए सरकारी कर्मचारी नेताओं के चक्कर काटते रहें या मोटी रिश्वत देने को मजबूर हों। मनोहर सरकार में तो धीरे-धीरे सभी विभागों के तबादले ऑनलाइन होने लगे हैं। वो सरकारें गई जब सिर्फ तबादलों के नाम पर कर्मचारियों का शोषण तक होता था।
गलतफहमी है हुड्डा जी की कि हरियाणा के लोग फिर से उस दौर में लौटना चाहेंगे जब कुंडली-मानेसर-पलवल जैसे प्रोजेक्ट लापरवाही में लटके रहें। राजनीतिक खींचतान में अंबाला-यमुनानगर और भिवानी-महेंद्रगढ़ के हाइवे चौड़े होना तो दूर, गड्ढे भरने से भी मोहताज रहें। हर 20 किलोमीटर पर कॉलेज खोलने वाली ये सरकार हर युवती और माता-पिता के लिए कितनी बड़ी राहत लेकर आई है, इसका अंदाज़ा तक हुड्डा जी और उनके चहेते नहीं लगा सकते। और ये कॉलेज हर जिले में खुल रहे हैं, ना कि किन्ही खास जिलों में।
और हां, होनहार युवा अब मनोहर राज में काबिलीयत के बल पर नौकरी पा रहे हैं। पारदर्शिता का ये ज़माना उन्हीं लोगों को नहीं सुहा रहा जो नौकरियों में पैसे खाते थे और जमकर भ्रष्टाचार करते थे। अक्तूबर 2014 में हुड्डा जी की सरकार को साथ ही रिश्वतखोरी का दौर भी चला गया तो चला गया। अब तो नौकरियों में सिफारिश या पैसा, ढूंढते रह जाओगे।
हुड्डा साहब और उनके चंद चहेतों को वे पुराने दिन इसलिए भी याद आते हैं क्योंकि तब वे दक्षिण हरियाणा का पानी धड़ल्ले से चोरी करते थे। भिवानी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, नूंह, पलवल और फ़रीदाबाद के किसान अपनी लहलहाती फसल देखकर दुआ करते हैं कि पानी चोरों के वो पुराने दिन कभी ना आएं। 
अब भला किसान को वो सुकून किसी और सरकार में कहां मिलेगा जो धोखाधड़ी से ज़मीन छीनकर पिछली सरकारों ने उड़ा दिया था। सेक्शन 4 और 6 के नोटिस देने के बाद ज़मीन निजी बिल्डरों के हाथों में रिलीज कर देने का जो पाप हुड्डा सरकार ने किया, उसके लिए हजारों किसानों के दिल से हाय ही निकलेगी। वापिस वो राज लाने की भूल हमारे जागरुक किसान कतई नहीं करेंगे।
और हां, लठ का राज और बदमाशों की नेतागिरी.. ये ज़माने भी अब लद रहे हैं। गांवों के पंच-सरपंच तक पढ़े-लिखे हैं। ब्लॉक समिति-जिला समिति., हर कहीं तो अब शिक्षित युवाओं ने कमान संभाल ली है। राजनेताओं की ये नई पीढ़ी तो स्वरूप ही बदल देगी राजनीति की, और बंद कर देगी वो सब दुकानें जो झूठ, भेदभाव, द्वेष, षड़यंत्र का कारोबार करती थी। वो पुराने दिन अब नहीं आने हुड्डा जी, जब राजनेताओं के घर करोड़ों-अरबों रुपये से भरते थे। अब तो ‘हरियाणा एक-हरियाणवी एक’ वाली सरकार है जिसे लोग दिल से चाहने लगे हैं।


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